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क्या बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं में कमी ला पाएगा मोटर वाहन संशोधन विधेयक?

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16 जुलाई को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया है। - फोटो : अमर उजाला
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लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और उनके परिणामस्वरूप होने वाली मौतों को रोकने के लिए, सरकार ने सोमवार 16 जुलाई को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया।

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विधेयक का मुख्य उद्देश्य वाहन अधिनियम के नियमों को कड़ा बनाना तथा इसके लिए केंद्र सरकार को अधिक अधिकार देना है, साथ ही, इसमें उन तमाम पहलुओं को भी समेटा गया है जिनकी वजह से सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है जैसे कि घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदार और निम्नस्तरीय कलपुर्जे प्रयोग करने वाले वाहन निर्माता। 

सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं 
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं भारत में होती हैं। यहां तक कि सर्वाधिक आबादी वाला देश चीन भी इस मामले में हमसे पीछे है।
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इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि सड़क सुरक्षा कानूनों को सही नीयत से लागू कर लाखों लोगों की जान बचाई  जा सकती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2017 की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें 1 लाख से ज्यादा लोग बेमौत मारे जाते हैं।

इस विधेयक में सरकार ने इन सभी कारणों को ध्यान में रख कर कठोर प्रावधान  किए हैं। - फोटो : अमर उजाला

इतनी बड़ी संख्या में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निस्संदेह हमें सख्त कानूनी प्रावधान करने की जरूरत है। सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में अनाड़ी या नौसिखिए ड्राइवर, लापरवाही या शराब पी कर गाड़ी चलाना, घटिया सड़कें और गाड़ी में खराबी शामिल हैं। इस विधेयक में सरकार ने इन सभी कारणों को ध्यान में रख कर कठोर प्रावधान  किए हैं।

क्यों खास है मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक
भारत जैसे देश में जहां लाइसेंस बेहद आसानी से बन जाते हैं और सड़कों पर गलती करने वाले लोगों को जुर्माने का भय भी नहीं रह गया है, हमें न सिर्फ कठोर कानून की जरूरत है बल्कि उसे कठोरता से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक में सरकार ने ऐसे ही कड़े प्रावधान किये हैं।

विधेयक में नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर सजा के साथ-साथ सड़क के निर्माण और उनके रखरखाव में कमी के चलते होने वाली दुर्घटनाओं के लिए संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ भी ज़ुर्माने का प्रावधान किया गया है. यह पहला अवसर है जबकि सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े ठेकेदारों को भी सड़कों की घटिया क्वालिटी के चलते होने वाली दुर्घटनाओं में दोषी घोषित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

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शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माना 2000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए किया गया है। - फोटो : अमर उजाला

नए विधेयक में कहां बढ़ाया गया है जुर्माना?  
इस विधेयक में कानून को सशक्त ढंग से लागू करने के लिए भारी जुर्माने की व्यवस्था है। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माना 2000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए करने की सिफारिश की गई है, वही अब बिना हेलमेट वाहन चलाने पर  1,000 रुपये का ज़ुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस ज़ब्त करने का प्रावधान है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर 5,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक में एक और महत्वपूर्ण पहलू को भी शामिल किया गया है। हमारे देश में अक्सर भारी- भरकम ट्रैफिक में आपातकालीन वाहनों को भी बमुश्किल रास्ता मिल पाता है जिससे कई बार मरीज़ों को जरूरी मेडिकल सेवाएं समय पर नहीं मिल पातीं। आपातकालीन सेवारत् वाहन को रास्ता नहीं देने पर 10,000 रुपये के ज़ुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इस बिल में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि कोई नाबालिग गाड़ी न चलाए और अगर कोई ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके अभिभावक या गाड़ी के मालिक को दोषी माना जाएगा। इसके लिए 25,000 रुपये के ज़ुर्माने के साथ-साथ 3 साल की जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द करने की व्यवस्था है। 

आज के समय की मांग के अनुरूप आए इस बिल को जल्द से जल्द पारित कर लागू किया जाना चाहिए ताकि देश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। इस नये कानून में, नियमों के उल्लंघन की स्थिति में भारी  जुर्माने और कड़ी सजा के प्रावधान के चलते लोग सड़क कानूनों को गंभीरता से लेने को मजबूर होंगे। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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