अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ से बाहर
- फोटो : Twitter
बिना नेहरू- गांधी परिवार वाली कांग्रेस
1947 से अब तक के 75 साल के सफर में कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी 41 साल तक नेहरू-गांधी परिवार के पास रही। इस परिवार से जुड़े महज 5 चेहरे पं. नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया और राहुल के पास अध्यक्ष की कुर्सी रही, जबकि बाकी के 34 साल में नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के 13 चेहरे रहे। जेबी कृपलानी, सीतारमैय्या, पुरुषोत्तम दास टंडन, नीलम संजीव रेड्डी, के कामराज,निजलिंगप्पा, जगजीवन राम, शंकर दयाल शर्मा, डीके बरुआ, के रेड्डी, पीवी नरसिम्हा राव,सीताराम केसरी।
गांधी-नेहरू परिवार से बाहर के इतने चेहरे का कार्यकाल संगठन, विस्तार और कार्यकाल के लिहाज से गांधी-नेहरू परिवार के चेहरे की तुलना में कमतर ही रहा। अब ताजा संकट ने भी साबित कर दिया है कि गांधी परिवार की परछाई से उबर पाना इतना आसान नहीं है। कांग्रेस को खेवनहार की जरूरत है और वह गांधी परिवार ही है।
चुनावी बिसात-कांटे का ताज
आजादी के 75 साल में महज चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की बिसात बिछी है। नामांकन का आखिरी समय सामने है। इस बार शशि थरूर ने पहले ही अपनी उम्मीदवारी का एलान कर रखा है। अब दिग्विजय सिंह ने नामांकन फॉर्म खरीदा है। मतदान के आखिरी तिथि से एक दिन पहले तक एक भी नामांकन नहीं हो पाया है। पवन बंसल ने चार फॉर्म खरीदे हैं। सो इस चुनाव में कई चेहरे आमने-सामने होंगे।
सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पर विरोधी सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुटकी ली है कि कांग्रेस अब केवल भाई-बहन की पार्टी रह गई है और यह क्षेत्रीय पार्टी बन कर रह गई है। चुनावी रैलियों में तो नरेंद्र मोदी बकायदा कांग्रेस को परिवारवादी पार्टी करारते रहे हैं।
विरोधी भले जो कहें लेकिन ताजा घटनाक्रम और पार्टी के अंदरूनी संकट ने फिर से यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस की असली खेवनहार गांधी परिवार ही है। गांधी परिवार को कांग्रेस को 2024 के चुनावी रेस में लाने के लिए उन विपक्षी गठबंधनों में भी अपनी मजबूत बढ़त बनानी होगी, पार्टी को आंतरिक संकट से उबारना होगा और जनता-जनार्दन से जुड़ना होगा। गांधी परिवार कैसे इन चुनौतियों से उबरती है, यह दिलचस्प तो होगा ही, साथ ही नए अध्यक्ष के लिए कांटे का ताज भी तय हो गया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।