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रमजान विशेष: बरकतों और रहमतों का महीना रमजान, आइए हिंदुस्तान के लिए खुदा से दुआएं करें

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रमजान बरकतों और रहमतों का महीना है। रमजान इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है। - फोटो : सोशल मीडिया
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रमजान बरकतों और रहमतों का महीना है। रमजान इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है। इस्लामी कैलेंडर का यह नौवां माह है। कहते है, इस माह की बरकत से खुदा अपने बंदों की दुआऐं सुनता है। पिछले रमजान देश ने कोरोना के दौर में घरों में रहकर गुजारे और इस बार तो कोरोना का कहर इस कदर बरपा है की हमारे अपने- अपनों से बिछुड़ते जा रहे हैं। ना जाने इस डर और खौफ़ से कब हम और हमारा प्यारा भारत बाहर आएगा। कहते हैं की रमजान में मांगी गई दुआ जरूर पूरी होती है इसलिए अपने मुल्क की सेहत और सलामती के लिए हर दिन लाखों हाथ दुआ कर रहे हैं। 

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इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है। आज हम सब डरे हुए हैं मौत का पर्याय बन चुके कोविड-19 की महामारी ने जहां खौफ़ की हदें पार की हैं, तो इंसानियत की कई मिशाल बने कई फरिश्ते घरों से निकलकर कोरोना को मुहतोड़ जवाब दे रहे हैं और मानवता की नई इबारत लिख रहे हैं। कोई रोजा तोड़कर प्लाज्मा दे रहा है, तो कोई ऑक्सीजन के इंतेजामों में लगा है। गुजरात में अल्लाह का घर मस्जिद बीमारों के लिए खोली गई तो कहीं गुरुद्वारा। कोई हिंदू भाई किसी मुसलमान का सहारा बन रहा, तो कोई मुसलमान भाई अपने हिंदू भाई की अर्थी को पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार कर रहा है। यकीन यह मानवता के इतिहास को रचता भारत है।

रमजान मन का बैर, गिले-शिकवे, लडाई-झगडे़ से दूर रहकर समाज में एकता और भाईचारा कायम करने का संदेश देता है। - फोटो : Pexels
खुदा की इबादत का महीना
कहते हैं रमजान का महीना खुदा को राजी करने का विशेष मौका देता है। इस्लाम धर्म के अनुसार रमजान आत्मनियंत्रण और खुद पर संयम रखने का महीना है। रोजे के दौरान भूख-प्यास दुनिया के गरीब लोगों की भूख और दर्द को समझ पाने का बेहतरीन तरीका है। भारतीय संस्कृति अनेकता में एकता का संदेश देने वाली रही है। हमारी परम्पराएं दुआओं और प्रार्थनाओं का संगम है। सदियों से भारत एक ऐसा फूलों का गुलदस्ता रहा है, जिसमें भिन्न-भिन्न रंग के फूल इसकी खूबसूरती को चार चांद लगाते आए हैं। इस गुलदस्ते के फूल हर तीज-त्योहारों में बराबर खुश्बू बिखेरते हैं, यही विरासत हमारे पूर्वजों ने हममें हस्तांतरित की अब हमारी बारी है। सभ्यता और संस्कृति की अपनी प्राचीन विरासत को सहेजने की।

रमजान मन का बैर, गिले-शिकवे, लडाई-झगडे़ से दूर रहकर समाज में एकता और भाईचारा कायम करने का संदेश देता है। रमजान का महीना गरीबों की मदद करने, उनके खाने-कपडे़ के इंतेजाम की हिदायत देता है। ताकि कोई भूखा न सोए। आज जब भारत पर इतना बड़ा संकट आ खड़ा हुआ है लोग ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं। लोगों के पास खाने को अनाज नहीं हैं, दवाईयों के लिए पैसे नहीं हैं, अखबार देश की खस्ता हाल से पटे पड़े हैं, हमारे आस पास ऐसी तस्वीरें हैं तो दिल दर्द से भर देती हैं।

ऐसे में बढ़-चढ़कर लोगों की जरूरतों का सामान मुहैया कराने में मदद करना सबसे ज्यादा पुण्य का काम होगा। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि अल्लाह अपने बंदों को इस महीने की बरकत से एक नेकी के बदले सत्तर नेकी के बराबर पुण्य देता है। रमजान बरकत का महीना है। हर भारतीय की प्राथमिकता अपने देश के प्रति इस महामारी से निकलने में अपने दायित्वों का निर्वाहन करने की है, जब देश खुशहाल होगा तभी रब राजी होगा और जब रब राजी होगा तभी मगफिरत का रास्ता साफ होगा। रमजान दोस्ती का महीना है, यह सबके लिए दुआ और हिफाजत का पैगाम है।

रमजान में रोजा अल्लाह की राह पर बंदों का समर्पण है, जिसमें सारा दिन भूख-प्यास के साथ शारीरिक एवं मानसिक इच्छाओं पर नियंत्रण है, ताकि बुरा बोलने, सुनने और देखने से बचा जा सके। यह विचारो पर संयम रखने की ताकीद देता है। रमजान आत्मा की पवित्रता पर जोर देता है। रमजान के 30 रोजो को तीन भागो में बांटा जाता है। पहला अशरा 10 दिन 'रहमत' का, दूसरा अशरा 10 दिन 'बरकत' का, तीसरा अशरा 10 दिन 'मगफिरत' का, जिसमें खुदा अपने बंदों के गुनाह माफ करता है।

कोरोना महामारी के चलते दुनिया के प्रार्थना स्थल बन्द हैं, लोग घरों से प्रार्थनाऐं, दुआऐं कर रहे हैं। इस सदी के समाज ने पहले कभी ऐसी मुश्किल का सामना नहीं किया, इसलिए परेशान होना स्वभाविक है। इतिहास गवाह है, हर सदी में कोई न कोई कोरोना जैसी ला-इलाज महामारी आती है, जब दुनिया के अविष्कार ठप्प हो जाते हैं, साइंस की दुनिया दैवीय चमत्कार का इंतेजार करती नजर आती है। दुनिया भर के लोग इस महामारी से मानव जीवन की सुरक्षा के लिए दुआ और प्रार्थना कर रहे हैं। भारत ने इस बीमारी का तोड़ सामाजिक दूरी, स्वच्छता, करूणा और सेवाभाव से निकालने का प्रयास किया है, जो काफी हद तक सफलता की दिशा में अग्रसर है।
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भूखे, जरूरत मंदों की मदद, सामाजिक दूरी का ध्यान रखने का प्रयास, हर भारतीय को करना चाहिए। - फोटो : istock
संक्रामक रोग और इस्लाम
कोरोना वायरस का इलाज अब तक दुनिया के वैज्ञानिक खोज नहीं पाए हैं, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग ही इसका कारगर इलाज है। हजरत मोहम्मद साहब ने कहा है, कि 'जिस किसी को भी संक्रामक रोग है, उसे सेहदमंद लोगों से दूर रहने की हिदायत है।' (शाही, अलबुखारी, 6771 एवं अल मुस्लिम 2221), भारत जैसे विस्तृत देश में सामाजिक दूरी एक बेहतर उपचार है, जिसका फायदा हमारी मेडिकल टीम समय-समय में अपडेट देकर कर रही है।  ऐसे में हर भारतीय की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र हित के लिए सामाजिक दूरी बनाये रखने का दायित्व पूरा करे।

रमजान इबादत का महीना है, इसलिए हजरत मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि महामारी के वक्त आपका घर ही मस्जिद है। जो सवाब मस्जिद में नमाज पढने का है, ऐसे समय में वही सवाब घर में पढ़ी हुई नमाज का है। (अल तिर्मिजी अल-सलाह 291), हजरत मोहम्मद साहब का जीवन बुराई को अच्छाई से जीतने वाला है। उनके जीवन के अनगिनत किस्से दुनिया को शांति और सब्र का संदेश देते हैं। उन्होंने साफ-सफाई और स्वच्छता को आधा ईमान के साथ रहना बतलाया है, वो कहते थे कि लोगों को अपने घर आते ही अपने हाथ धो लेना चाहिए। '(अल मुस्लिम 223)' जब हजरत मोहम्मद साहब को छींक या खांसी आती थी, तब वह खुद कपड़े से अपने मुंह को ढक लिया करते थे।

(अबु दाउद, अल तिर्मिजी, बुक 43, हदीश 2969, शाही) दुनिया के लोग अपने इतिहास से सीख लेते हुए इस महामारी से बाहर निकलने में कामयाब होंगे। विश्व के सभी धर्मो में मत-मतांतर होने पर भी शांति और मानव कल्याण की भावना पर सभी एकमत हैं। मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा बने इस वायरस से जीतने के लिए हर भारतीय को एकजुटता दिखानी होगी। तभी मानवता की जीत होगी। मानव जाति पर डर और खौफ का कहर बरपा रहे, कोविड-19 महामारी से मिलकर लडने के प्रयासों को रमजान के महीने में खुदा को राजी करने के प्रयासों में ही देखा जाना चाहिए।

भूखे, जरूरत मंदों की मदद, सामाजिक दूरी का ध्यान रखने का प्रयास, हर भारतीय को करना चाहिए, ताकि इस महामारी से निजात हासिल हो सके, क्योंकि रमजान सबके लिए दुआ और हिफाजत का पैग़ाम है। लोगों की यूं रोते-बिलखते हुए तस्वीर नहीं देखी जाती। वायरस का इस बार खतरा पहले से ज्यादा बड़ा है, मौत की आहट हर तरफ खौफ का माहौल बनाए हुए है, खुदा रमजान के वसीले से हम भारतीयों को और पूरी कायनात को इस बीमारी से निकलने में मदद करे।
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