सिर्फ अकेलापन ही किसी व्यक्ति में डिमेंशिया पैदा होने की निर्णायक वजह नहीं है। यह बढ़ती उम्र व आनुवंशिकी के कारण भी हो सकता है। डिमेंशिया में कई तरह की स्थितियों को शामिल किया जाता है। इन्हीं में से एक है अल्जाइमर, यानी धीरे-धीरे याददाश्त कम होते चले जाना। अकेलेपन से याददाश्त संबंधी समस्याएं तो पैदा होती दिखीं, पर इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला कि यह डिमेंशिया का कारण है। इसके अलावा भी कई कारक हैं, जो याददाश्त को प्रभावित करते हैं।
अकेलापन एक ऐसा भावनात्मक एहसास है, जिससे लोग जीवन में कभी न कभी तो गुजरते ही हैं। अकेलापन कोई समस्या नहीं, पर यह हमारे सोचने व याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ता लंबे समय से इस बात पर चर्चा करते आ रहे हैं कि क्या इससे डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
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डिमेंशिया एक व्यापक शब्द है, जिसमें कई तरह की स्थितियों को शामिल किया जाता है। इन्हीं में एक सबसे जानी-पहचानी बीमारी अल्जाइमर है, यानी धीरे-धीरे याददाश्त कम होते चले जाना। इन दोनों शब्दों का प्रयोग अक्सर एक दूसरे के लिए कर लिया जाता है, पर ऐसा नहीं होना चाहिए। डिमेंशिया के बिना भी दिमागी कामकाज में कमजोरी या धीमापन महसूस हो सकता है। असल में, यह रोग आनुवंशिकी, बढ़ती उम्र और उन जैविक कारकों से प्रभावित होता है, जिन्हें हम अब भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसे समझने के लिए छह साल तक 65 से 94 साल के बीच के दस हजार लोगों पर एक अध्ययन किया गया। शुरुआत में सभी लोग स्वस्थ, आत्मनिर्भर और डिमेंशिया से मुक्त थे।
शोधकर्ताओं ने इस अवधि में उनकी याददाश्त पर नजर रखी और जानने का प्रयास किया कि क्या अकेलेपन ने इनमें आए बदलावों में कोई भूमिका निभाई। नतीजा पेचीदा था। अकेलेपन से याददाश्त संबंधी समस्याएं तो पैदा होती दिखीं, लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला कि यह डिमेंशिया का कारण है। शोधकर्ताओं ने याददाश्त संबंधी विकारों व डिमेंशिया को एक ही नहीं समझा, फिर भी इस सूक्ष्म अंतर को नजरअंदाज कर दिया जाता है। अकेलापन अकेला नहीं होता। अध्ययन में शामिल कई प्रतिभागियों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अवसाद या शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी समस्याएं भी थीं। ये सभी मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं।
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अकेलापन महसूस करना केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके आसपास कितने लोग हैं, बल्कि इस बात पर करता है कि आप उनसे कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। शोध से पता चलता है कि याददाश्त संबंधी समस्याएं अकेलेपन के दूर होने पर सुधर सकती हैं और सामाजिक रूप से सक्रिय रहने से संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार हो सकता है। सिर्फ अकेलापन ही किसी व्यक्ति में डिमेंशिया पैदा होने का निर्णायक कारक होने की संभावना नहीं है। - द कन्वर्सेशन