फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एआई से दिल लगाने के खतरे: लाखों लोगों के लिए थेरेपिस्ट और दोस्त बन रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता

Sat, 21 Feb 2026 06:43 AM IST
लव गौर अमेलिया मिलर, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

एआई थेरेपिस्ट, कोच और प्रेमियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इसके खतरे भी स्पष्ट होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मैं जूम पर एक मशीन लर्निंग शोधकर्ता से बात कर रही थी, जो दुनिया की शीर्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब में से एक में वॉइस मॉडल बनाता है। यह उन दो दर्जन से ज्यादा गुमनाम इंटरव्यू में से एक था, जो मैंने अपने अकादमिक शोध के हिस्से के तौर पर किए थे, यह जानने के लिए कि एआई साथी बनाने वाले लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। मैं यह समझना चाहती थी कि एआई साथी के बारे में जरूरी डिजाइन संबंधी फैसले लेने वाले डेवलपर्स अपने काम के सामाजिक और नैतिक प्रभाव को कैसे देखते हैं।
विज्ञापन


हमारी बातचीत शुरू हुए 20 मिनट हो चुके थे, जब मैंने उससे पूछा कि क्या आपको लगता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भावनात्मक आत्मीयता दिखानी चाहिए? ‘मेरा मतलब है, मुझे नहीं पता’, उसने भावनात्मक आत्मीयता दिखाने के बारे में कहा, फिर रुक गया। ‘यह मुश्किल, मगर दिलचस्प सवाल है। यह कहना मुश्किल है कि यह लोगों पर कैसे असर डालेगा, अच्छा या बुरा। जाहिर है, इससे भ्रम पैदा होगा।’ हमारी उभरती मुश्किल को बताने के लिए भ्रम शब्द पर्याप्त नहीं है। अधिकांश किशोर एआई साथी का सहारा लेते हैं। एआई थेरेपिस्ट, कोच और प्रेमियों की संख्या भी बढ़ रही है। फिर भी बहुत कम लोगों को पता है कि इस नई दुनिया को बनाने वाले कुछ अग्रणी प्रौद्योगिकीविद जो कर रहे हैं, उसे लेकर बहुत भ्रम हैं। असल में, वे इतने भ्रमित हैं कि कुछ तो अकेले में मानते हैं कि वे एआई इंटिमेसी टूल्स इस्तेमाल करने के बारे में सोचते भी नहीं हैं।

एक शीर्ष प्रयोगशाला में सुरक्षा जोखिम कम करने वाली टीम के एग्जीक्यूटिव ने मुझे बताया, ‘मैं भावनात्मक जरूरतें पूरी करने के लिए एआई का सहारा नहीं लेता हूं। मैं काम के दौरान इसमें लगा रहता हूं, और सावधान रहता हूं।’ कई अन्य लोगों ने भी यही कहा कि भले ही वे एआई टूल्स बना रहे हों, पर उम्मीद है कि उन्हें भावनात्मक समर्थन के लिए कभी मशीनों की जरूरत महसूस न हो। जैसा कि एक शोधकर्ता ने कहा, ‘वह काला दिन होगा।’ ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट में अपने शोध के तहत मैंने पिछले साल कई महीने ओपनएआई, एंथ्रोपिक, मेटा और डीपमाइंड के शोध वैज्ञानिकों और डिजाइनरों का इंटरव्यू लिया, जिनके उत्पाद सामान्यतः एआई साथी के तौर पर नहीं बेचे जाते, पर लाखों लोगों के लिए थेरेपिस्ट और दोस्त बन रहे हैं। मैंने उन कंपेनियन एप्स और थेरेपी स्टार्टअप्स के नेतृत्वकर्ता और निर्माणकर्ताओं से भी बात की, जो महामारी के बाद से इन व्यवसायों में आए भारी-भरकम निवेश की वजह से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन


एआई साथी को एक बड़े व्यावसायिक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता देने वाले उत्पाद लगातार उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और मुनाफा बढ़ाने के नए तरीके निकाल रहे हैं। ये मनुष्य-एआई के संबंध को समझने और उन्हें आकार देने के लिए खास तौर पर तैयार किए गए हैं। इंटरफेस डिजाइन, ट्रेनिंग डाटा और मॉडल पॉलिसी पर रोजाना के फैसलों के जरिये वे अपने उत्पाद में मूल्य को एनकोड (सूचना को एक अधिक कुशल या सुरक्षित प्रारूप में बदलना) करते हैं। हालांकि, जनता सोचती है कि उन्हें इन चैटबॉट्स के रूप में एक सहानुभूतिपूर्ण और चिरस्थायी साथी मिल रहा है, पर उनके कई निर्माताओं को पता है कि भावनात्मक बंधन बनाना उपयोगकर्ताओं को बांधे रखने का एक तरीका है।

हमें इस बात से सावधान होना चाहिए कि कुछ अंदरूनी लोगों, जो टूल्स को बेहतर तरीके से जानते हैं, का मानना है कि ये टूल्स नुकसान पहुंचा सकते हैं और मेरी जैसी बातचीत डेवलपर्स को उनके काम के नतीजों से कहीं ज्यादा गहराई से निपटने के लिए प्रेरित करती है। यह बात तब और भी परेशान करने वाली हो जाती है, जब तकनीक के दिग्गज सबके सामने कहते हैं कि हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें ज्यादातर लोगों की भावनात्मक जरूरतें मशीनें पूरी करेंगी। मेटा के चीफ एग्जीक्यूटिव मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि एआई उन लोगों की मदद कर सकता है, जो कम अकेलापन महसूस करने के लिए ज्यादा दोस्त चाहते हैं।

वास्तव में, एआई के साथ हम कैसे संवाद करते हैं, इसे अनुकूलित करने की क्षमता जरूरी है। यह क्षमता तभी विकसित होगी, जब डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी। दरअसल, जितने ज्यादा लोग समझेंगे कि यह कैसे काम करता है, और इनसे क्या जोखिम होते हैं, वे अपने ऊपर पड़ने वाले असर को प्रबंधित करने में उतने ही ज्यादा काबिल होंगे। यह बात एआई साथी का इस्तेमाल करने वालों के लिए जितनी सच है, उतनी ही उन्हें बनाने वाले तकनीक के जानकारों के लिए।

लिरिया 3
यह गूगल डीपमाइंड का एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संगीत-निर्माण मॉडल है, जो आपके लिखे हुए प्रॉम्प्ट, फोटो या वीडियो के आधार पर उच्च गुणवत्ता का संगीत तैयार कर सकता है। यह केवल धुन ही नहीं, बल्कि लिरिक्स और वोकल के साथ 30 सेकंड का पूरा गाना बना सकता है। आप कोई फोटो या वीडियो अपलोड कर सकते हैं और लिरिया उस दृश्य के मूड और माहौल के हिसाब से बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार कर देगा। आप गाने की शैली, लय व वोकल स्टाइल को अपनी पसंद के अनुसार एडजस्ट कर सकते हैं। यह हिंदी, अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियाई और पुर्तगाली सहित आठ भाषाओं में काम कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें