बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की स्थिति
पाकिस्तान सेना के कुछ और झूठों पर नजर डालते हैं। 2016 में उरी हमले के बाद भारतीय सेना की स्ट्राइक को पाकिस्तान सेना ने सिरे से नकार दिया था, जबकि उसे नुकसान हुआ था। 2019 में पुलवामा के बाद जब भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की तो पाकिस्तान सेना ने उसे बिना किसी नुकसान वाला बता डाला था, जबकि बालाकोट में जिस आतंकी ठिकाने पर भारतीय वायुसेना ने मिसाइल गिराई थीं, वहां चार महीने मीडिया को जाने नहीं दिया गया था। भारतीय एयर स्ट्राइक के अगले दिन पाकिस्तान वायुसेना ने जवाबी हमला किया था, जिसमें भारतीय वायुसेवा के पायलट अभिनंदन पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू जहाज का पीछा करते हुए एलओसी पार कर गए थे और उनके मिग-21 बाइसन ने एफ-16 को मिसाइल से शूट कर दिया था।
मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर का प्रोपेगेंडा
हालांकि, अभिनंदन का विमान भी मिसाइल लगने से क्रैश हो गया था। तब भी पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर ने टेलीविजन पर आकर प्रोपेगेंडा फैलाया था कि पाकिस्तान ने भारत के दो लड़ाकू जहाज गिराए हैं, दो पायलट उनके कब्जे में हैं। सच तो यह है कि अभिनंदन के अलावा दूसरा पायलट कौन था? उसका सच आज तक पाकिस्तान सेना ने नहीं बताया है, जबकि सभी जानते हैं कि वो दूसरा पायलट एफ-16 का था, जिसे भारतीय समझकर पाकिस्तानियों ने पीट-पीटकर घायल कर दिया था और उसकी अस्पताल में मौत हो गई थी। हद तो यह है कि अपनी जनता को मूर्ख बनाने के लिए पाकिस्तान सेना ने अपने एफ-16 को भारत का सुखोई बता दिया और वार मेमोरियल बनाकर सुखोई की टेल तक लगा दी, जबकि बाद में उनके एक रिटायर अफसर ने स्वीकारा कि भारत का कोई दूसरा विमान क्रैश नहीं हुआ था।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान सेना का प्रोपेगेंडा
अब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी पाकिस्तान सेना का प्रोपेगेंडा चरम पर है। पाकिस्तान सेना की सोशल मीडिया टीम यह भ्रम फैलाकर अपनी जनता को उल्लू बना रही है कि उसने भारतीय वायुसेवा के लड़ाकू जहाजों को गिराया है, जबकि भारत सरकार और सेना यह साफ कर चुकी है कि सभी पायलट सुरक्षित हैं। कोई जहाज नष्ट नहीं हुआ है। दरअसल, दुनिया में एक मजाक चलता है कि सभी देशों को फौज मिली है, लेकिन पाकिस्तान में फौज को एक देश मिला है। अपने फायदे के लिए पाकिस्तान सेना शुरू से वहां आतंक को पालती आ रही है। पाकिस्तान सेना के जनरलों ने अरबों अमेरिकी डॉलर आतंकवाद के नाम पर डकारे हैं। पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ हों या बड़े पाकिस्तानी नेता, वो आतंकियों को अपना हीरो बता चुके हैं।
दुनिया की दूसरी सेनाओं के विपरीत पाकिस्तान सेना की देश की रक्षा कम, बिजनेस आर्मी अधिक रुचि है। वो पाकिस्तान में पेट्रोल पंप, इंडस्ट्रियल पार्क, बैंक, बकरी, होजरी कंपनी, डेरी फार्म, सीमेंट प्लांट, स्कूल-यूनिवर्सिटी से लेकर सीमेंट कारखानों से लेकर कॉलोनाइजर तक का कारोबार करती है। कुछ साल पहले पाकिस्तान की संसद में कुछ दस्तावेज रखे गए थे, उनके अनुसार पाकिस्तान सेना 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस कर रही है, यानी पाकिस्तान सेना को लड़ने से अधिक बिजनेस करने में इंटरेस्ट है।
अब पाकिस्तान सेना का बुरा समय शुरू हो गया है। जिस आतंकवाद रूपी जहरीले सांप को उसने पाला था, वही उसे ठस रहा है। पाकिस्तान सेना के खिलाफ देश के भीतर से आवाजें उठ रही हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से बगावत के सुर बुलंद हो चले हैं। बलूचिस्तान और सिंध प्रांत तो स्वयं को पाकिस्तान से अलग होकर अलग देश के लिए आंदोलन कर रहे हैं। पाकिस्तान सेना को वहां के लोग ही उसका असली चेहरा दिखा रहे हैं। भारत के लिए यह सुनहरा अवसर है। भारत को चाहिए कि वो पाकिस्तान सेना की कमर तोड़ दे। ऑपरेशन सिंदूर तक न रुके। जैसा कुछ पूर्व भारतीय जनरल कह रहे हैं कि यह ऑपरेशन सिंदूर का फेस वन है। आवश्यकता पाकिस्तान सेना को हर तरीके से नुकसान पहुंचाने और बेनकाब करने की है। आतंकी पाकिस्तान सेना का फन कुचलने तक भारत को रुकना नहीं चाहिए।
------------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।