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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: 100 साल का संघ और इतिहास की साक्षी अयोध्या

सार

  • विजयदशमी 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संगठन अब एक लाख शाखाओं का लक्ष्य रख रहा है।
  • इस ऐतिहासिक अवसर पर अयोध्या में पहली बार पथ संचलन होगा और सरसंघचालक का उद्बोधन भविष्य की दिशा तय करेगा।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : ANI
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विस्तार
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RSS 100 Years Celebration: 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।  यह संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। स्थापना के दिन के रूप में दशहरा का दिन चुना गया। विजयदशमी का पर्व सदैव अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक रहा है। यह वह दिन था जो भारत की सांस्कृतिक चेतना में समाहित है। 

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एक साधारण शाखा से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। हम उस शताब्दी वर्ष के द्वार पर खड़े हैं, जब विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक क्षण होगा। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक परिपक्व संगठन की यात्रा का प्रमाण है, जहां एक व्यक्ति के सौ वर्ष बुढ़ापे का संकेत देते हैं, वहीं एक संगठन के सौ वर्ष परिपक्वता और दृढ़ता का प्रतीक होते हैं।
 
संघ की स्थापना के समय डॉ.  हेडगेवार  का उद्देश्य स्पष्ट था कि हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र को मजबूत बनाना। उन्होंने कहा था- हिंदू राष्ट्र की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों का निर्माण आवश्यक है। यह दृष्टि आज भी प्रासंगिक है। विजयदशमी का उद्बोधन सरसंघचालक का वार्षिक संदेश स्वयंसेवकों के लिए दिशानिर्देशिका का कार्य करता है। पूरे वर्ष यह वक्तव्य संघ के कार्यों को दिशा प्रदान करता है, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर प्रकाश डालता है। स्वयंसेवक इसे अत्यंत ध्यान से ग्रहण करते हैं, क्योंकि यह केवल भाषण नहीं, बल्कि संघ की वैचारिक यात्रा का सार है।
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विज्ञान भवन में हाल ही में हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधनों ने इस परंपरा को मजबूत किया है। अगस्त 2025 में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला शताब्दी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक बनी। डॉ. भागवत ने विभिन्न क्षेत्रों के हजारों प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया, जहां उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन अभियान पर जोर दिया। व्यक्तिगत परिवर्तन, पारिवारिक परिवर्तन, सामाजिक परिवर्तन, पर्यावरणीय परिवर्तन और राष्ट्रीय परिवर्तन। उन्होंने कहा- संघ का लक्ष्य केवल शाखाओं का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ना है।

यह श्रृंखला इंटरएक्टिव थी, जहां राजनीति, शिक्षा, विज्ञान और समाज के प्रतिनिधियों ने प्रश्न रखे। डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ की शताब्दी केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का माध्यम है। पिछली विज्ञान भवन श्रृंखला (2018 में भारत का भविष्य: संघ की दृष्टि') ने भी इसी प्रकार स्वयंसेवकों को दिशा दी, जहां उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर बल दिया। ये उद्बोधन स्वयंसेवकों के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ सिद्ध हुए, जो संघ की वैचारिक गहराई को प्रतिबिंबित करते हैं।

शताब्दी वर्ष का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह संघ की यात्रा का आकलन करने का अवसर प्रदान करता है। 1925 से 2025 तक, संघ ने असंख्य चुनौतियों का सामना किया-विभाजन की विभीषिका, आपातकाल का अंधेरा, प्राकृतिक आपदाओं का संकट। फिर भी, यह संगठन बढ़ता गया।

आज संघ की शाखाएं 68,000 से अधिक हैं, और शताब्दी वर्ष में लक्ष्य है एक लाख शाखाओं तक पहुंचना। देश भर में पथ संचलन की तैयारियां जोरों पर हैं। नागपुर में पारंपरिक पथ संचलन 27 सितंबर को होगा, जिसमें 10,000 स्वयंसेवक भाग लेंगे—जो शताब्दी की भव्यता दर्शाएगी।

 


राम की नगरी बनेगी साक्षी और इतिहास में दर्ज होेगा क्षण 

अयोध्या में पहली बार विजयदशमी का कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां राम पथ पर हजारों स्वयंसेवक मार्च करेंगे। संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले मुख्य उद्बोधन देंगे। यह स्थानांतरण प्रतीकात्मक है। अयोध्या, राम जन्मभूमि का प्रतीक, संघ की हिंदू एकता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद नागपुर के मुख्य अतिथि होंगे, जो राष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन को गरिमा प्रदान करेगा।


देशभर में यह विशेष अवसर ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां चल रही हैं। संघ ने 1,500 से 1,600 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया है, जो हर क्षेत्र में सांस्कृतिक केंद्र बनेंगे। इनमें संत, विद्वान, युवा, महिलाएं और कारीगर शामिल होंगे। 'सामाजिक समरसता' अभियान के तहत एक लाख हिंदू सम्मेलन और घर-घर संपर्क अभियान चलेगा, जो विभिन्न हिंदू समुदायों को जोड़ेगा। बेंगलुरु, कोलकाता और मुंबई में डॉ. भागवत के व्याख्यान होंगे, जो शताब्दी की वैचारिक यात्रा को मजबूत करेंगे। ये कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि संघ के मूल्यों-अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति-को पुनः प्रतिपादित करने का माध्यम हैं।


पिछले सरसंघचालकों के विजयदशमी उद्बोधनों ने संघ की वैचारिक नींव रखी। द्वितीय सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर (गुरुजी) ने 1956 के उद्बोधन में हिंदू समाज की एकता पर जोर दिया। वे कहते हैं- हिंदू राष्ट्र की अवधारणा जाति-भेद से ऊपर उठकर समग्र समाज को मजबूत बनाती है। उनके समय में संघ ने विभाजन के घावों को भरने का कार्य किया। तृतीय सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने 1973 के बाद के उद्बोधनों में सामाजिक समानता को संघ का मुख्य लक्ष्य बताया। वे आरक्षण और दलित उत्थान पर कहते हैं- "संघ जातिवाद का विरोधी है, लेकिन सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध।
 

शताब्दी वर्ष में पथ संचलन का विशेष महत्व है। यह संघ की शारीरिक और वैचारिक शक्ति का प्रदर्शन है। नागपुर का पथ संचलन 5,000 से बढ़कर 10,000 स्वयंसेवकों का होगा, जो अनुशासन और एकता का संदेश देगा। अयोध्या में राम पथ पर मार्च राम जन्मभूमि के प्रति संघ की निष्ठा को साकार करेगा। ये संचलन केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को प्रेरित करने वाले आयोजन हैं। पूर्व सरसंघचालकों के समय से पथ संचलन संघ की पहचान बने, जो आज शताब्दी में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।


संघ की शताब्दी यात्रा भारत के उत्थान की कहानी है। डॉ. हेडगेवार की दृष्टि से प्रारंभ होकर गुरुजी की वैचारिक मजबूती, बालासाहेब की सामाजिक समरसता और वर्तमान नेतृत्व की समावेशी पहुंच तक, संघ ने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। आपातकाल में जेल यात्राएं, आपदा राहत में सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य में योगदान ये सब संघ की परिपक्वता दर्शाते हैं। शताब्दी वर्ष में सामाजिक सद्भाव पर फोकस होगा, जहां गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में स्थायी परियोजनाएं शुरू होंगी।

विजयदशमी 2025 संघ के लिए नया अध्याय खोलेगा। सरसंघचालक का उद्बोधन स्वयंसेवकों को नई दिशा देगा, जो राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प लेगा। जैसा कि डॉ. भागवत कहते हैं- संघ की शाखा अपरिहार्य है।" यह शताब्दी न केवल संघ की, बल्कि पूरे भारत की परिपक्वता का उत्सव होगी। स्वयंसेवक, समाज और राष्ट्र सब मिलकर अधर्म पर विजय प्राप्त करेंगे।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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