शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल के सीएम
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बंगाल की डबल इंजन सरकार अब विकास की पटरी पर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ रही है। राज्य सरकार में मुख्यमंत्री सहित अभी केवल छह सदस्य हैं, लेकिन सरकार की कार्यशैली और निर्णय लेने की गति ने राजनीतिक गलियारों में अलग ही संदेश दिया है।
बंगाल सरकार अभी अपने शुरुआती चरण में है और तीन सप्ताह भी नहीं हुए हैं, लेकिन फैसलों की गति और प्रशासनिक सक्रियता ने यह संकेत जरूर दिया है कि बंगाल की राजनीति और विकास मॉडल दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
वर्षों से लंबित केंद्रीय योजनाओं को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों से रुकी परियोजनाओं की सूची मांगी गई है, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
ताबड़तोड़ फैसले और सीएम का सिंघम स्टाइल
- बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए बीएसएफ को जमीन हस्तांतरण - सीमा सुरक्षा मजबूत करने हेतु बड़ा फैसला लिया गया।
- चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इस संवेदनशील इलाके की करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला।
- गौवंश की बलि पर पूर्ण प्रतिबंध और साथ ही अन्य पशुओं के वध के लिए अब फिटनेस अथवा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है। कलकत्ता हाइकोर्ट का भी राज्य सरकार के इस नए आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार।
- आरजीकर लेडी डॉक्टर रेप एंड मर्डर केस की फाइल फिर से खोलना। तीन आईपीएस अधिकारियों के सस्पेंड होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई की नई टीम को जांच का आदेश।
- तृणमूल सरकार के दौरान राजनीतिक हिंसा पीड़ित परिवारों के समर्थन और साथ खड़े होने का आश्वासन देते हुए सरकारी नौकरी देने की घोषणा।
- राज्य में जनगणना प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी - प्रशासनिक और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया।
- भ्रष्टाचार मामलों में सीबीआई कार्रवाई को अनुमति - शिक्षक भर्ती, नगरपालिका और सहकारी घोटालों में अभियोजन की मंजूरी दी गई।
सरकार के इन निर्णयों पर भी करें गौर
- महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर बड़ा फैसला। मासिक आर्थिक सहायता योजना के तहत लखी भंडार/अन्नपूर्णा योजना को बढ़ी हुई राशि के साथ 1 जून से शुरू करने की घोषणा।
- आयुष्मान भारत योजना लागू करने का निर्णय - लंबे समय से रुकी केंद्रीय स्वास्थ्य योजना को बंगाल में लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
- ₹5 में मछली भात योजना - गरीब और श्रमिक वर्ग के लिए सस्ती भोजन योजना की घोषणा।
- स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानों पर रोक - सामाजिक वातावरण सुधारने के उद्देश्य से निर्णय लिया गया।
- आयुष विभाग को अलग प्रशासनिक पहचान - आयुष सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से अलग करने का फैसला।
- पीएम विश्वकर्मा योजना का बंगाल में विस्तार - कारीगरों और पारंपरिक श्रमिकों के लिए केंद्र की योजना लागू करने की प्रक्रिया तेज की गई।
- प्रशासनिक बैठकों में विपक्षी दलों के सांसद और विधायकों को आमंत्रित करना। विकास से कोई इलाका अछूता नहीं रह पाए।
बहरहाल, बंगाल सरकार और भाजपा नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि डबल इंजन सरकार का अर्थ विकास की दोगुनी रफ्तार और योजनाओं के तेज क्रियान्वयन से है। पीएम मोदी, गृह मंत्री शाह, मुख्यमंत्री शुभेंदु और अन्य नेताओं ने भी बंगाल में तेज विकास, बेहतर कानून व्यवस्था और निवेश बढ़ाने का दावा किया है।
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