फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Neet UG Paper Leak 2026: छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल !

सार

नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य पर पड़े इस संकट ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करने का काम किया है। 
विज्ञापन
Neet UG Paper Leak - फोटो : AI Generated
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक और काला अध्याय जुड़ गया है। 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा, जिसमें देशभर के लगभग 22.8 लाख छात्र-छात्राओं ने मेडिकल की दौड़ में अपनी किस्मत आजमाई, मात्र नौ दिन बाद रद्द कर दी गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने 12 मई को यह फैसला लिया, क्योंकि एक ‘गेस पेपर’ या हस्तलिखित शीट व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर घूम रही थी, जिसमें करीब 120-140 सवाल असली पेपर से मैच कर गए।
विज्ञापन


राजस्थान एसओजी की जांच शुरू हुई तो पता चला कि यह लीक पूरे देश में फैल गई थी। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है, गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और दोबारा परीक्षा की तारीख सात-दस दिन में घोषित होने वाली है। लेकिन इस एक फैसले से लाखों युवाओं का एक साल बर्बाद हो गया।

यह पहली बार नहीं है। 2024 में भी नीट-यूजी पेपर लीक का घोटाला पूरे देश को हिला गया था। बिहार और झारखंड में स्कूलों से पेपर चोरी कर फोटो खींचा गया, सॉल्वर गैंग सक्रिय थे, सीबीआई जांच हुई, 155 छात्रों को फायदा पहुंचा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उस समय एनटीए के डायरेक्टर जनरल को हटाया गया, लेकिन सुधार नहीं दिखाई दिया।
विज्ञापन


2024 में यूजीसी-नेट भी रद्द हुआ। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती, रीट, बीपीएससी—देश में पिछले दस साल में 89 से ज्यादा बड़े पेपर लीक हो चुके हैं। मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला तो अब भी यादों में ताजा है। पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 बना, लेकिन लीक रुकने का नाम नहीं ले रहा। क्योंकि सिस्टम में भ्रष्टाचार जड़ पकड़ चुका है।

छात्रों पर इसका असर कितना गहरा है, यह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नीट की तैयारी करने वाला 17-18 साल का बच्चा दो साल तक दिन-रात पढ़ता है। कोचिंग, मॉक टेस्ट, नींद की कुर्बानी, परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाए तो भी मां-बाप उधार लेकर बच्चे का सपना पूरा करने की कोशिश करते हैं। फिर एक रात पहले पेपर लीक हो जाए, गेस पेपर वायरल हो जाए और पूरा साल बर्बाद। ऐसे में मानसिक तनाव चरम पर पहुंच जाता है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहाँ बच्चे रो रहे हैं और सवाल यूटा रहे हैं कि, “हमने क्या गलती की?” कुछ के माता-पिता ने साल भर का खर्चा कर दिया, ट्रैवल, होटल, किताबें आदि, लेकिन सब व्यर्थ। दोबारा परीक्षा का मतलब दोबारा तैयारी, दोबारा खर्चा, दोबारा अनिश्चितता। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र तो और भी बुरी हालत में हैं। उनके पास न कोचिंग है, न डिजिटल संसाधन। वे तो सिर्फ मेहनत पर भरोसा करते थे। अब उनका वह भरोसा टूट गया।
विज्ञापन

NEET UG 2026 - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
ऐसे में सवाल उठता है कि इसका जिम्मेदार कौन? एनटीए, 2018 से परीक्षाएं आयोजित कर रही है, लेकिन हर साल कोई न कोई विवाद खड़ा हो ही जाता है। सरकार की भी जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि एनटीए शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। 2024 के बाद भी सुधार नहीं हुए। पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट लागू होने के बावजूद लीक जारी। विपक्ष की माँग है कि, एनटीए को भंग कर दो, परीक्षाएं विकेंद्रीकृत करो।

पहले बोर्ड और यूनिवर्सिटी खुद परीक्षाएं लेती थीं, अब एक केंद्रीय एजेंसी पर सब कुछ निर्भर है। परिणाम? एक लीक पूरे देश को प्रभावित कर देता है। ऐसे में क्या भ्रष्टाचार का नेटवर्क, कोचिंग माफिया, सॉल्वर गैंग, सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है? देखना यह होगा कि सीबीआई जांच करेगी, लेकिन जड़ तक पहुंचेगी या सिर्फ कुछ गिरफ्तारियां होंगी?

ऐसे में क्या इसका कोई समाधान है? सरकार चाहे तो सबसे पहले लीक की जड़ें उखाड़े। जैसे कि डिजिटल लॉक, ब्लॉकचेन तकनीक, हर केंद्र पर सीसीटीवी, रैंडमाइज्ड प्रश्न बैंक आदि। एनटीए में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। हर लीक पर डायरेक्टर जनरल को ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

परीक्षाएं कई चरणों में हों, ताकि एक लीक पूरी परीक्षा को प्रभावित न करे। कोचिंग उद्योग पर लगाम लगे, जहां से अक्सर लीक की शुरुआत होती है। लेकिन सबसे जरूरी, सरकार को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी। छात्रों को मुआवजा दिया जाए, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की जाए, फीस रिफंड हो, जैसे कड़े कदम उठाए जाएं।

नीट 2026 का लीक सिर्फ एक घटना नहीं, सिस्टम की विफलता है। लाखों छात्र जिन्होंने रात-रात भर जागकर सपने सजाए, आज बेरोजगार नहीं, बल्कि बेवजह की अनिश्चितता का शिकार हैं। अगर अभी सुधार नहीं हुए तो आने वाले वर्षों में युवा विद्रोह और गहरा होगा। सरकार, एनटीए और समाज, सबको समझना होगा कि परीक्षा सिर्फ पेपर नहीं, लाखों सपनों का आधार है। इन्हें तोड़ने का हक किसी को नहीं। समय आ गया है कि हम ‘परीक्षा सुधार’ की बातें छोड़कर ‘परीक्षा क्रांति’ लाएं। अन्यथा, हर साल एक नया लीक, हर साल नए आंसू और हर साल बर्बाद भविष्य।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें