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राजस्थान बजट 2023-24: पुराने पन्नों से राजस्थान की राजनीति में उठे भंवर में फंसे जादूगर गहलोत

सार

इन पुराने बजट पन्नों को जितनी हवा मिलेगी, उतना ही गहलोत की कुर्सी पर संकट गहराता दिखेगा। इस बार वह जादू की कौन सी छड़ी चलाते हैं? यह देखना होगा, क्योंकि गहलोत बजट को इस चुनाव नहीं, बल्कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव का बजट बता रहे हैं।
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सीएम अशोक गहलोत से बजट पढ़ते समय हुई बड़ी चूक - फोटो : Twitter
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विस्तार
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राजस्थान में दोहरे फ्रंट पर जूझ रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से राज्य का बजट पेश करते हुए वो चूक हो गई, जिसकी कल्पना शायद उनके विरोधियों ने भी नहीं की थी। मुख्यमंत्री कुछ मिनटों तक पुराने बजट के पन्ने पढ़ते चले गए। जिस लोक-लुभावन बजट की भूमिका उनकी सरकार की ओर से पिछले लंबे अर्से से बांधी जा रही थी, वो चंद मिनटों में धूमिल हो गई। देखते ही देखते पुराना बजट पढ़ने का मुख्यमंत्री गहलोत का वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया।

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खुद को राजनीति का जादूगर कहने वाले अशोक गहलोत की छवि पर इस घटना का प्रतिकूल असर पड़ना निश्चित है। इस घटना को वह कैसे काउंटर करेंगे? यह आगे आने वाले दिनों में देखना होगा, क्योंकि न केवल विपक्षी भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है, बल्कि सचिन पायलट गुट और कांग्रेस में उनके विरोधी भी इस मुद्दे पर आक्रमक होंगे।


महज संयोग या लापरवाही?

इसे महज संयोग कहा जाए या लापरवाही, आखिर मुख्यमंत्री की बजट कॉपी में पिछले साल के बजट के पन्ने आए कैसे? मुख्यमंत्री इसे एक मानवीय भूल कहकर टाल नहीं सकते हैं। उन्होंने बजट की पूर्व संध्या पर वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ ग्रुप फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी और बजट को युवाओं के लिए समर्पित बताया था।

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जैसा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा, जब वह मुख्यमंत्री थीं, तब बजट की कॉपी को चार-चार बार पढ़ने के बाद ही सदन में बजट पेश करती थीं। क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट की कॉपी सूटकेस में रखने से पहले देखी नहीं थी? यदि ऐसा है तो यह घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। 


जब मुख्यमंत्री पुराने बजट के पन्ने पढ़ रहे थे, तब एक आईएएस अधिकारी ने यह बात मुख्य सचेतक व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेश जोशी तक पहुंचाई। जोशी ने कैमरों के सामने ही मुख्यमंत्री के कानों में बजट रोकने के लिए कहा, जो रिकॉर्ड हो गया। इस पर विपक्षी भाजपा का आरोप है कि बजट लीक हुआ, क्योंकि डॉ. महेश जोशी को कैसे पता चला कि मुख्यमंत्री पुराने बजट के पन्ने पढ़ रहे हैं? सरकार को चाहिए कि वो बजट लीक हुआ या नहीं हुआ, इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए, ताकि विपक्ष के आरोप में कितना दम है, इसका दूध का दूध-पानी का पानी हो जाए।


पायलट को मिल गया मौका

मुख्यमंत्री गहलोत को इस प्रकरण के बाद अपने विरोधी सचिन पायलट से भी निपटना होगा। वो पायलट के साथ कुर्सी की लड़ाई में इस सरकार के गठन के समय से उलझे हुए हैं। वर्ष 2020 में सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद उनकी सरकार और संगठन पर पकड़ बेहद मजबूत हो गई थी। हालांकि, पिछले साल सितंबर में जब वो करीब-करीब कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की ओर बढ़ गए थे, तब सरकार में दूसरी बगावत उनके गुट के मंत्रियों और विधायकों की तरफ से हुई।

कांग्रेस पार्टी को आनन-फानन में मलिकार्जुन खड़गे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना पड़ा था। ऐसा माना जा रहा है, तब से मुख्यमंत्री गहलोत की छवि आलाकमान (गांधी परिवार) के आगे कमजोर हुई है। 

सचिन पायलट लगातार सत्ता में परिवर्तन का दबाव बना रहे हैं, लेकिन अशोक गहलोत, पायलट के सभी दावों को पलटते आ रहे हैं। सचिन पायलट को कोई भी मौका नहीं मिल पा रहा था, लेकिन आज के प्रकरण में भाजपा के साथ सचिन को भी एक बड़ा मौका दे दिया है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव से 9 महीने पहले सचिन पायलट 'बजट के पुराने पन्ने' को कितना हवा में उछाल पाते हैं। रायपुर में इसी महीने के अंत में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन होना है। इस अधिवेशन में पुराने बजट के पन्ना प्रकरण को गहलोत विरोधी गुट द्वारा उठाया ही जाएगा। विरोधी कह सकते हैं कि अब युवा नेतृत्व को राजस्थान में आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि जब मुख्यमंत्री इतना नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या पढ़ना और क्या नहीं पढ़ना? तो जनता में कैसे उनके नेतृत्व में सरकार रिपीट का संदेश जाएगा?

50 साल से सक्रिय राजनीति कर रहे अशोक गहलोत के समक्ष पिछले 4 साल का यह सबसे बड़ा संकट नजर आने लगा है। इन पुराने बजट पन्नों को जितनी हवा मिलेगी, उतना ही उनकी कुर्सी पर संकट गहराता दिखेगा। इस बार वह जादू की कौन सी छड़ी चलाते हैं? यह देखना होगा, क्योंकि गहलोत बजट को इस चुनाव नहीं, बल्कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव का बजट बता रहे हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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