'पाकिस्तान की टीम धर्म प्रचारकों की टोली'
पाकिस्तान के प्रसिद्ध यूट्यूबर सैयद मुजम्मिल ने पाकिस्तान टीम को धर्म प्रचारकों की टोली करार दिया है। अपने एक वीडियो में सैयद मुजम्मिल ने कहा कि यह प्लेइंग इलेवन नहीं, धर्म प्रचारक इलेवन है। पिछले दिनों पाकिस्तान के ओपनर इमाम-उल-हक के वीडियो का जिक्र करते हुए सैयद मुजम्मिल ने बताया कि कैसे इमाम-उल-हक चैंपियंस ट्रॉफी में कप्तान रहे मोहम्मद रिजवान की इस बात के लिए तारीफ कर रहा था कि वो खिलाड़ियों को नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा कर लेता है। नमाज के लिए वॉट्सएप ग्रुप बनाकर टाइम बताता है, यानी टीम के लिए खेल की रणनीति नहीं, धर्म सबसे जरूरी काम हो गया है।
साल 2003 के वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तान के कई खिलाड़ी ट्रेंनिंग सेशंस को छोड़कर धर्म प्रचार के लिए निकल जाते थे। जब यह बात पीसीबी को पता चली तो खिलाड़ियों को नोटिस दिया गया। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक हों या स्पिन गेंदबाज सकलैन मुश्तक या कई अन्य खिलाड़ी, ये सभी विदेशी खिलाड़ियों को कन्वर्ट करने पर लगे रहे हैं।
पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसक इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान की मेजबानी में खेली गई, लेकिन टीम के खिलाड़ी कुछ भी अच्छा नहीं कर सके और फाइनल तक दुबई में खेला गया। टीम के खराब प्रदर्शन ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। फाइनल के बाद अवॉर्ड फंक्शन में पाकिस्तान की ओर से कोई उपस्थित नहीं रहा।
जनता के दबाव या राजनीति को देखते हुए अब पीसीबी ने टीम का पोस्टमार्टम शुरू किया है। इस पोस्टमार्टम की हालत देखिए। न्यूजीलैंड भेजी जा रही टी-20 टीम का कप्तान सलमान अली आगा को बनाया गया है, जिनकी पहले टी-20 टीम तक जगह नहीं थी। वो विशुद्ध टेस्ट और वनडे के खिलाड़ी हैं।
मो. रिजवान, जो मात्र चार टी-20 मैचों के कप्तान रहे, उन्हें वनडे टूर्नामेंट में हार का खामियाजा भुगतना पड़ा है। उनकी कप्तानी चली गई है और वो टी-20 टीम से बाहर हो गए हैं। देश के स्टार खिलाड़ी बाबर आजम को टी-20 टीम से बाहर कर दिया गया है। बाबर आजम को लेकर भी पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसक नाराज हैं और उन्हें कागजी किंग करार दे रहे हैं।
पाकिस्तान में क्रिकेट की जो स्थिति हो रही है, उससे स्पष्ट है कि इस खेल की हालत देश में कुछ वैसी ही हो जाएगी, जैसी उनके यहां हॉकी और स्क्वैश की हुई है। वेस्टइंडीज की राह पर पहुंचने में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को ज्यादा समय नहीं लगेगा। डूबती इकोनॉमी, बढ़ते आतंकवाद और धार्मिक उन्माद से पहले ही पाकिस्तान जूझ रहा है। उनके लिए क्रिकेट ही खुश होने का एक सहारा होता है, वो भी अब खत्म होता दिख रहा है।
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