संसार कितनी-कितनी सुंदर चीजों से बना है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media (सांकेतिक)
संसार कितनी-कितनी सुंदर चीजों से बना है। नदियां, सागर, उपवन और सुंदर वादियां। हम इनकी अनदेखी करने के कारण ही तो कई प्रकार आधुनिक समस्याओं का सामना कर रहे हैैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए यही सब होगा। प्रकृति से दूर कृत्रिम दुनिया। होड़़ लगी भागने की तो हम भी भागे जा रहे हैं।
हम नीरस -सा जीवनयापन कर रहे अगर हम सोचेंं तो हमने अपनी सोच से काम करना ही छोड़ दिया। हम दूूसरों की सोच के अनुसार जी रहे हैैं। अगर चिड़िया चाहे की वह बाज की तरह आसमान उड़े ऐसा हो ही नहींं सकता। सबकी अपनी-अपनी सीमा है। मानव जाति सोच-विचार होने के बावजूद देखा-देखी मेें लगी हैैै।
यही सबसे बड़़ी़ समस्या है। हम तुलनात्मक अध्ययन में ज्यादा लगे हैं और इस कारण भीड़ में कही खो गए हैं। और अब तो हम अपने लापता होने की कहींं शिकायत भी नहींं कर सकते।
करियर की आग दिल को जलाती रहती है। पैसे की चिंता में जीवन चिता हुआ जा रहा है। विस्थापन, दूरियां और सहज आपसी संबंधों की गर्माहट के बीच ऐसी बर्फ जमी है की पिघलने के लिए जानें कौन सी उष्मा काम करेगी।
हो सके तो मेघों को दूत मत बनाएं। हमको किसी कुबेरजी ने देश निकाला तो नहींं दिया है। संग-संग रहे कम ज्यादा तो चलता ही है।
रिमझिम जब बरसोगे मेघ,
सुमन-सुमन चारों ओर चहकेंगे
पखों की मधुर फड़़फड़़ा़हट से
नव प्रणय गीत सजेंगे
मैं थोड़ा या ज्यादा कहे भावप्रद हूं। मैं तो ईश्वर से यह कामना करुंगा- सभी का जीवन स्नेह और प्यार भरा रहे। संसार में शांति रहे। बंधन में बंधना अच्छी बात है या नहींं आधुनिक समाज में आप देख ही रहे हैं और मेरी कामना यही है सबका बंधन बना रहे अटूट रहे।
प्यार को प्यार
और यार को यार मिले..!
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