कैमरों और रेड कार्पेट को छोड़कर जब मैं यूनिसेफ के साथ अफ्रीका व एशिया के धूल भरे रास्तों पर निकली और भूखे, बेसहारा बच्चों को अपनी बांहों में समेटा, तब मुझे जिंदगी का असली फलसफा समझ आया। मुझे समझ आया कि युवावस्था अक्सर खुद को साबित करने, नाम कमाने और दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरने की अंधी दौड़ में गुजर जाती है। पर, वृद्धावस्था आपको किसी भी बोझ से मुक्त होकर पूरी दुनिया के लिए जीने की असीमित आजादी देती है।
मैंने जिंदगी के इस लंबे, खूबसूरत सफर से एक अनमोल सबक सीखा है। इस पड़ाव पर आकर आपको एहसास होता है कि ऊपर वाले ने आपको दो हाथ क्यों दिए थे-एक हाथ खुद को संभालने और दूसरा किसी बेसहारा, मजलूम का हाथ थामने या किसी रोते हुए को हंसाने के लिए। यकीन मानिए, जब आप अपनी उम्रदराज उंगलियों को किसी मजबूर की मदद के लिए आगे बढ़ाते हैं, तो आपकी हथेलियों की लकीरें ब्रह्मांड की सबसे खूबसूरत कलाकृति बन जाती हैं। सच्ची सुंदरता वह नहीं है, जिसे महंगे कॉस्मेटिक्स या सर्जरी से जबरन रोककर रखा जाए; बल्कि उम्र के आखिरी पड़ाव पर किसी को नि:स्वार्थ प्यार देने से आंखों में दीये की तरह जगमगाता नूर है।
वृद्धावस्था आपके जीवन का वह सुनहरा और परिपक्व अध्याय है, जहां आपकी रूह अपने सबसे खूबसूरत, शांत और चमकदार शिखर पर होती है। यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि ईश्वर का दिया हुआ सबसे हसीन तोहफा है।