रूस व युद्धों का सदियों से चोली-दामन का साथ रहा है। मार्क गेलोटी की यह किताब, जिसे फोर्ब्स ने रूस के युद्धों को लेकर लिखीं आज तक की सर्वश्रेष्ठ किताबों में शामिल किया है, इस बारे में है कि कुछ वास्तविक व कुछ काल्पनिक असुरक्षा ने किस तरह शताब्दियों से रूस की किस्मत को प्रभावित किया है और उसे युद्धों की तरफ धकेला भी है।
फोर्ज्ड इन वार: सैन्य इतिहास में कैसे और क्यों की पड़ताल
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी तरह इस्राइल भी हमास को उसकी जुबान में ही जवाब दे रहा है। इन दोनों युद्धों में गौर करने वाली बात यह है कि इस्राइल के भीतर नेतन्याहू की नीतियों के खिलाफ आवाजें तो यदा-कदा सुनने में आती हैं, लेकिन व्लादिमीर पुतिन रूस में अपनी पूरी पकड़ बनाए हुए हैं। आखिर ऐसा कैसे और क्यों है? फोर्ज्ड इन वार इस कैसे और क्यों की पड़ताल रूस के सैन्य इतिहास में करती है।
रूस के सामने समकालीन चुनौतियां
दरअसल, प्राकृतिक रूप से सुरक्षित सीमाओं के अभाव और अपनी अर्थव्यवस्था को बाधित करने वाले पर्यावरणीय कारकों के चलते रूस सदियों से युगों की प्रमुख सैन्य शक्तियों के खिलाफ खड़ा रहा है। यह किताब बताती है कि पुतिन के चेहरे पर हरदम दिखने वाला तनाव बेवजह नहीं है। जार से लेकर राष्ट्रपति तक की अपनी यात्रा में रूस को समकालीन चुनौतियों का जवाब देने के लिए युद्धों के लिए हरदम तैयार रहना पड़ा है।
रूस ने जार साम्राज्य से लेकर कम्युनिस्ट राज्य और नाजीवाद के खिलाफ रक्षक की भूमिका निभाई
स्कैंडिनेवियाई राजकुमारों से लेकर मंगोल सम्राटों के खिलाफ संघर्षरत रहे रूस के, मध्ययुगीन साम्राज्य से लेकर 19वीं सदी के एशिया में अपने साम्राज्य-निर्माण संघर्षों और 20वीं सदी के शुरुआती युद्धों तक, जिसमें रूस ने जार साम्राज्य से लेकर कम्युनिस्ट राज्य और नाजीवाद के खिलाफ रक्षक की भूमिका निभाई है, इन्हीं संघर्षों ने उसकी सरजमीं को खून से लाल कर दिया। लेकिन, सदियों के इस संघर्ष ने रूस को थकाया भी खूब। इसलिए ही, शीतयुद्ध के बाद कमजोर पड़ चुके रूस ने फिर पुतिन की ओर रुख किया और पुतिन ने भी रूस को निराश नहीं किया।
रूस आज अमेरिका और चीन से पिछड़ा क्यों दिखता है?
मार्क गेलोटी अपनी किताब में समझाते हैं कि युद्ध ने रूसी समाज और इसकी सरकारी व्यवस्था को किसी भी अन्य मुद्दे से ज्यादा प्रभावित किया है और यह प्रभाव यूरोपीय राष्ट्रों की तुलना में कहीं अधिक है। हालांकि रूस को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है। किताब इस सवाल का जवाब देती है कि प्राकृतिक संसाधनों के मामले में विश्व के सर्वाधिक समृद्ध देशों में शुमार होने वाला रूस आज अमेरिका और चीन से पिछड़ा क्यों दिखता है।
किताब से जुड़ी प्रमुख बातें:
- फोर्ज्ड इन वार: ए मिलिट्री हिस्ट्री ऑफ रशिया फ्रॉम इट्स बिगिनिंग्स टू टुडे
- लेखक : मार्क गेलोटी; प्रकाशक : ब्लूम्सबरी पब्लिशिंग
- मूल्य : 1,464 रुपये (हार्डकवर)
उच्च सैन्य बोझ अर्थव्यवस्था को पीछे धकेलता है
आज रूस का प्रति व्यक्ति जीडीपी तकरीबन दक्षिण अमेरिकी देशों के बराबर है। किताब बताती है कि रूस एक दुष्चक्र में फंसा हुआ है। उच्च सैन्य बोझ अर्थव्यवस्था को पीछे धकेलता है और रूस फिर से वहीं पहुंचने लगता है, जहां से उसने शुरुआत की थी। समकालीन विवरणों से भरपूर फोर्ज्ड इन वार इसलिए पढ़नी चाहिए, क्योंकि यह रूस के अतीत और वर्तमान पर अंदरूनी दृष्टि देती है।