रूस वर्तमान में स्वयं को वैश्विक शक्ति के तौर पर स्थापित कर रहा है।
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आखिर क्रीमियाई प्रायद्वीप में रूसी आक्रमकता का कारण क्या है?
रूस वर्तमान में स्वयं को वैश्विक शक्ति के तौर पर स्थापित कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन का कहना है कि वे रूस को पुनः सोवियत संघ की तरह शक्तिशाली भूमिका में देखना चाहते हैं। रूस ने क्रीमिया के बाद सीरिया संकट में अपना वैश्विक शक्ति प्रदर्शन किया। अमेरिका और तमाम पश्चिमी देशों के एकजुट होने के बावजूद सीरिया में रूसी विजय अभियान जारी है। इससे रूसी मनोबल में वृद्धि हुई है। यही कारण है कि वैश्विक तमाम चेतावनियों के बावजूद क्रीमियाई क्षेत्र में रूसी आक्रमकता में लगातार वृद्धि जारी है।
क्रीमिया का रणनीतिक महत्व
रूस,क्रीमिया से पहले केवल जलमार्ग द्वारा ही संबद्ध था। ऐसे में क्रीमिया में रूस ने अपने पहुंच में वृद्धि के लिए कर्च स्ट्रेट पर एक पुल का निर्माण किया है। अजोव सागर जमीन से घिरा हुआ है और काला सागर से तंग कर्च स्ट्रेट(जलसंधि) के रास्ते से होकर ही इसमें प्रवेश किया जा सकता है। रूस अब इस पुल के माध्यम से ही कर्च स्ट्रेट पर यूक्रेन के बंदरगाहों से आ रहे जहाजों की निगरानी कर रहा है,जिसका यूक्रेन विरोध कर रहा है। रूस,यूक्रेनी जहाजों की जांच को सुरक्षा कारणों से आवश्यक मानता है, क्योंकि यूक्रेन के कट्टर पंथियों से पुल को खतरा हो सकता है। अजोव सागर क्रीमिया के पूर्व में और यूक्रेन के दक्षिण में है।
इसके उत्तरी किनारों पर यूक्रेन के दो बंदरगाह हैं- बर्डयांस्क और मेरीपॉल। ये बंदरगाह यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, कर्च स्ट्रेट के पुल के नीचे समुद्री परिवहन को नियंत्रित कर रूस यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। इस माह की शुरुआत में यूरोपीय यूनियन भी रूस को यूक्रेन जहाजों की निगरानी के खिलाफ कदम उठाने की चेतावनी दी थी। यूरोपीय यूनियन का कहना है कि रूसी व्यवहार स्वतंत्र नौपरिवहन का उल्लंघन है। इन्हीं विवादों के बाद रूस और यूक्रेन के बीच नया विवाद उभरा है।
क्रीमियाई क्षेत्र में रूसी आक्रामकता ने विश्व पटल पर यूएसए के मिलिट्री पावर के अवधारणा को मनोवैज्ञानिक तौर पर तोड़ा है।
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यूक्रेन विवाद का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव और न्यू कोल्ड वॉर की आगाज
क्रीमियाई क्षेत्र में रूस ने यूक्रेन से पुनः टकराकर पूर्वी यूरोप में न केवल अपना शक्ति प्रदर्शन किया है, अपितु नाटो सेनाओं को सीमा से दूर किया है।इसके अतिरिक्त ब्लैक सी और अजोव सागर में रूसी शक्ति में वृद्धि हुई है। क्रीमियाई क्षेत्र में रूसी आक्रामकता ने विश्व पटल पर यूएसए के मिलिट्री पावर के अवधारणा को मनोवैज्ञानिक तौर पर तोड़ा है।
यहां ध्यान देना चाहिए कि इस क्षेत्र में अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने रूस को नियंत्रित करने के लिए न्यूक्लियर मिसाइलों तक की तैनाती की है, उसके बाद रूस द्वारा यूक्रेन के तीन नौसैनिक जहाजों तथा 24 नौसेनिकों के गिरफ्तारी से नव शीत युद्ध की आहट स्पष्ट है, जहां चीन का भी घोषित समर्थन रूस को प्राप्त है। इस संपूर्ण प्रकरण में चीन के भी मनोबल में वृद्धि की है तथा रूस-चीन गठबंधन का और भी मजबूत होना स्वाभाविक है।
वर्तमान में अमेरिका और चीन का ट्रेड व्यापार काफी खतरनाक स्तर पर जारी है। अभी इस ट्रेड वार में चीन को नुकसान ज्यादा हो रहा है, साथ ही वह अमेरिका से वार्ता के लिए भी तैयार है,लेकिन अमेरिका सख्त मुद्रा में है। लेकिन यूक्रेन विवाद के बाद यूएसए वार्ता के लिए झुक सकता है। अगर ऐसा होता है,तो यह भारत सहित संपूर्ण विश्व के अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होगा। लेकिन अगर यूएसए काफी कठोर रूख कायम कर नाटो देशों को पुनः एकजुट कर रूस पर दबाव बनाने का प्रयास करता है,तो दुनिया को ट्रेड वॉर के बाद अब न्यू कोल्ड वार का भी सामना करना पड़ सकता है।
राहुल वर्मा वर्ष 2002 से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर सतत लेखन कर रहे हैं। वर्तमान में वे भारत- यूरोपीय यूनियन सांस्कृतिक परिषद तथा भारत-अफ्रीकी यूनियन सांस्कृतिक परिषद का सदस्य हैं।
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