जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब का अपना अति महत्वपूर्ण दौरा मध्य में छोड़कर भारत लौट आए हैं। पहलगाम की घटना ने कहीं न कहीं सरकार की उन कोशिशें को गहरा धक्का पहुंचाया है, जो जम्मू और कश्मीर को सामान्य जनजीवन की ओर ले जाने वाली हैं।
सुरक्षा के साथ ही इस आतंकी हमले से जम्मू और कश्मीर का पर्यटन उद्योग सबसे अधिक प्रभावित होगा, ऐसा साफ-साफ दिख रहा है। पहलगाम हमले के बाद बड़ी संख्या में देशभर से लोगों ने जम्मू और कश्मीर घूमने का अपना प्लान रद्द किया है। संभवतः पाकिस्तान और उसके समर्थक आतंकियों की यही कोशिश है कि वो जम्मू और कश्मीर को एक असुरक्षित स्थान के रूप में दुनिया को दिखलाएं।
भारत सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। एक तरफ पहलगाम हमले का मकबूल जवाब देना है तो दूसरी ओर जम्मू और कश्मीर में स्थिति को सामान्य करना भी है।
पहलगाम, जिसे मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है, वहां प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में देश-दुनिया से पर्यटक पहुंचते हैं। इनदिनों जम्मू और कश्मीर पर्यटकों से भरा पड़ा है। मंगलवार को भी जिस समय पहलगाम की बैसरन घाटी में यह आतंकी घटना घटी, उस समय भी 4000-5000 पर्यटक वहां मौजूद थे। पर्यटन उद्योग जम्मू और कश्मीर की रीढ़ की हड्डी है।
पिछले कुछ वर्षों से जम्मू और कश्मीर में लगातार पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वर्ष 2023 में जम्मू और कश्मीर में 2.11 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। यह संख्या वर्ष 2024 में बढ़कर 2.36 करोड़ पहुंच गई, जो एक रिकॉर्ड है। पर्यटन से केंद्र शासित प्रदेश के 5 लाख से अधिक लोगों को प्रत्येक और परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
नब्बे के दशक में जब आतंकवाद जम्मू और कश्मीर में चरम पर पहुंच गया था, तब वहां पर्यटकों की संख्या लगभग शून्य तक पहुंच गई थी, लेकिन वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन के दौरान ऐसे कई प्रयास किए, जिनसे जम्मू और कश्मीर सामान्य जनजीवन की ओर लौटता चला गया।
वहां न केवल विधानसभा चुनाव हुए, बल्कि दुनिया को यह विश्वास हुआ कि जम्मू और कश्मीर अब सुरक्षित है। यही कारण था कि दुनियाभर से बड़ी संख्या में पर्यटकों ने जम्मू और कश्मीर की ओर रुख किया।
होटल इंडस्ट्री, हैंडीक्रॉफ्ट, फूड इंडस्ट्री, गाइड, हाउसबोट और अन्य उद्योग पर्यटन से सीधा संबंधित हैं। हर साल करोड़ों रुपए की आमदनी जम्मू और कश्मीर सरकार तथा लोगों को पर्यटन से होती है। पहलगाम हमले से जम्मू और कश्मीर निश्चित रूप से आर्थिक रूप से परेशानी में पड़ेगा। पिछले कुछ समय से जिस तरह से पर्यटन जम्मू और कश्मीर में बढ़ा है, उससे साफ है कि लोगों में सुरक्षा की भावना जागी थी।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने से यह मैसेज दुनिया में गया कि जम्मू और कश्मीर अब सुरक्षित है, लेकिन पहलगाम की घटना ने सरकार के प्रयासों को आघात पहुंचाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घटना के चंद घंटे में स्वयं श्रीनगर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सऊदी अरब से लौट आए। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। देश भर में अलर्ट जारी किया गया है।
केंद्र सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। एक तरफ देशभर में आक्रोश है। पाकिस्तान और उसके समर्थक आतंकियों को सबक सिखाने की जनभावना साफ दिख रही है। उरी और पुलवामा हमलों के बाद भारतीय सैन्य बलों ने पाक अधिकृत कश्मीर व पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। ऐसा ही कुछ दोबारा होता दिख रहा है।
मोदी सरकार की प्रथम प्राथमिकता निश्चित रूप से जनता में विश्वास लौटना तथा जम्मू और कश्मीर में दोबारा स्थिति को सामान्य करना है। पहलगाम में आतंकी हमले ने कहीं न कहीं जम्मू और कश्मीर में पर्यटन की रीढ़ को तोड़ने का प्रयास किया है। उम्मीद यही है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी और एक बार फिर पहलगाम की वादियों में पर्यटक चहलकदमी करते हुए दिखेंगे।
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