हिन्दू धर्म और संस्कृति में सावन को सबसे पवित्र महीने का दर्जा हासिल है।
- फोटो : फाइल फोटो
यह नीला जहर उनके कंठ में एकत्र हो गया जिसके कारण उन्हें नीलकंठ का नाम मिला। उनके शरीर में विष का ताप कम करने के लिए देवों ने दूर-दूर से गंगाजल लाकर उनका अभिषेक किया था। तब से शिवभक्तों द्वारा सावन के महीने में पवित्र गंगा से जल लेकर भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंगों और शिव मंदिरों में अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। शिव के प्रति सम्मान इतना कि भक्त पवित्र जल के कांवर के साथ 'बोल बम' का जयघोष करते सैकड़ों मील की पैदल और कष्टपूर्ण यात्रा कर उनके मंदिर पहुंचते हैं।
आप सबको पवित्र सावन की बहुत शुभकामनाएं, भगवान शिव को समर्पित एक मुक्तक के साथ !
जहर तुमने भी पिया था एक दिन
जहर हम भी तो रोज़ पीते हैं
तुम्हारी फ़िक्र थी दुनिया के लिए
हम तो अपना ही जहर पीते हैं !
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।