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बुकर पुरस्कार 2022: श्रीलंका के शेहान करुणातिलक को मिला पुरस्कार, बड़ी खास है उनकी रचना

सार

इसके पहले श्रीलंका के मात्र एक लेखक माइकल ओंडात्जे को ‘दि इंग्लिश पेसेंट’ के लिए 1992 में बुकर प्राइज़ मिला था। शेहान यह पुरस्कार पाने वाले दूसरे लेखक हैं।
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बूकर प्राइज 2022 - फोटो : Twitter
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विस्तार
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हिन्दी में मर्डर मिस्ट्री, मृत्यु के बाद जीवन, भूत-प्रेत, मरे लोगों से/की बातचीत को साहित्य के खाते में नहीं रखा जाता है। लेकिन इसी तरह के एक उपन्यास को इस साल का बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आशा है, हिन्दी में भी चलन बदलेगा।

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ब्रिटेन का इस साल का सबसे बड़ा पुरस्कार बुकर प्राइज़ श्रीलंका के 47 साल के शेहान करुणातिलक को उनके दूसरे उपन्यास ‘द सेवेन मून्स ऑफ़ माली अल्मेडा’ केलिए मिला है। यह उपन्यास ‘चैट्स विथ द डेड’ नाम से भी उपलब्ध है। शेहान ने यह लंका के गृहयुद्ध के बीच मरने वालों, वहां के भ्रष्टाचार, नस्लवाद की सामग्री पर लिखा है। इसके द्वारा उन्होंने अपने देशवासियों को संदेश दिया है, ‘भ्रष्टाचार और नस्लवाद तथा साठगांठ के इन विचारों ने काम नहीं किया है और कभी भी काम नहीं करेंगे।’ यह संदेश मात्र उनके देश केलिए न होकर सब देशों के लिए है। वे आशा करते हैं कि उनके देश में इसे पढ़ा जाएगा।

10 साल लगा कर उन्होंने इसे रचा है। उनका पहला उपन्यास 2010 में ‘चाइनामैन: द लेजेंड ऑफ़ प्रदीप मैथ्यु’ था और इसके लिए उन्हें कॉमनवेल्थ बुक प्राइज़ मिला था। बहुत कम ऐसा होता है कि पहली कृति ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हो जाए।
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शेहान करुणातिलक का जन्म 1975 में श्रीलंका के गॉल नामक स्थान में हुआ। उनका लालन-पालन कोलंबो में तथा पढ़ाई न्यूज़ीलैंड (मेस्सी युनिवर्सिटी) में हुई। काम के सिलसिले में वे लंदन, एम्स्टेरडैम एवं सिंगापुर में रहे। आजकल वे श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में रहते हैं। लिखने के अलावा उन्होंने कई अन्य काम किए हैं, जिनमें विज्ञापन जगत में कॉपीराइटर का काम शामिल है, जो वे आज भी कर रहे हैं।
 

भोर में वे लिखते हैं और दिन में कॉपीराइट का काम करते हैं। वे गीत (रॉक सॉन्ग) स्क्रिप्ट तथा कहानियां, यात्रा कहानियां भी लिखते हैं, जो रोलिंग स्टोन तथा नेशनल ज्योग्रफ़ी जैसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। उन्होंने इंडिपेंडेंट स्कॉयर नामक रॉक बैंड में गिटार वादक का काम भी किया है। उनकी तीन पिक्चर बुक प्रकाशित हैं। खुद उन्हें ‘लिंकन इन द बारदो’, ‘क्लाउड एटलस‘, ‘द हैंडमेड’स टेल’ तथा ‘गर्ल एंड वूमन’ किताबें पसंद हैं।

 


शेहान का पहला उपन्यास भी रहा है चर्चा में

शेहान करुणातिलक का पहला उपन्यास ‘चाइनामैन: द लेजेंड ऑफ़ प्रदीप मैथ्यु’ को कॉमनवेल्थ के अलावा अन्य कई पुरस्कार प्राप्त हुए, इसे क्रिकेट पर लिखा गया सर्वकालिक द्वितीय उपन्यास की संज्ञा हासिल है। दूसरा उपन्यास युद्ध काल में मारे गए एक फ़ोटोग्राफ़र माली अल्मेडा की कहानी है जो अपनी मौत का कारण पता करने के मिशन पर है। उसके पास पता करने के लिए मात्र सात दिन (सेवन मून्स) का समय है।

माली अल्मेडा जुआरी और समलैंगिक है। 1990 में मौत के बाद जब वह जगता है खुद को वीजा ऑफ़िस जैसे स्थान में पाता है। उसके पास गृहयुद्ध के समय हुए अत्याचारों से जुड़े फ़ोटोग्राफ़ हैं जिनके उजागर होने पर हंगामा हो जाएगा। ‘श्रीलंका के लोग फ़ांसी के समय भी मजाक करने में माहिर होते हैं।’ कहने वाले उपन्यासकार ने अपना यह उपन्यास भयंकर हास्य शैली में लिखा है जो शैलियों, जीवन-मृत्यु, शरीर-आत्मा, पूर्व-पश्चिम की सीमाओं के पार जाता है।


श्रीलंका को दूसरी बार मिला बुकर पुरस्कार

इसके पहले श्रीलंका के मात्र एक लेखक माइकल ओंडात्जे को ‘दि इंग्लिश पेसेंट’ केलिए 1992 में बुकर प्राइज़ मिला था। अब बुकर का विस्तार कर इसे अंग्रेजी में लिखने वाले तथा ब्रिटेन एवं आयरलैंड में प्रकाशित सर्वोत्तम लेखन के लिए दिया जाता है। कई अन्य लोगों के साथ सलमान रुश्दी, अरुंधति राय तथा अरविंद अडिगा को यह मिल चुका है।

कुछ दिन पूर्व सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला हुआ था। शाहेन करुणातिलक ने इस घटना के बाद अपनी कुछ कहानियां प्रकाशन से रोक ली हैं क्योंकि उनकी पत्नी ने कहा कि आपके दो छोटे बच्चे हैं, अत: इन कहानियों को छोड़ दें। बात में दम था और पति ने पत्नी की बात मानी।

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बूकर प्राइज 2022- शेहान करुणातिलक - फोटो : Twitter

170 किताबें में से चुनी गई शेहान की नॉवेल

बुकर ज्युरी के पास पढ़ने को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आई 170 किताबें थीं। जिसमें से पहले उन लोगों ने 30 किताबों को छांटा। फ़िर दोबारा इन तीस को पढ़ कर छ: किताबों की शॉर्टलिस्ट बनाई। इस सूची में शेहान करुणातिलक (‘द सेवेन मून्स ऑफ़ माली अल्मेडा’) के अलावा 87 साल के एलन गार्नर (‘ट्रिकल वॉकर’), नोवायलेट बुलावायो (‘ग्लोरी’), पर्सिवल एवरेट (‘द ट्रीज’), क्लेयर कीगन (‘स्मॉल थिंग्स’) तथा एलिज़ाबेथ स्ट्राउट (‘ओह विलियम’) शामिल थी।
इस साल की नोबेल प्राइज़ पाने वाली एनी अर्नो भी छोटी रचनाएं (मात्र 40-140 पन्ने) करती हैं। लघु सूची में शामिल अन्य पांच रचनाकारों को भी 2,500-2,500 पाउंड की राशि मिली। विजेता शेहान करुणातिलक को 50,000 पाउंड यानी लगभग 57,000 डॉलर (तकरीबन 46 लाख रुपये) मिले हैं। ब्रिटेन की रानी कामिला के हाथों विजेता को सम्मानित किया गया।

इस साल के बुकर ज्युरी के अध्यक्ष नील मैक्ग्रेगर के अनुसार यह उपन्यास ‘आफ़्टरलाइफ़’ किस्म का है, यह किताब पाठकों को एक भयानक, हास्य और जीवन-मृत्यु के परे अलग दुनिया की यात्रा पर ले जाती है। सर्वसम्मति से चुना गया उपन्यास समिति के सदस्यों के अनुसार यह अजीब तथा समय के विरुद्ध दौड़, भूतों, मिथ्याकथन, साथ ही गहन मानवता से भरा हुआ है।
 
एक सदस्य के अनुसार ‘यह अपने समय से आगे की कहानी है।’ स्वयं विजेता के अनुसार ‘हम सब इस शानदार शॉर्टलिस्ट का हिस्सा बनने के विजेता हैं।’ उन्होंने मजाक में कहा कि शायद मेरी जेब में थोड़ी अधिक रकम जाएगी।
 


कई मामलों में खास है ये उपन्यास

उपन्यासकार शाहेन करुणातिलक के अनुसार वे 20 साल पहले 1989 के काले दिनों में जाते हैं। ये उनकी स्मृति में सर्वाधिक भयंकर दिन हैं जब जातीय युद्ध, मार्क्सवाद की बगावत, विदेशी सैन्य उपस्थिति तथा राज्य के जवाबी हमले दस्ते सक्रिय थे। यह समय राजनैतिक हत्याओं, लोगों के गायब होने, बम तथा शवों का था। नब्बे के अंत तक अधिकांश विरोधी मर चुके थे अत: उन्हें इन भूतों बल्कि वर्तमान के करीबी लोगों के बारे में लिखना सुरक्षित लगा।

यह बहुस्तरीय उपन्यास आकर्षक, भावुकता से दूर, कभी क्रोधित, कभी नरम अविस्मरणीय स्वर वाला है। सजीव ऊर्जा के साथ लिखी गई इस कहानी का नायक माली अल्मेडा (इसकी आत्मा) है, उसका चरित्र जटिल है।

माली अल्मेडा पाठक के लिए एक अनोखा साथी है भले ही वह अपनी अचानक हुई मौत से दु:खी है। समृद्ध उपन्यास श्याम हास्य की सृष्टि करता है। श्रीलंका का इतिहास बहुत उथल-पुथल और अत्याचारपूर्ण रहा है। श्रीलंका के इतिहास को सनसनीखेज रोमांच के रूप में पाठकों को सौंपती कथा ‘द सेवेन मून्स ऑफ़ माली अल्मेडा’ उन्हें भविष्य के प्रति आगाह करती है। उपन्यास बताता है कि असहष्णुतापूर्ण वातावरण में कैसे निबाह करना है, अगर संभव है तो इसे परिवर्तित करने का प्रयास करना है, अगर संभव नहीं है तो कैसे इसका मुकाबला करना है। 

इस सम्मानित बुकर पुरस्कार पाने केलिए शेहान करुणातिलक को बधाई!


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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