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जीवन धारा: प्रेम हृदय को विस्तार देता है, घृणा करती है संकुचित

Sat, 14 Feb 2026 07:27 AM IST
देवेश त्रिपाठी मार्कस ऑरेलियस

सार

घृणा हृदय को संकुचित करती है, जबकि मानवीय एकता और प्रेम उसे विस्तार देता है। इसलिए यदि जीवन में वास्तविक आनंद और असीम ऊर्जा चाहिए, तो अपने भीतर प्रेम, सम्मान और आत्मसम्मान का दीप जलाइए।
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प्रेम हृदय को विस्तार देता है - फोटो : AI
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विस्तार
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इतिहास गवाह है कि सत्ता की चाह और जीवन का संघर्ष अक्सर मनुष्य के स्वभाव को कठोर और संवेदनहीन बना देते हैं। लेकिन मानवता को एक ऐसा मार्ग भी दिखाया गया है, जहां शांति और धैर्य ही सबसे बड़े हथियार हैं। वास्तव में, हमारे जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि हमारे पास कितने भौतिक संसाधन हैं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि हमारे विचारों में कितनी शुद्धता और गहराई है। जब हम अपने मस्तिष्क को सकारात्मकता से भर लेते हैं, तो बाहरी अभाव हमें विचलित नहीं कर पाते।
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इस ब्रह्मांड में वर्तमान ही वह एकमात्र सत्य है, जिसे हम वास्तव में जी सकते हैं। एक बहुत ही क्रांतिकारी विचार है-कल्पना कीजिए कि आप मर चुके हैं और आपका पिछला जीवन समाप्त हो गया है। ऐसे में, अब जितना भी समय आपके पास बचा है, उसे एक बोनस की तरह जिएं। यह सोच आपको आलस्य, भय और टालमटोल से मुक्त करती है। जब आप वर्तमान को ही एकमात्र सत्य मान लेते हैं, तब भविष्य की चिंता और अतीत का पछतावा स्वतः समाप्त हो जाता है। तब आप हर क्षण को पूरी सजगता व ऊर्जा के साथ जीने लगते हैं। इससे आपको हर दिन कुछ नया और सार्थक करने की स्फूर्ति तथा प्रेरणा भी मिलती रहती है।

अक्सर हम एक अच्छा इन्सान कैसा होना चाहिए, इस पर लंबे प्रवचन देते हैं या बहस करते हैं, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है; बस उठिए और एक अच्छा इन्सान बनकर दिखाइए। क्योंकि सच्ची खुशी उस अंधेरे में नहीं मिलती, जहां हम दूसरों के प्रति घृणा पालते हैं, बल्कि वह तो उस प्रकाश में जन्म लेती है, जहां हम मानवता की एकता को हृदय से स्वीकारते हैं। ऊर्जा तब कई गुना बढ़ जाती है, जब हम प्रतिशोध नहीं, बल्कि करुणा को चुनते हैं; जब हम विभाजन नहीं, बल्कि संबंधों को मजबूत करते हैं। घृणा हृदय को संकुचित करती है, जबकि मानवीय एकता और प्रेम उसे विस्तार देता है। इसलिए यदि जीवन में वास्तविक आनंद और असीम ऊर्जा चाहिए, तो अपने भीतर प्रेम, सम्मान और आत्मसम्मान का दीप जलाइए। यही दीप आपके मार्ग को भी प्रकाशित करेगा और संसार को भी।
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