कभी पाकिस्तानी रहे गायक अदनान सामी को साल 2016 की पहली जनवरी न केवल नए साल के जश्न के लिए, बल्कि जीवनभर याद रह जाने वाले दिन के रूप में यादगार रह जाने वाली है। इस दिन से ही वह भारतीय हुए थे, जबकि भारत की नागरिकता पाने का प्रयास वह साल 2000 से ही कर रहे थे।
कम लोगों को जानकारी होगी कि अदनान सामी के पिता भले ही पाकिस्तान के एक डिप्लोमेट थे, लेकिन उनकी मां भारतीय मूल की रही हैं। उनके रूट्स जम्मू कश्मीर से जुड़े हैं। अदनान का जन्म लंदन में हुआ है, जबकि वह साल 2001 से ही भारत में रह रहे हैं। आज उन्हें मिले पद्मश्री सम्मान पर आपत्ति जताने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कभी विपक्ष में रहते हुए भाजपा उनकी वीजा अवधि बढ़ाए जाने के कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के फैसले का विरोध करती थी। और फिर इसी भाजपा सरकार ने पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में अदनान को नागरिकता दी।
हालांकि इसे भी बहुत आश्चर्य से नहीं देखा जाना चाहिए। बात कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की, अक्सर देखा गया है कि विपक्ष में रहते कोई भी पार्टी सत्तासीन सरकार के जिन फैसलों का विरोध करती है, सत्ता में आने पर उसे लागू कर देती है। आधार, एफडीआई और एनपीआर जैसे मामलों में भी यही बात लागू होती है।
अदनान सामी को नागरिकता देकर मोदी सरकार ने अक्सर सहिष्णुता पर सवाल खड़ा करने वाले उस वर्ग को भी जवाब दिया था, जिनका कहना होता था कि कलाकारों के लिए सरहदें नहीं होती, कोई सीमा नहीं होती। उन्हें नागरिकता दस्तावेजों के आधार पर और अधिनियम के तहत दी गई थी, लेकिन सियासत तो तब भी हुई थी। कहा जा रहा था कि अदनान के संबंध बॉलीवुड के दबंग सलमान खान से अच्छे हैं और सलमान के संबंध पीएम मोदी से, इसलिए वह भारतीय नागरिक बन पाए।
जबकि तथ्य ये है कि अदनान सामी ने तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास नागरिकता के लिए तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत किया था और इसके बाद तत्कालीन अटार्नी जनरल मुकुल रहतोगी की राय ली गई थी और तब जाकर अदनान को नागरिकता दी गई थी। खैर, सियासी एंगल तलाशने का चलन कोई नया थोड़े ही है।
भारत अब भी दुनिया के दूसरे देशों से अधिक सहिष्णु है, जिसके कारण दुनिया भर के लोगों का इस देश के प्रति आकर्षण है। सीएए को किनारा कर के देखा जाए तो अब भी यहां हर धर्म, संप्रदाय, नस्ल, जाति के लोगों को बराबर स्वतंत्रता हासिल है।
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