देश की आबादी के एक बड़े वर्ग बच्चों को उनके अधिकारों से लैस किया जाना चाहिए।
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2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी का 40 प्रतिशत बच्चों की आबादी थी, जिसमें आधिकारिक रूप से 1 करोड़ बाल श्रमिक थे, जबकि गैर सरकारी संगठनों ने 5 करोड़ बाल श्रमिक होने का आकलन किया था। कोरोनाकाल में बाल दुर्व्याकपार (ट्रैफिकिंग), बाल श्रम और चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है।
कोरोना काल और गणतंत्र दिवस
आज देश जब कोरोना काल में गणतंत्र दिवस की 72वीं वर्षगांठ मना रहा है, तो यह प्रश्न खड़ा होता है कि इतने सारे क़ानूनों के बावजूद भी हमारे बच्चे सुरक्षित क्यों नहीं हैं? ऐसे में उनको और अधिकार देने के लिए एक सशक्त कानून अहम भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से कॉम्प्रीहेंसिव ट्रैफिकिंग कानून,जो अभी संसद में लंबित है उसे पारित कराना समय की मांग है। यह कानून ट्रैफिकिंग को खत्मब करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
गौरतलब, है कि इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु नोबेल शांति पुरस्कार से सम्माबनित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने पिछले संसद सत्र के दौरान कई सांसदों और नीति निर्माताओं से अपील की थी कि ट्रैफिकिंग के कानून को अविलंब बिना किसी गतिरोध के संसद से पारित किया जाना चाहिए। कई सांसदों ने सत्यार्थी की इस मुहिम का समर्थन भी किया था।
सत्यार्थी का संगठन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रे न्सत फाउंडेशन (केएससीएफ) नेदेशभर के 20 राज्योंस के 410 से अधिक जिलों में सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर बच्चों के साथ हाल में (26 नवंबर 2021 को) संविधान दिवस मनाया था। इसमें बड़े पैमाने पर दूर-दराज के अति पिछड़े इलाके में रहने वाले बच्चों से लेकर आदिवासी, वंचित और हाशिए के बच्चे भी शामिल हुए थे। इस मौके पर 5 करोड़ से जायदा बच्चों ने संविधान का पाठ किया था।
हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि देश की आबादी के एक बड़े वर्ग बच्चों को उनके अधिकारों से लैस करें,जिससे कि वे राष्ट्र के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाएं और एक सशक्त और सम्पन्न राष्ट्र का निर्माण करें।
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