फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चर्चा का विषय: सरकार और सपा की सियासत का शिकार हुआ सारस

सार

सवाल यह उठता है कि जब तोता या तीतर पालना भी जुर्म है और वन विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो आरिफ को ही क्यों नोटिस भेजा गया है?
विज्ञापन
आरिफ और सारस की दोस्ती - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यह राजनीति का संक्रमण काल है। यहां इंसानों के मुद्दे हाशिये पर हैं और पशु-पक्षी सिसायत के दायरे में। कभी भैंस पर सिसायत होती है। कभी गाय पर तो अब सारस सियासत की जद में है। अमेठी के आरिफ को भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि वह सारस की मदद करके मुसीबत मोल लेने जा रहे हैं। एक दिन जख्मी हालत में वह सारस को खेत से उठा लाए थे। दवा-पट्टी की और धीरे-धीरे सारस ठीक हो चला। ठीक हो जाने के बाद सारस उन्हें छोड़कर गया ही नहीं और परिवार का एक हिस्सा बन गया। 

विज्ञापन


उन्होंने सारस से अपनी दोस्ती की कुछ रील बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी और इस तरह से सारस वायरल हो गया। यहां तक सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक ही एक दिन सपा मुखिया अखिलेश को जाने क्या सूझी कि वह सारस को देखने आरिफ के गांव जा पहुंचे। बस यहीं से सारस सियासी मुद्दा हो गया।

इस मुलाकात के कुछ दिन बाद ही वन विभाग सारस को लेने आरिफ के गांव जा पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह प्यारा सा परिंदा किसी भी हाल में वन विभाग की टीम के साथ जाने के लिए तैयार नहीं था। नतीजे में वैन में आरिफ को भी बैठाया गया। 

सियासत का शिकार सारस

मामले में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब वन विभाग ने आरिफ को सारस पालने के जुर्म में नोटिस भेज दिया। उधर, गायब हुए सारस को तलाश कर कानपुर के चिड़ियाघर में भेज दिया गया है। वहां वह कोरंटाइन है। ऐसा लगता है कि सरकार और सपा की सियासत का शिकार सारस हो गया है! अब सपा को सारस में जाने क्या फायदा नजर आया कि तब से अखिलेश यादव कई बार इस मुद्दे पर ट्वीट कर चुके हैं और फिर अचानक ही कानपुर चिड़ियाघर में उसे देखने के लिए जा पहुंचे। 

विज्ञापन


इस पूरे मामले में कई अहम पहलू हैं। जन मुद्दों के बीच अचानक ही सपा का सारस प्रेम जाग जाना कई लोगों को आश्चर्य में डाल गया। यूपी में विपक्ष लगातार आलोचना के केंद्र में है कि वह अवाम के मुद्दों से दूरी बनाए हुए है। सपा-बसपा की आलोचना इस बात को लेकर भी की जाती है कि वह विपक्ष धर्म नहीं निभा रहे हैं। ऐसे में सपा के सारस प्रेम पर सवाल उठना लाजमी है। 

पशु-पक्षियों की चिकित्सा व्यवस्था

अब बात आती है वन विभाग की। उत्तर प्रदेश में इंसानों की चिकित्सा व्यवस्था खस्ता हाल है। फिर पशु-पक्षियों के अस्पताल की कल्पना ही बेमानी है। ऐसे में आम लोग ही इन पशु-पक्षियों का अपने सुबीते के हिसाब से इलाज वगैरा कर दिया करते हैं। इलाज करने वाले इन सीधे-सादे लोगों को न तो वन्य जीव (संरक्षण) अधिनयम, 1972 के बारे में पता है और न ही ये जानते हैं कि इस सूची में कौन-कौन से पशु-पक्षी हैं।

यहां तक कि कोई भी व्यक्ति तोते को भी पिंजरे में कैद करके नहीं रख सकता है। यह भी कानूनन जुर्म है। इसी तरह से तीतर, बाज, राष्ट्रीय पक्षी मोर को भी नहीं पाला जा सकता है। इसके बावजूद तमाम घरों में तोता, तीतर और यहां तक कि मोर भी पाला जाता है।इस तरह से आरिफ से अनजाने में जुर्म तो हो गया है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की दफा 39 के तहत नियम यह है कि जब आरिफ को घायल सारस मिला था तो उसे प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद स्थानीय वन विभाग अधिकारी को इस बारे में सूचित करना चाहिए था। अगर किसी वजह से यह संभव नहीं था तो पास की पुलिस चौकी या थाने पर अर्जी देकर बताया जा सकता था। 48 घंटे में कानूनन ऐसा किया जाना चाहिए। किसी भी संरक्षित परिंदे या जानवर को रखना या फिर उसे खिलाना-पिलाना गैरकानूनी है।

सवाल यह उठता है कि जब तोता या तीतर पालना भी जुर्म है और वन विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो आरिफ को ही क्यों नोटिस भेजा गया है? दरअसल यह कानून के पालन का मामला है, लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जानबूझकर आरिफ को निशाना बनाया गया है? इन सबके बीच सारस परेशानी में पड़ गया है। आकाश तले आजाद घूमने वाला पंछी अब चिड़ियाघर के कैदखाने में है। उसे किस बात की सजा मिल रही है, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है?

आरिफ के सारस को अकेले देखकर थोड़ा आश्चर्य होता है, क्योंकि सारस हमेशा जोड़ों में रहता है। इनके दांपत्य प्रेम की मिसालें दी जाती हैं। मुगल बादशाह जहांगीर सारस के नर और मादा के प्रेम को देखकर बहुत प्रभावित हुआ था। उसने इनकी जीवनशैली पर खास तौर से अध्ययन किया था। यह हमेशा जोड़े में ही रहते हैं। जहांगीर को पशु-पक्षियों से बहुत लगाव था। उसने तमाम तरह की चिड़िया और जानवर पाल रखे थे। 

माना जाता है कि अगर इनके जोड़े में से किसी एक की मौत हो जाती है तो दूसरा भी खाना-पानी छोड़ देता है और कुछ दिनों बाद प्राण त्याग देता है। 

आम तौर पर पंछियों में किसी एक की मौत के बाद वह दूसरा साथी तलाश लेते हैं। सारंग बटेर तो इस मामले में उस्ताद हैं। मादा सारंग बटेर जोड़ा बनाने के बाद अंडे देती है और फिर उन अंडों को सेने की जिम्मेदारी नर को देकर किसी नए साथी की तलाश में निकल जाती है। इसी तरह से बया पक्षी सुंदर घोंसले महज इसलिए बनाते हैं ताकि मादा को प्रभावित किया जा सके। घर पसंद आने पर मादा बया उसमें रहना कुबूल कर लेती है। सारस इस मामले में इन सबसे अलग है ।

सारस के दांपत्य प्रेम को देखकर ही गांव-देहातों में इस पंछी को बहुत स्नेह से देखा जाता है। कोई भी इन्हें परेशान नहीं करता है। न ही इनका शिकार किया जाता है। सारस होते भी बहुत शांति प्रिय हैं। यह उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। सारस सफेद-स्लेटी रंग का होता है। इसके सर और पैर लाल रंग के होते हैं। लंबी टांगों वाला यह पक्षी खेतों और तालाब किनारे अपना खाना तलाशता है। इनका मुख्य भोजन अनाज और कीड़े-मकोड़े होते हैं। सारस ऊंचाई में पांच-साढ़े पांच फिट का होती है। 


---------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें