जल-सौंदर्य की छवियां चित्रकला में भी खूब उभरी हैं।
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हां, निर्मल जल-राशि मन में कई तरह की कल्पनाएं जगा सकती है। सौंदर्य-मर्म को पहचानने का, उसे अधिकाधिक पाने का, एक नया उपक्रम कर सकती है। कवियों का ही क्यों, किसी सहृदय का भी तो मन, जल देखकर चंचल हो उठता है। किसी जल-राशि को देखकर कई तरह की छवियां उसके भी मन में उमड़ने-घुमड़ने लगती हैं।
जल-सौंदर्य की छवियां चित्रकला में भी खूब उभरी हैं। इंप्रेसनिस्ट कलाकारों ने आंकी हैं वे। मोने का ‘वॉटर लिलीज’चित्र अत्यंत चर्चित हुआ है। यह तो एक ही उदाहरण हुआ हमारे अपने मिनियेचर चित्रों में राधा-कृष्ण के प्रसंग से जब-जब जमुना का रूप वर्णन हुआ है, तो उसे अपूर्व ही तो माना गया है। और संगीत की दुनिया का वाद्य यंत्र-‘जल तरंग’धातु (कांस्य) के पात्रों में जल भर कर डंडी की मदद से, जिससे सुमधुर तरंगित ध्वनियां उठाई जाती हैं। वात्स्यायन के कामसूत्र में इसका उल्लेख है। और अष्टछाप के कवियों के यहां भी जिसे स्थान मिला है।
‘संगीतसार’के अनुसार जल भरे 22 पात्रों (कटोरों) का जल तरंग ही ‘पूर्ण’जलतरंग है। आधुनिक काल में भी यह बिल्कुल खो नहीं गया है। हां, जब जलभरे कटोरों के ऊपर से गुजारी जाती है एक डंडी, तो जो संगीत-लहरियां उठती हैं, वे मुग्धकारी ही तो होती हैं। यों भी जल से जुड़कर कई चीजें सचमुच सौंदर्यमयी हो उठती हैं। सूखी रेत पर खड़ी हुई नाव उतनी सुंदर नहीं लगती, जितनी कि पानी पर बहती हुई नाव।
पानी में जब सूर्य-चंद्र की रश्मियां उतरती हैं तो भी जल-सौंदर्य देखते ही बनता है। और वे मेघ, जो जल का संदेश लिए हुए आसमान में घिर आते हैं, वे भी तो जल-आशय के कारण ही अधिक सुंदर लगते हैं। वे मेघ, जो गरजने के साथ बरसते भी हैं। सबकी अपनी-अपनी जल-संमृतियां हैं। रघुवीर सहाय की कितनी सुंदर कविता है-‘पानी के संस्मरण’।
वर्षा में जब पानी की बौछारें आती हैं, तो तन-मन दोनों ही तरंगित होते हैं। और फुहारें, वे कहीं से भी उठ रही हों, भली लगती हैं। उद्यान के बीच या किसी रिहायशी परिसर में भी ‘फौव्वारे’हों, यह बात सोची-विचारी जाती है। कई वास्तुशिल्पी तो किसी भवन की रचना के वक़्त, किसी जल कुंड की, छोटे-से ही सही जलाशय की, या पानी की पतली-सी ‘धारा’ की ,बात भी अवश्य सोचते हैं। और जयपुर का वह जल-महल, पुराने जमाने का, जिसके किनारे कई बार सैर की है, जल-सौंदर्य को सराहते हुए!
हां, अनगिनत हैं जल-स्रोत के, जल के संदर्भ,--एक सौंदर्य की तलाश के ही तो!
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