हमारी तरफ बढ़ता चला आ रहा था एक एलीफैंट बुल।
- फोटो : एल सी सिंह
हमने अपनी गाड़ी पार्क के सबसे नजदीकी निकास की तरफ मोड़ ली। मेरे दामाद विकास गाड़ी चला रहे थे और मैं उनके बगल में था। अपने निकॉन डी4 कैमरे पर 70-200 का लेंस चढ़ाए हुए, इस बात से पूरी तरह अनजान कि हमारे सामने अभी क्या होने वाला है।
हम अपने लिए अनुकूल निकास द्वार की तरफ बढ़ ही रहे थे कि हमने एक बात नोटिस की। सामने से कोई वाहन आ ही नहीं रहा था। ये थोड़ा अस्वाभाविक था। हालांकि, जल्द ही इसकी वजह भी हमारे सामने थी।
हमारी तरफ बढ़ता चला आ रहा था एक एलीफैंट बुल, सड़क के बीचोबीच चलते हुए और उसके पीछे चल रहा था सैकड़ों कारों का एक काफिला। हमने पीछे मुड़कर देखा तो हमारे पीछे भी वाहनों की कतार चल रही थी।
एक फोटोग्राफर के तौर पर मेरे लिए ये दिल खुश कर देने वाला दृश्य था, लेकिन दूसरों की तो सांस अटक गई थी। अब ये बुल हमसे सिर्फ 20 फीट की दूरी पर था। उसे इस बात का पूरा एहसास था कि वह क्या कर रहा है। जब एक फॉरेस्ट रेंजर की गाड़ी ने उसके बगल से निकले की कोशिश की तो वह जान बूझकर उसी तरफ घूमा और गाड़ी के आगे निकलने का रास्ता बंद हो गया।
दोनों तरफ वाहनों की कतार लंबी होती जा ही है और सैकड़ों वाहन व उनके भीतर बैठी सवारियों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था।
- फोटो : एल सी सिंह
दोनों तरफ वाहनों की कतार लंबी होती जा ही है और सैकड़ों वाहन व उनके भीतर बैठी सवारियों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था। यहां उस दिन की जो तस्वीरें मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं, उसमें आपको इसके आसपास खूब हरियाली भी दिख रही है, लेकिन उसे इससे कोई मतलब नहीं। वह तो हमारे भय और अपनी दबंगई पर खुश हो रहा था।
उस दिन हम कोई पांच किमी. रिवर्स गीयर में गाड़ी डालकर चलते रहे और इस बुल ने हमारे ऊपर अपनी दबंगई और धमकी का पूरा दबाव बनाकर रखा। आखिरकार हमें एक छोटी सी सड़क इस रास्ते से मुड़ती दिखाई दी और हम लोग उससे होकर दूसरे निकास द्वार की तरफ चले गए।
इस बात को कुछ साल हो गए हैं लेकिन जब भी मैं इस दिन के बारे में और इन हालात के बारे में सोचता हूं तो सिहर जाता हूं।
( लेखक एल सी सिंह, अंतर्राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी निहिलेंट के कार्यकारी उपाध्यक्ष और शौकिया फोटोग्राफर हैं.)
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