बच्चों की दुनिया को सूनी होने से कौन बचाएगा?
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छोटी सी बच्ची के इन सवालों का क्या जवाब देती कुछ सूझ नहीं रहा था, लेकिन एक बात समझ आ गई कि हम पैरेंट्स तो अपनी सुविधा के लिए एक ही बच्चा काफी है कह देते हैं, लेकिन उस अकेले बच्चे के लिए अपना बचपन बिताना कितना मुश्किल हो जाता है यह नहीं सोचते। उसके साथ टॉफी शेयर करने वाला, शरारत करने वाला, कोई नहीं होता। बच्चे अपना ये अकेलापन किसी से शेयर नहीं कर पातें और करें भी कैसे किसके पास टाइम है उनसे ये सारी बातें करने के लिए।
कुहू की बातें मेरे दिलो-दिमाग से हटने का नाम नहीं ले रही थी। बेचारी बच्ची जिस उम्र में उसे हंसना-खिलखिलाना चाहिए, उस उम्र में ही उसे अकेलेपन का दर्द झेलना पड़ रहा है। कुहू के पैरंट्स की तरह ही यदि हर माता-पिता सिगल चाइल्ड ही करें तो ज़रा सोचिए स्थिति कितनी भयावह हो जाएगी।
मौसी, मामा, चाचा, चाची, बुआ जैसे रिश्ते तो शायद खत्म ही हो जाएंगे। कल को कुहू की शादी होगी तो मयाके में माता-पिता के अलावा तो कोई रहेगा ही नहीं और उनके जाने के बाद को मायका ही नहीं रहेगा, उसके बच्चे होंगे तो किसे मामा, मौसी कहेंगे? ननिहाल क्या होता है कभी जान ही नहीं पाएंगे।
इस तरह तो एक दिन सारे रिश्ते ही खत्म हो जाएंगे और जीवन एकदम एकाकी हो जाएगा। ऐसी बाते सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई, लेकिन कुहू के सवाल का जवाब नहीं ढूंढ़ पाई कि क्या मैं उसकी मम्मी से कह सकती हूं बाज़ार से भाई/बहन लाने के लिए?
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