उर्जित पटेल अवगत थे कि कल से शीतकालीन सत्र प्रारंभ हो रहा है और उनका त्यागपत्र हर हाल में सदन में भूचाल लाएगा।
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आखिर क्या कारण रहे इस्तीफे के
ज़ाहिर है कि उर्जित पटेल अवगत थे कि कल से शीतकालीन सत्र प्रारंभ हो रहा है और उनका त्यागपत्र हर हाल में सदन में भूचाल लाएगा। तो अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि उर्जित ने इस्तीफ़े के लिए जान बूझकर आज का दिन तय किया था। इससे राष्ट्रीय महत्त्व के इस विषय पर देश की सर्वोच्च पंचायत में बहस हो। अगर बहस होती तो शायद सरकार की किरकिरी अधिक होती।
इस संसदीय समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती तो रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच मतभेदों का दस्तावेज़ीकरण हो जाता। यह स्थिति कठिन होती। कोई भी निर्वाचित सरकार इसे शायद ही पसंद करती। सत्र के बाद वे पद छोड़ने का एलान करते तो एक दो दिन सुर्ख़ियों में रहने के बाद यह इस्तीफ़ा चुनावी शोर में गुम हो जाता। शायद यह ख़ुद पटेल भी नहीं चाहते थे।
एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सरकार कुछ लोक लुभावन फ़ैसले लेना चाहती थी। इसमें वह 1934 के रिजर्व बैंक एक्ट की धारा 7 का इस्तेमाल करना चाहती थी। बैंक इसके लिए संभवतः तैयार नहीं था। उसकी नज़र में यह सीधा-सीधा बैंक का राजनीतिक उपयोग हो सकता था। एक कुशल पेशेवर होने के नाते उर्जित पटेल के लिए इसे स्वीकार करना सही नहीं माना जाता। अपने कामकाज के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान वाले इस भारतीय संस्थान के लिए आने वाले दिन भी अत्यंत चेतावनी भरे हो सकते हैं।
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