हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को साहित्य का नोबेल
- फोटो : Amar Ujala
लाजलो क्रासनाहोरकाई हंगरी के नोबेल पाने वाले दूसरे साहित्यकार हैं। 2002 में इमरे कर्टीज को यह मिला था। वे द्वितीय विश्वयुद्ध की उपज थे। एक किशोर के रूप में उन्हें यातना शिविर में लेजाया गया और कंकाल के रूप में वे लौटे। बाहर की दुनिया उनके लिए अजनबी थी।
उपन्यास ‘सैटनटैंगो’ में हंगरी की स्थिति
1956 के हंगेरियन आंदोलन के कुछ पहले लाजलो का जन्म हुआ। लेकिन हंगरी अत्याचार से मुक्त न हुआ भले ही स्टालिन की क्रूरता से छुटकारा मिला। हताशा, सर्वनाश, नास्तिवाद, अराजकता आदि इनके मुख्य कथानक हैं। लाजलो के पहले उपन्यास ‘सैटनटैंगो’ में यह देखा जा सकता है।
इसी पर बेला टार ने फिल्म बनाई है। परदे पर उजाड़ स्थान में कागज उड़ते देखना बर्बादी को देखना है। बस यहां कुछ होने का इंतजार है। तकनीक विशेषताओं से लैस फिल्म में क्रूरता है, तनाव है। इस फिल्म को देखना एक चुनौती है।
नोबेल पुरस्कार समिति के कुछ सदस्य बहुभाषी हैं, अत: हंगरी जैसी भाषा बिना अनुवाद के उन तक नहीं पहुंच सकती है। लाजलो के कार्य का कई भाषा में अनुवाद हुआ है। वे अपने अनुवादकों के साथ मिल कर काम करते हैं। उनके कई कार्य का इंग्लिश अनुवाद जॉर्ज सियरटिस (George Szirtes) ने किया है।
जॉर्ज के अनुसार क्रासनाहोरकाई का प्रमुख सार है, कुचक्र, अपराध, बेवफाई, भाग निकलने की आशा और सबसे ऊपर विश्वास एवं निरंतर विश्वासघात। उनके अनुसार ‘सैटनटैंगो’ के केंद्र में शराब पीकर किया गया शैतान का नृत्य है, कभी टैंगो के संदर्भ में, कभी चारडास (हंगेरियन नृत्य) के रूप में है।
यह स्थानीय सराय में चल रहा है, जहां पीकर सब धुत हैं।... ब्रह्मांड के नगण्य, छोटे-से किसी कोने में, कॉमिक तथा ट्रैजिक के बीच खोई हुई, उनकी दुनिया रुखड़ी है। यहां मृत्यु का नृत्य है।’
पूर्व की संस्कृति से प्रभावित लाज्लो बुद्ध एवं लाओत्से को याद करते हैं, वे कई बार जापान गए हैं, भारत आना चाहते थे, सत्ता से इसकी अनुमति नहीं मिली। उनका ‘द मेलनकली ऑफ़ रेजिस्टेंस’, ‘वारएंड वार’, ‘एनिमलइनसाइड’, ‘डिस्ट्रक्शन एंड सोरो बिनीथ द हेवन’, ‘द लास्ट वुल्फ़ एंड हर्मन’, ‘द वर्ल्ड गोज ऑन’, ‘स्पेडवर्क फ़ॉर ए पैलस: एंटरिंग द मैडनेस ऑफ अदर्स’, ‘ए माउंटेन टू द नॉर्थ, ए लेक टू द साउथ, पाथ्स टू द वेस्ट, ए रिवर टू दि ईस्ट’, ‘हर्स्ट 07769’ आदि कार्य इंग्लिश में उपलब्ध है।
‘मेरे काम को अब केवल ईश्वर समझता है’ कहने वाले नोबेल पुरस्कृत लाजलो क्रासनाहोरकाई के जटिल काम को ईश्वर की भांति समझने की कोशिश कर रही हूं।
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