वैज्ञानिक एक नए निष्कर्ष पर पहुंचने के करीब हैं कि किसी बड़े तारे के पतन के दौरान एक नया सूक्ष्म ब्रह्मांड कैसे जन्म ले सकता है। अब तक धारणा यह थी कि तारे के टूटने से ब्लैक होल का निर्माण होता है। यह किसी बड़े तारे के मरने और अपने ही अंदर सिमट जाने से बनता है।
ब्लैक होल को लेकर आज भी कई सवाल अनसुलझे हैं। जैसे, इतना विशाल तारा आखिर एक बेहद छोटे बिंदु में कैसे सिमट जाता है और वहां भौतिकी के नियम कैसे काम करते हैं? इसी तरह, ब्लैक होल का ‘इवेंट होराइजन’ यानी उसके चारों ओर बनी एक अदृश्य सीमा भी रहस्य है, जिसे पार करने के बाद प्रकाश समेत कोई भी चीज वापस नहीं आ सकती। इन्हीं उलझनों के बीच वैज्ञानिकों ने एक वैकल्पिक अवधारणा पर काम किया है, जिसे ‘ग्रैवास्टार' कहते हैं, यानी एक काल्पनिक या सैद्धांतिक खगोलीय पिंड, जो बड़े तारों के टूटने पर ब्लैक होल की जगह बन सकता है।
जर्मनी की गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट के एक शोध में ग्रैवास्टार को ब्लैक होल जैसा बताया गया है, लेकिन इसमें सिंगुलैरिटी या इवेंट होराइजन नहीं होता। इसके भीतर डार्क एनर्जी होती है, जो गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ दबाव बनाकर तारे को पूरी तरह ढहने से रोकती है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जब तारा ब्लैक होल बनने के करीब पहुंचता है, उसी समय उसके भीतर एक छोटा-सा नया ब्रह्मांड जन्म ले सकता है।
यह वही स्थिति है, जैसी बिग बैंग के समय थी, जब लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले हमारा ब्रह्मांड एक बेहद गर्म, सघन और छोटे बिंदु से फैलना शुरू हुआ था। यह कोई बम धमाका नहीं, बल्कि अंतरिक्ष का तेज विस्तार था, जो आज भी जारी है। इसी दौरान समय, अंतरिक्ष और भौतिकी के नियम बने तथा क्वार्क-इलेक्ट्रॉन्स से प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और हाइड्रोजन-हीलियम जैसे तत्व बने। बाद में, एडविन हबल की खोज से पता चला कि ब्रह्मांड फैल रहा है। प्रारंभिक ब्रह्मांड के अवशेष के रूप में अंतरिक्ष में सूक्ष्म तरंग विकिरण मौजूद हैं, जो इस सिद्धांत की पुष्टि करते हैं।
शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर भी पहुंचे कि यह उस सवाल का जवाब हो सकता है कि ग्रैवास्टार सामान्य पदार्थ से कैसे बन सकते हैं। कई वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि ब्लैक होल अब भी गुरुत्वीय पतन की सरलतम व स्वाभाविक व्याख्या है। ब्लैक होल और सूक्ष्म ब्रह्मांड को लेकर हो रहे दिलचस्प शोध भौतिक विज्ञान की रोचकता और जिज्ञासा के केंद्र में हैं।