उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक व मानसिक बदलाव स्वाभाविक हैं, पर ऐसा भी नहीं है कि बुजुर्ग महिलाओं का सौंदर्य बिगड़ जाता है या वे स्वभाव से झक्की बन जाती हैं। बुजुर्ग महिलाओं में एक गरिमा और रुतबा दिखता है, जो उन्हें वर्षों की उम्मीद, संघर्ष और जिंदगी जीने से ही हासिल होता है।
उम्रदराज महिलाएं ब्रह्मांड में टिमटिमाते तारे की रोशनी की तरह होती हैं। मेरी पत्नी को ही ले लीजिए। जब हम पहली बार नौवीं कक्षा में मिले थे, तब वह क्लास की सबसे खूबसूरत लड़की थी। 14 साल की उम्र में उसकी खूबसूरती इतनी दिलकश थी, मानो किसी महान कलाकृति का पहला मसौदा हो। लेकिन आज, 75 साल की उम्र में भी, वह पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत दिखती हैं। उनके चमकीले सफेद बाल इतने शानदार हैं कि लोग सड़क पर उन्हें रोककर तारीफ करते हैं। उनकी सुंदरता दुखों और खुशियों के मिले-जुले अनुभवों से निखरी है। मैंने दशकों तक उनके इस बदलाव को देखा है। उनकी आंखें गहन चिंतन की साक्षात तस्वीर हैं, मानो किसी महत्वपूर्ण विचार को रूप दे दिया गया हो। उनकी त्वचा अब भी कोमल है। केवल गर्दन पर पड़ी झुर्रियां ही उनकी उम्र का राज खोलती हैं।
मैंने ऐसी महिलाएं भी देखी हैं, जो इन बदलावों से डरती थीं और जिन्होंने अपने चेहरे पर बहुत काम करवाया था। मैं हमेशा सोचता था कि उनकी झुर्रियां आखिर कहां चली गईं?
महिलाएं जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर तरह-तरह की भूमिकाओं में होती हैं-एक रोमांटिक पत्नी और प्रेमिका; एक उत्साहित और ध्यान रखने वाली मां; बच्चों के अधिकारों की पैरोकार; अन्य महिलाओं की एक भरोसेमंद सहेली। हर पड़ाव पर उनके चरित्र में एक स्पष्ट विकास देखने को मिलता है। बुजुर्ग महिलाओं का व्यक्तित्व ऐसा होता है, जिसमें उनके अनुभवों की झलक साफ दिखाई देती है। जोश, आत्मविश्वास, करिश्मा-बुजुर्ग महिलाओं में ये गुण कूट-कूटकर भरे होते हैं। यही बात उन्हें बेहद आकर्षक बनाती है।
बात केवल मेरी पत्नी की ही नहीं है, मैं जिन भी उम्रदराज महिलाओं को जानता हूं, वे सभी काफी प्रगतिशील हैं और हमेशा ही आगे की ओर देखती हैं। वे कुछ-न-कुछ करती रहती हैं। मेरी पत्नी बुजुर्ग सहेलियों के एक ऐसे समूह से जुड़ी हैं, जो खुद को ‘मॉर्निंग ग्लोरीज’ (सुबह की धूप) कहती हैं। वे अपने दिन की शुरुआत राजनीति, दुनिया की घटनाओं और परिवार के बारे में मैसेज भेजकर करती हैं। वे सभी समझदार हैं, मजेदार हैं, और अपनी जिंदगी के अंत को ऐसे लेती हैं, मानो यह उनकी जिंदगी की शुरुआत हो।
मैं ऐसी बुजुर्ग महिलाओं को भी जानता हूं, जो साधारण और शांत शुरुआत से आगे बढ़कर अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुईं। इसलिए, आप ऐसी महिलाओं से सीख लेते हुए उम्र बढ़ने के साथ मन में उपज रही आशंकाओं को दरकिनार कर दें और जीवन को रचनात्मक ढंग से जीते हुए हरेक बदलाव को प्राकृतिक रूप से ग्रहण करें।