जहां तक भारतीय जनता पार्टी की बात है तो यहां भी नेतृत्व को लेकर एक अंतरद्वंद्व चला आ रहा है।
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कांग्रेस पार्टी ने मतदान से 4 दिन पहले अपना जो घोषणा पत्र जारी किया, उसमें जातीय जनगणना से लेकर फसलों पर एमएसपी कानून, लाखों नौकरियां, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा 50 लाख, ब्याज मुक्त कर्ज समेत ढेरों वादे किए गए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर सभा और मंच पर यही बात दोहरा रहे हैं कि यह उनकी गारंटी है...। आश्चर्यजनक बात है कि अशोक गहलोत तो अपने नाम की गारंटी दे रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद वही मुख्यमंत्री बनेंगे, इस बात की गारंटी कांग्रेस नहीं दे रही है।
जहां तक भारतीय जनता पार्टी की बात है तो यहां भी नेतृत्व को लेकर एक अंतरद्वंद्व चला आ रहा है। पार्टी ने किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बदल दिया था। यही कारण है कि राजस्थान में इस समय भाजपा में चेहरों की भरमार है।
मुख्यमंत्री की रेस में कई नेता लगे हुए हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, राजेंद्र राठौड़, सतीश पूनियां, दीया कुमारी, बाबा बालकनाथ, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा जैसे नाम लिए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नाम की चर्चा भी होती रहती है। इन सब के बावजूद चुनाव के अंत में बात मोदी की गारंटी पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के मतदाताओं को स्वयं की गारंटी दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि उनकी गारंटी है कि पेट्रोल-डीजल सस्ता करेंगे, गरीब महिलाओं को 450 रुपए में गैस सिलेंडर देंगे, मेधावी छात्राओं को स्कूटी और छात्रों को लैपटॉप दिया जाएगा, बेघरों आवास देंगे, 2025 तक हर घर तक पानी पहुंचाएंगे समेत कई और गारंटी हैं। भाजपा ने संकल्प पत्र भी जारी किया है, जिसमें कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार की जांच, पेपरलीक की जांच, महिला सुरक्षा, रोमियो स्क्वाड समेत ढेरों वादे किए गए हैं।
सभी नेताओं को रैलियों में भीड़ भी जुट रही है। मतदाता स्पष्ट कुछ नहीं बता रहा। मतलब, किसकी गारंटी पर अब मतदाता ज्यादा भरोसा करेगा, इसका खुलासा 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम के दिन ही होगा।
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