कोरोना काल को इसीलिए याद रखा जाएगा कि अब शिक्षा संवाद कक्षा में न होकर वर्चुअल स्पेस में होगा। जिसके प्रभाव और परिणाम शिक्षा में संवाद और शिक्षण की संस्कृति को ही बदल देगें। अब समाज में शिक्षण-प्रशिक्षण की नई शैली विस्तार पा रही है।
मौजूदा महामारी से उपजी चुनौतियां समाज में रूपांतरण की प्रक्रिया को अवसरों के रुप में आयोजित करने को प्रेरित कर रही हैं। यह प्रेरणा समाज को बेहतर बनाने के बहाने संकट को अवसर में तब्दील करने का वातावरण भी बना रही है। भविष्य का शैक्षिक परिदृश्य संभवतः ज्यादा सहज, बहु-विकल्पी, अधिक नवाचारी और समावेशी रुप में उभरे।
गुणवत्ता की दृष्टि से भी शिक्षा अपने बदले गुण-धर्म के अनुरूप अधिक प्रभावी होगी। यह शिक्षा की नई संस्कृति वर्चुवल स्पेस के साथ अपनी उपस्थित दर्ज कराएगी। नए अवसर यथार्थ में बदल सके, इसके लिए पूरी शिक्षा-व्यवस्था को रिवैंप करने की जरूरत है। नए माहौल में नवाचारों को नई दृष्टि से आयोजित करने की जरूरत है।
भारत के शिक्षा जगत को दुनिया की ज्ञान-गंगा में गहराई तक उतरने की आवश्यकता है। जिसके पर्याप्त अवसर और विकल्प भी अब उभर रहे हैं। इस दिशा में सार्थक हस्तक्षेप करते हुए शैक्षिक परिदृश्य पर नए प्रयोगों का परिवेश तैयार करने की जरूरत है। जिसमें शिक्षक को नई भूमिका में मोर्चा संभालने के लिए तैयार होना ही होगा।
सरकार को डिजिटल अधो-संरचना का विस्तार कर समाज को सशक्त करना होगा। जिससे समाज का एक बड़ा तबका डिजिटल शिक्षण संस्कृति में जीने का अभ्यस्त बन सके। समाज को भी अब डिजिटल माध्यमों के जरिए नवाचार करने के नए-नए उद्यम करने होंंगे।
शिक्षा जगत में ज्ञान की नवाचारी संस्कृति विकसित करने की महती आवश्यकता है। यह हमारे लिए एक सुगमता लेकर और आया है क्योंकि संयोग से कोरोना-कालीन संकट के दौरान ही भारतीय नेतृत्व नई शिक्षा नीति लेकर आया है। जो मौजूदा परिदृश्य पर उभरी चुनौतियों को अवसरों में बदलने का आसान रोडमैप तैयार करने में मददगार साबित होगी।
भारत सरकार अपने डिजिटल अभियान के साथ शिक्षण पद्धति को प्रभावी, संवादी और जीवंत बनाने वाले वातावरण के साथ शिक्षा की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में तकनीकी विकास के लिए प्रयासरत हैं।
कोरोना महामारी की चुनौती का सामना करने के लिए इसी बीच भारत सरकार के द्वारा महत्वपूर्ण एप ‘युक्ति’ को लांच करना इस दिशा में प्रभावी पहल है। जो नए भारत के शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षण संस्थाओं को अधिक ज्ञान संपन्न और एवं नवाचारी प्रवृत्ति की ओर उन्नमुख करने में अहम भमिका निभाएगा।
कोरोना संकट ने शिक्षा क्षेत्र में जिन चुनौतियों को खड़ा किया है। उनमें सबसे बडा रुपांतरण कक्षा शिक्षण का ऑनलाइन शिक्षा में बदल जाना है। इस अनुकूलता में शिक्षक और शिक्षार्थी के साथ-साथ पाठ्क्रम, मूल्यांकन और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का नए रूपांतरण में प्रभावी बनना है।
शिक्षा की इस नई संस्कृति के साथ ही हमारे शिक्षण संस्थानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। जिसके लिए विशेष तैयारियों की जरुरत है। कक्षा शिक्षण का प्रतिस्थापन ऑनलाइन शिक्षण से नई सार्थकता और प्रभाविकता के साथ हो, यही विकास के अगले चरण प्राथमिकता बने। जिसेे ध्यान में रखकर संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को अपने अंदर आमूल-चूल बदलवों को स्वीकृति देनी ही होगी।
(लेखक युवा समाजशास्त्री हैं)
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