सरकार द्वारा निर्मित यह देश का पहला और सबसे बड़ा सैन्य स्मारक है।
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में इसी इंडिया गेट के पास बना नेशनल वॉर मेमोरियल एक स्मारक जो की स्वतंत्रता से लेकर अब तक की लड़ाइयों में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है, और इसे राष्ट्रीय समर स्मारक यानी नेशनल वॉर मेमोरियल के नाम से जाना जाता है। इस स्मारक को इंडिया गेट के पास मौजूदा छतरी (चंदवा) के आसपास बनाया गया है।
स्मारक की दीवार को जमीन के साथ और मौजूदा सौंदर्यशास्त्र के साथ सामंजस्य स्थापित किया है। 1947-48, 1961 (गोवा), 1962 (चीन), 1965, 1971, 1987 (सियाचिन), 1987-88 (श्रीलंका), 1999 (कारगिल) और युद्ध रक्षक जैसे अन्य युद्धों में शहीदों के नाम इस प्रकार आजादी के बाद शहीद हुए 133300 भारतीय सैनिकों के नाम यहां पत्थरों पर लिखे गए हैं।
1960 में सशस्त्र बलों ने पहली बार एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का प्रस्ताव रखा था। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का मुख्य वास्तुकार वीबी डिजाइन लैब चेन्नई के योगेश चंद्रहासन है। वेब डिजाइन लैब को वास्तुशिल्प डिजाइन की अवधारणा के लिए और परियोजना के निर्माण के समन्वय के लिए चुना गया था।
इस हेतु एक वैश्विक डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी और परिणाम अप्रैल 2016 की शुरुआत में घोषित किया गया था और चेन्नई स्थित आर्किटेक्ट्स, वीबी डिजाइन लैब के प्रस्ताव को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लिए विजेता घोषित किया गया था।
राष्ट्रीय समर स्मारक के बारे में परिकल्पना तो वर्ष 1960 में ही की जा चुकी थी लेकिन विभिन्न कारणों के चलते इसका निर्माण टलता जा रहा था। आखिर वर्ष 2015 में भारत सरकार ने स्मारक के निर्माण को हरी झंडी दिखा दी।
वर्ष 2016 सरकार ने वॉर मेमोरियल के डिजाइन को लेकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसे नाम दिया गया ”ग्लोबल डिज़ाइन कम्पटीशन फॉर नेशनल वॉर मेमोरियल ”। इस प्रतियोगिता में मुंबई के स्टूडियो के डिज़ाइन को सबसे अधिक पसंद किया गया और उसी डिज़ाइन के आधार पर राष्ट्रीय समर स्मारक का निर्माण आरंभ हुआ।
एक लंबे इंतजार के बाद आखिर 1 जनवरी 2019 को स्मारक का निर्माण संपन्न हुआ और 25 फरवरी 2019 के दिन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा राष्ट्रीय समर स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया गया। सरकार द्वारा निर्मित यह देश का पहला और सबसे बड़ा सैन्य स्मारक है।
सरकार द्वारा निर्मित इसलिए कहा क्योंकि चंडीगढ़ में भी एक सैन्य स्मारक है जो की आम जनता के सहयोग से बना है। यहां उन 25942 सैनिकों को सम्मान दिया गया है जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण त्याग दिए। चक्रव्यूह रचना से प्रेरणा लेते हुए, 40 एकड़ के क्षेत्र में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया।
स्मारक के केंद्र में एक स्तंभ है जिसमें अमर जवान ज्योति हमेशा प्रज्वलित रहती है। इस स्तंभ का निर्माण अशोक स्तंभ की शैली में किया गया है और इसके शीर्ष पर अशोक चक्र की स्थापना की गई है।
राष्ट्रीय समर स्मारक इंडिया गेट के पीछे है।
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इस स्मारक के ले आउट में एक के बाद एक चार चक्र बनाए गए हैं- जिनमे पहला चक्र ‘अमर चक्र’, दूसरा चक्र ‘वीरता चक्र’, तीसरा चक्र ‘त्याग चक्र’ और चौथा चक्र ‘रक्षक चक्र’ है। प्रसिद्ध मूर्तिकार श्री राम सुतार द्वारा कांस्य निर्मित छह भित्ति चित्र यहां वीरता चक्र की गैलरी में लगाए गए हैं जो कि अब तक लड़ी गई छह प्रमुख लड़ाइयों को दर्शाते हैं।
इसी तरह, 25942 शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए चक्रव्यूह शैली में छह दीवारों का निर्माण किया गया है जिन पर लगे ग्रेनाइट पर उन शहीदों के नाम लिखे गए हैं। इनके नाम के साथ-साथ इनका पद और रेजिमेंट भी दर्शाया गया है।
सबसे बाहरी चक्र अथार्त रक्षक चक्र में 600 से अधिक घने वृक्षों की पंक्तियां हैं, जो देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने वाले सैनिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं। मुख्य परिसर के अलावा इंडिया गेट के सी-हेक्सागन क्षेत्र के उत्तरी किनारे पर एक परम योद्धा स्थल पार्क भी बनाया गया है।
इस पार्क में 21 परमवीर चक्र विजेताओं की कांस्य प्रतिमाएं लगी हुई हैं। यहां उन सैनिकों को भी सम्मान दिया गया है जिहोने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में अपने प्राण गंवा दिए।
राष्ट्रीय समर स्मारक इंडिया गेट के पीछे है। अतः यहां पहुंचना आसान है। नजदीकी मेट्रो स्टेशन केंद्रीय सचिवालय है, जिसके गेट नंबर तीन से बाहर आकर आप ऑटो द्वारा इंडिया गेट पहुंच सकते हैं। वैसे मेट्रो स्टेशन से दूरी मात्र 2 किलोमीटर ही है। इसलिए आप पैदल भी राजपथ पर सैर करते हुए जा सकते हैं।
इसको देखने के बाद एक ही बात मन में आती है, 'घर जाकर बताना कि उनके सुनहरे कल के लिए हमने आज अपना बलिदान दे दिया।' वीरों के बलिदान के सामने तो ब्रह्मांड नतमस्तक है, हमें उनकी यादों को कभी भूलना नहीं चाहिए और उनके परिवार का देवी-देवताओं से भी बढ़कर मान-सम्मान और हर समय सहयोग करना चाहिए, हम उन वीरों के उस ऋण के कर्जदार है जो कभी चुकाया नहीं जा सकता-
आज वतन के वासियों, कर लें उनका ध्यान !
शान देश की जो बने, देकर अपनी जान !!
दिल्ली में बने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का यही संदेश है। इस संदेश को हर पल हमें याद रखना है और हर क्षण आगे पहुंचाना है।
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