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जीवनसार: अहिंसा, संवाद, विनम्रता कमजोरी नहीं शक्ति का सूचक हैं

सार

हमारा विश्वास जिस पद्धति में अधिक होगा हम उसी पद्धति का प्रयोग और अभ्यास सबसे ज्यादा करेंगे। हमें संवाद, विनम्रता, अहिंसा, प्रेम आदि में विश्वास रहा नहीं या कमजोर हो गया तो हम इन्हें शक्तिहीन समझने लगे हैं।
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गीता में श्रीकृष्ण के इन उपदेशों को जीवन में अपनाएं - फोटो : Twitter
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विस्तार
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हमने देखा है कि समाज सख्त स्वभाव का होता जा रहा है। विनम्रता की जगह आक्रोश ने ले ली है, संवाद की जगह विवाद ले रहा है। हम किसी भी समस्या को अब सुलझाने की जगह उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना उलझा देते हैं। इस सबका जो मुझे मूल समझ आता है वो है- हमारा विश्वास। हमारा विश्वास जिस पद्धति में अधिक होगा हम उसी पद्धति का प्रयोग और अभ्यास सबसे ज्यादा करेंगे।

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हमें संवाद, विनम्रता, अहिंसा, प्रेम आदि में विश्वास रहा नहीं या कमजोर हो गया तो हम इन्हें शक्तिहीन समझने लगे हैं। बाहुबल, धनबल, आक्रोश इन्हें हम शक्ति समझते हैं इसलिए इनका प्रयोग अधिक करते हैं। पांडव शक्तिशाली थे किंतु वो संवाद में विश्वास रखते थे, उन्होंने कई बार प्रयत्न किया, वार्ता करना चाही, लेकिन कौरव इसे उनकी कमजोरी समझते थे जबकि कौरवों को भी विदित था कि अमोघ और गांडीव धारी अर्जुन का प्रताप क्या है?  किन्तु यहां विश्वास की बात है।

श्रीकृष्ण में पांडवों का विश्वास था और श्रीकृष्ण तो प्रेम, त्याग, साहस और कर्म की मूर्ति रहे। कौरवों को असीम बलशाली, शौर्यवान, महावीरों पर भरोसा था जो कि होना भी चाहिए था किन्तु उनका अहंकार ही उनकी नैतिक चूक रही। पांडव विजयी रहे क्योंकि वे युद्ध में भी विनम्र रहे। शक्ति भी उसी का वरण कर विजयश्री देती है जिसे शक्ति का महत्व और मर्म पता हो, जो शक्ति का दुरुपयोग न करे। 
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श्रीकृष्ण ने जिस विनम्रता और संवाद श्रेष्ठता से अर्जुन को रणभूमि में ज्ञान दिया उसे ही तो हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। श्रीकृष्ण के प्रेम की शक्ति का विन्यास समझना हो तो आप भागवत महापुराण का महारास पढ़िए। 


प्रेम, अहिंसा, संवाद और विनम्रता जीवन की वो इकाइयां हैं जो आपमें शौर्य, शक्ति और न्याय को स्थापित करती हैं। आक्रोश, अहंकार, हिंसा वे कमजोरियां हैं जो आपको हमेशा डरा हुआ महसूस करवाएंगी। मैंने तो बस आपको अपने मन की बात बताई, मुझे याद है जब माउंट एवरेस्ट पर मेरे पास ऑक्सीजन नहीं थी तो इसी संवाद और प्रेम ने मुझे स्व.अंजली कुलकर्णी जी की बची हुई ऑक्सीजन उपलब्ध करवाकर प्राण दान दिया था।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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