फल और सब्जियां (सांकेतिक तस्वीर)
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यह विचार कि फल और सब्जियां कैंसर का कारण बन सकती हैं, सुनने में अजीब लगता है! दशकों से किए गए शोध लगातार यह बताते आए हैं कि जो लोग अधिक मात्रा में पौधों पर आधारित भोजन करते हैं, वे सामान्यतः अधिक स्वस्थ और लंबा जीवन जीते हैं। उनमें हृदय रोग, स्ट्रोक और कई प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम पाया जाता है। ऐसे में यह दावा कि फल और सब्जियां युवा लोगों में फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकती हैं, स्वाभाविक रूप से चौंकाने वाला है। दरअसल, यह चिंता किसी बड़े और ठोस शोध से नहीं, बल्कि एक छोटे अध्ययन से उत्पन्न हुई है, जिसमें केवल 187 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था, जिन्हें कम उम्र में फेफड़ों का कैंसर हुआ। इनमें से अधिकांश धूम्रपान नहीं करते थे। जब उनके खानपान के बारे में पूछा गया, तो कई लोगों ने बताया कि वे फल, सब्जियां और साबुत अनाज भरपूर मात्रा में लेते थे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अध्ययन में कीटनाशकों का सीधा मापन नहीं किया गया। शोधकर्ताओं ने केवल औसत आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया कि इन खाद्य पदार्थों में मौजूद संभावित कीटनाशक कैंसर से जुड़े हो सकते हैं। लेकिन यह निष्कर्ष निकालना कि फल और सब्जियां खुद हानिकारक हैं, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। यह अध्ययन पहले से बीमार लोगों को देखकर उनकी आदतों का अनुमान लगाकर किया गया था। इस प्रकार के अध्ययन यह साबित नहीं कर सकते कि बीमारी का कारण क्या था। इसके विपरीत, बड़े और दीर्घकालिक अध्ययन हजारों लोगों को वर्षों तक ट्रैक करते हैं और अधिक विश्वसनीय परिणाम देते हैं।
ऐसे शोध बार-बार दिखाते हैं कि अधिक फल और सब्जियां खाने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और कैंसर का जोखिम घट सकता है। छोटे अध्ययनों में अक्सर संयोग और अन्य कारकों का प्रभाव ज्यादा होता है। जहां तक कीटनाशकों की बात है, यह सही है कि उसके कुछ अवशेष फल और सब्जियों पर रह सकते हैं। यह भी देखा गया है कि जो लोग लंबे समय तक और अधिक मात्रा में इनके संपर्क में रहते हैं, जैसे किसान, उनमें कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य मात्रा में फल और सब्जियां खाने से आम लोगों को कैंसर होता है। संतुलित और पौधों पर आधारित आहार ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सबसे भरोसेमंद विकल्प बना रहता है। -द कन्वर्सेशन