बूकर प्राइज 2022- शेहान करुणातिलक
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170 किताबें में से चुनी गई शेहान की नॉवेल
बुकर ज्युरी के पास पढ़ने को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आई 170 किताबें थीं। जिसमें से पहले उन लोगों ने 30 किताबों को छांटा। फ़िर दोबारा इन तीस को पढ़ कर छ: किताबों की शॉर्टलिस्ट बनाई। इस सूची में शेहान करुणातिलक (‘द सेवेन मून्स ऑफ़ माली अल्मेडा’) के अलावा 87 साल के एलन गार्नर (‘ट्रिकल वॉकर’), नोवायलेट बुलावायो (‘ग्लोरी’), पर्सिवल एवरेट (‘द ट्रीज’), क्लेयर कीगन (‘स्मॉल थिंग्स’) तथा एलिज़ाबेथ स्ट्राउट (‘ओह विलियम’) शामिल थी।
इस साल की नोबेल प्राइज़ पाने वाली एनी अर्नो भी छोटी रचनाएं (मात्र 40-140 पन्ने) करती हैं। लघु सूची में शामिल अन्य पांच रचनाकारों को भी 2,500-2,500 पाउंड की राशि मिली। विजेता शेहान करुणातिलक को 50,000 पाउंड यानी लगभग 57,000 डॉलर (तकरीबन 46 लाख रुपये) मिले हैं। ब्रिटेन की रानी कामिला के हाथों विजेता को सम्मानित किया गया।
इस साल के बुकर ज्युरी के अध्यक्ष नील मैक्ग्रेगर के अनुसार यह उपन्यास ‘आफ़्टरलाइफ़’ किस्म का है, यह किताब पाठकों को एक भयानक, हास्य और जीवन-मृत्यु के परे अलग दुनिया की यात्रा पर ले जाती है। सर्वसम्मति से चुना गया उपन्यास समिति के सदस्यों के अनुसार यह अजीब तथा समय के विरुद्ध दौड़, भूतों, मिथ्याकथन, साथ ही गहन मानवता से भरा हुआ है।
एक सदस्य के अनुसार ‘यह अपने समय से आगे की कहानी है।’ स्वयं विजेता के अनुसार ‘हम सब इस शानदार शॉर्टलिस्ट का हिस्सा बनने के विजेता हैं।’ उन्होंने मजाक में कहा कि शायद मेरी जेब में थोड़ी अधिक रकम जाएगी।
कई मामलों में खास है ये उपन्यास
उपन्यासकार शाहेन करुणातिलक के अनुसार वे 20 साल पहले 1989 के काले दिनों में जाते हैं। ये उनकी स्मृति में सर्वाधिक भयंकर दिन हैं जब जातीय युद्ध, मार्क्सवाद की बगावत, विदेशी सैन्य उपस्थिति तथा राज्य के जवाबी हमले दस्ते सक्रिय थे। यह समय राजनैतिक हत्याओं, लोगों के गायब होने, बम तथा शवों का था। नब्बे के अंत तक अधिकांश विरोधी मर चुके थे अत: उन्हें इन भूतों बल्कि वर्तमान के करीबी लोगों के बारे में लिखना सुरक्षित लगा।
यह बहुस्तरीय उपन्यास आकर्षक, भावुकता से दूर, कभी क्रोधित, कभी नरम अविस्मरणीय स्वर वाला है। सजीव ऊर्जा के साथ लिखी गई इस कहानी का नायक माली अल्मेडा (इसकी आत्मा) है, उसका चरित्र जटिल है।
माली अल्मेडा पाठक के लिए एक अनोखा साथी है भले ही वह अपनी अचानक हुई मौत से दु:खी है। समृद्ध उपन्यास श्याम हास्य की सृष्टि करता है। श्रीलंका का इतिहास बहुत उथल-पुथल और अत्याचारपूर्ण रहा है। श्रीलंका के इतिहास को सनसनीखेज रोमांच के रूप में पाठकों को सौंपती कथा ‘द सेवेन मून्स ऑफ़ माली अल्मेडा’ उन्हें भविष्य के प्रति आगाह करती है। उपन्यास बताता है कि असहष्णुतापूर्ण वातावरण में कैसे निबाह करना है, अगर संभव है तो इसे परिवर्तित करने का प्रयास करना है, अगर संभव नहीं है तो कैसे इसका मुकाबला करना है।
इस सम्मानित बुकर पुरस्कार पाने केलिए शेहान करुणातिलक को बधाई!
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