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दूसरी पारी: तकनीक से कम होंगी दूरियां, श्रवण कमजोरियों से अपनों को कैसे दिलाएं निजात?

Fri, 03 Apr 2026 06:22 AM IST
Pavan अमर उजाला

सार

अपने बुजुर्ग पिता की श्रवण कमजोरियों से जूझ रहे विनय को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों सलाह दी। विनय कहते हैं, मेरे 85 वर्षीय पिता मेरे भाई के साथ रहते हैं। मैं उन्हें रोज फोन करता हूं। भाई का कहना है कि कम सुनाई देने के कारण पिताजी किसी से बात नहीं करना चाहते। मैं कैसे उनकी मदद करूं? 
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तकनीक से कम होंगी दूरियां - फोटो : एआई
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विस्तार
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अपने प्रियजनों से दूर रहते हुए टेलीफोन ही बातचीत का सबसे अच्छा माध्यम है। मैं उस तकलीफ को समझ सकता हूं, जो आपको तब होती है, जब आपके पिता ठीक से न सुन पाने की वजह से फोन पर बात नहीं कर पाते हैं। माता-पिता के साथ लोगों का गहरा लगाव होता है और पढ़ाई एवं रोजगार आदि के कारण दूर रहने के बावजूद अक्सर मन उन्हीं की तरफ लगा रहता है। उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बढ़ती उम्र के साथ अक्सर सुनने की क्षमता में भी कमी देखी जाती है। इसके अलावा, सुनने की क्षमता में कमी वाले लोगों के लिए तेज फ्रीक्वेंसी वाली आवाजों में फर्क कर पाना ज्यादा मुश्किल होता है।
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मेरा सुझाव यह होगा कि एक बार आप स्वयं उनसे मिलने जाएं और यह देखें कि क्या उन्हें ऑडियोमेट्री टेस्ट की जरूरत है। ऑडियोमेट्री टेस्ट एक दर्द रहित, नैदानिक प्रक्रिया है, जो यह मापती है कि कान कितनी अच्छी तरह से आवृत्ति और तीव्रता को सुन या महसूस कर सकते हैं। यह जांच श्रवण हानि का पता लगाने, उसके प्रकार और गंभीरता को निर्धारित करने के लिए की जाती है। इसे ‘श्रवण परीक्षण’ या ऑडियोलॉजिक मूल्यांकन भी कहा जाता है। आप उनके साथ बैठकर ये आसान जांचें सहजता से कर सकते हैं। इसके लिए आप टीवी चालू करें, वॉल्यूम स्विच को आगे-पीछे करके देखें और अंदाजा लगाएं कि क्या आपके पिता कम वॉल्यूम पर सुन पाते हैं, और क्या वॉल्यूम को कम-ज्यादा करने पर भी उन्हें सुनाई देता है। 

इसके अलावा, आप जमीन पर एक सिक्का गिराएं और देखें कि क्या वे तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। इससे आपको अच्छा अंदाजा हो जाएगा कि क्या आपके पिता को सुनने में कोई दिक्कत है। अगर ऐसा है, तो आप ऑडियोमेट्री टेस्ट करवा सकते हैं। साथ ही, ‘स्पीच डिस्क्रिमिनेशन स्कोर’ की जांच भी करवाएं। समस्या की गंभीरता का सही-सही पता लगाने के लिए ये दोनों टेस्ट काउंसलिंग के साथ करवाए जाने चाहिए। 
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आजकल बाजार में कई तरह के हियरिंग उपकरण मिलते हैं। अगर उन्हें सुनने में दिक्कत है, तो ऐसे उपकरणों से मदद मिल सकती है, हालांकि उनके साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा समय लगता है। शुरू में उसका इस्तेमाल करने पर थोड़ा असहज-सा महसूस होता है, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यस्त होने पर ठीक लगने लगता है। 

इस बीच, आप टेक्नोलॉजी का फायदा उठाएं और अपने पिता से बात करने के लिए स्काइप, फेसटाइम या व्हाट्सएप वीडियो कॉल का इस्तेमाल करें, क्योंकि आपके होंठों की हरकतें देखने से उन्हें बेहतर ढंग से बातचीत करने में मदद मिल सकती है। आपको और आपके पिताजी को मेरी शुभकामनाएं!
 

जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके। 

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