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दूसरा पहलू: कुत्ते इन्सानी भावनाओं को भी पहचानते हैं

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुत्ते किसी चिड़चिड़े या गुस्सैल इन्सान से दूर रहने लगते हैं, पर किसी रोते व्यक्ति के पास चुपचाप आकर बैठ जाते हैं? यह व्यवहार बताता है कि कुत्ते हमारी भावनाओं को समझने की क्षमता रखते हैं। विज्ञान भी इसे स्वीकार करता है।
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हाल ही में आईसाइंस जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में कुत्तों के मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन से पता चला है कि कुत्ते चेहरों की तुलना में भावनात्मक हाव-भाव और आवाजों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। अब तक वैज्ञानिक यह नहीं समझ पाए थे कि कुत्ते सिर्फ अच्छी व बुरी मनोदशा में अंतर कर पाते हैं या खुशी, गुस्सा, डर और उदासी जैसी भावनाओं को भी पहचान सकते हैं। ऑस्ट्रिया की वियना यूनिवर्सिटी के तंत्रिका वैज्ञानिक राउल हर्नांडेज-पेरेज और उनके सहयोगियों ने इसी सवाल का जवाब खोजने की कोशिश की। उन्होंने पालतू कुत्तों के मस्तिष्क का एमआरआई स्कैन किया। नतीजों से पता चला कि जब कुत्ते डर और उदासी के बीच अंतर कर रहे थे, तब उनके दिमाग का एक खास हिस्सा ‘राइट रोस्ट्रल सुप्रासिल्वियन गाइरस’ अधिक सक्रिय था। वहीं डर व गुस्से के बीच अंतर करते समय ‘राइट मिड एक्टोसिल्वियन गाइरस’ और ‘लेफ्ट स्प्लेनियल गाइरस’ जैसे हिस्से सक्रिय हुए।

वैज्ञानिकों के अनुसार, डर व गुस्सा ऐसी भावनाएं हैं, जिन पर कुत्तों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ सकती है। इन्हें महसूस करने पर कुत्तों की हृदय गति बढ़ जाती है और उनकी शारीरिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं। डर व गुस्सा खतरे का संकेत देते हैं, जबकि उदासी आमतौर पर नहीं। इसलिए, कुत्ते इसके प्रति अलग प्रतिक्रिया करते हैं। पर, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कुत्ते इन्सान की तकलीफ नहीं समझते। वे बोलने के तरीके व शरीर की गंध से भी भावनाओं को पहचानते हैं। असल में, कुत्ते हमारे साथ रहते हुए रोज हमें समझना सीखते हैं। वे हमारे व्यवहार, आवाज, चेहरे के हाव-भाव पर ध्यान देते हैं और उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया करते हैं।       
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-द कन्वर्सेशन

(कुत्तों के दिमाग के एमआरआई स्कैन से पता चला कि वे चेहरों की तुलना में भावनात्मक हाव-भाव और आवाजों पर कहीं ज्यादा ध्यान देते हैं।)
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वैज्ञानिकों के अनुसार, डर व गुस्से को महसूस करने पर कुत्तों की हृदय गति बढ़ जाती है और उनकी शारीरिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं। डर व गुस्सा खतरे के संकेत हैं। वहीं, उदासी खतरे का संकेत नहीं होती।
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