शंघाई सहयोग संगठन (फाइल फोटो)
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भारत के लिए क्या होंगी चुनौतियां?
शंघाई सहयोग संगठन में भारत के लिए दो प्रमुख चुनौतियां हैं। एक है चीन और पाकिस्तान की एक साथ उपस्थिति। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा समस्या है। भारत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से आतंकवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहा है। भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के मुद्दे पर एक होने की भी अपील करता रहा है। चीन पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त है। हालांकि 1 मई 2019 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करना भारत के लिए एक बड़ी सफलता है।
यह इसीलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि दस साल तक चीन इस प्रस्ताव का विरोध करता रहा था। लेकिन चीन के इस कदम से पाकिस्तान के प्रति उसके रुख़ में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कालेधन पर नज़र रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकियों को वित्तीय सहायता देने की वजह से ग्रे लिस्ट में डाल दिया है।
एफएटी एफ की 16 से 21 जून तक अमेरिका के ऑर्लैंडो में एक बैठक होने वाली है। इस बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने के बारे में फैसला लिया जा सकता है। मसूद अज़हर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का समर्थन करना चीन की तरफ से पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट से बचाने की कोशिश के तौर पर देखना चाहिए। जुलाई से चीन एफएटीएफ की अध्यक्षता करेगा जो भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चुनौती खड़ी कर सकता है।
भारत के लिए दूसरी चुनौती है उसके अमेरिका के साथ रिश्ते। शंघाई सहयोग संगठन को अमेरिका विरोधी संगठन के तौर पर देखा जाता है। चीन और रूस की बढ़ती नज़दीकियां अमेरिका को इस क्षेत्र से बाहर रखने की कोशिश माना जा रहा है। मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने में अमेरिका की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है। लेकिन इसके बदले में भारत को ईरान से कच्चे तेल की आयात बंद करनी पड़ी थी। हालांकि भारत का कहना है इससे चाबहार प्रकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कच्चे तेल की आयात बंद करने से ईरान के साथ रिश्तों में थोड़ी अनिश्चितता ज़रूर आई है जिसका असर भारत के इस क्षेत्र में विस्तार करने पर पड़ सकता है।
इसी तरह भारत के रूस से एस 400 मिसाइल सिस्टिम खरीदने पर भी अमेरिका ने आपत्ति जताई है। रूस से एस 400 न खरीदने के बदले में अमेरिका ने अपनी मिसाइल सिस्टिमए ड्रोन और एफ 35 फाइटर जेट खरीदने का प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। लेकिन भारत रूस से मिसाइल सिस्टिम खरीदने के अपने रुख़ पर कायम है।
शंघाई सहयोग संगठन भारत के लिए मध्य एशिया और यूरेशिया में अपनी पहुंच बढ़ाने का एक प्रभावी ज़रिया हो सकता है। लेकिन भारत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है की क्या भारत अमेरिका और चीन के साथ अपने रिश्तों में संतुलन रख सकता है, क्या अमेरिका के साथ मज़बूत आर्थिक और सामरिक रिश्ते रखने के साथ ही क्या भारत मध्य एशिया और यूरेशिया में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है यह देखना अभी बाकी है।
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