फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एआई को हथियार बनने से रोकना होगा: गलत अनुरोधों को अस्वीकार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन गारंटी नहीं

Sun, 13 Sep 2026 10:37 AM IST
ज्योति भास्कर ब्रेट जे गोल्डस्टीन, द न्यूयॉर्क टाइम्स।

सार

एआई को खतरनाक या गलत अनुरोधों को अस्वीकार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, पर वह ऐसा करेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।
विज्ञापन
एआई को लेकर सरकारों को भी पर्याप्त तकनीकी समझ हासिल करनी होगी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर आज की सबसे गंभीर बहस शायद यह नहीं है कि यह कितना सक्षम हो सकता है, बल्कि यह है कि किस बिंदु पर कोई एआई मॉडल इतना शक्तिशाली और खतरनाक हो जाता है कि उसे सार्वजनिक रूप से जारी करना सुरक्षित नहीं रह जाता।

विज्ञापन


यह सवाल हाल की एक घटना के बाद और गंभीर हो गया है। ओपनएआई के दो मॉडल साइबर-सिक्योरिटी परीक्षण के दौरान उस सुरक्षित वातावरण से बाहर निकल गए, जिसमें उन्हें सीमित रखा गया था। उन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल किया और ऑनलाइन एआई प्लेटफॉर्म हगिंग फेस के सर्वर तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन मॉडलों ने कुछ दूसरी सार्वजनिक सेवाओं के अकाउंट्स तक पहुंचने की कोशिश भी की थी।

यह घटना इसलिए डरावनी है, क्योंकि एआई मॉडल को जिस ‘पिंजरे’ में रखकर उसकी क्षमताओं का परीक्षण किया जा रहा था, वह पिंजरा पर्याप्त मजबूत नहीं था। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि जिन पर एआई के खतरों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी है, वे अभी तक यह तय ही नहीं कर पाए हैं कि असली खतरा आखिर शुरू कहां होता है। सरकारें मान रही हैं कि टेक कंपनियां सुरक्षा संभाल लेंगी। वहीं, टेक कंपनियां मानती हैं कि सरकारें नियम बनाएंगी। इसलिए, कंपनियों को एक निश्चित बिंदु के बाद यह स्वीकार करना होगा कि वे सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बना रहीं। वे ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं, जो कुछ परिस्थितियों में हथियार की तरह काम कर सकते हैं। सरकारों को भी पर्याप्त तकनीकी समझ हासिल करनी होगी, क्योंकि जिस चीज को सरकार समझती ही नहीं, उसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित भी नहीं कर सकती।
विज्ञापन


शीत युद्ध के दौरान दुनिया कई बार परमाणु विनाश के बेहद करीब पहुंची। फिर भी, परमाणु हथियारों का होना और उनका इस्तेमाल करना दो अलग-अलग बातें रहीं। देशों ने संयम बरता, क्योंकि उनके पास हथियारों के इस्तेमाल पर नियंत्रण था। एआई इस अंतर को धुंधला कर देता है। एआई ऐसा ‘हथियार’ हो सकता है, जो खुद अपनी रणनीति बदल सकता है, परिस्थितियों के अनुसार नए रास्ते खोज सकता है और ऐसे कदम उठा सकता है, जिनकी उसके निर्माता ने कल्पना तक न की हो। यदि कोई शक्तिशाली मॉडल सार्वजनिक कर दिया जाता है, तो उसके बाद यह उम्मीद करना कि हर उपयोगकर्ता जिम्मेदारी और संयम से उसका इस्तेमाल करेगा, खतरनाक सोच होगी। संयम के लिए मालिक जरूरी होता है, लेकिन जो मॉडल पूरी दुनिया के लिए उपलब्ध हो, उसका कोई एक मालिक नहीं होता।

बेशक कई एआई मॉडलों को खतरनाक या गलत अनुरोधों को अस्वीकार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन वह ऐसा करेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। साइबर सुरक्षा का सिद्धांत है कि पर्याप्त समय, संसाधन और विशेषज्ञता मिलने पर किसी भी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है। इसलिए, असली सुरक्षा मॉडल के सुरक्षा कवच में नहीं, बल्कि मॉडल को सार्वजनिक करने के फैसले में होनी चाहिए। क्योंकि, एक बार मॉडल सार्वजनिक हो गया, तो उसे कोई भी हासिल कर सकता है। उसके बाद उसे वापस लेना लगभग असंभव है।

यही सबसे बड़ी विडंबना है। मिसाइल दागने वाला सैन्य अधिकारी जानता है कि उसने एक हथियार का इस्तेमाल किया है। लेकिन, मॉडल को सार्वजनिक करने वाला इंजीनियर शायद यही समझता है कि वह सिर्फ एक नया उत्पाद जारी कर रहा है। इसी अंतर को खत्म करना होगा। किसी शक्तिशाली मॉडल को सार्वजनिक करने से पहले उसके डेवलपर को यह जांचना चाहिए कि सुरक्षा उपाय हटा दिए जाएं, तो वह सबसे खराब स्थिति में क्या कर सकता है। इसके लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा कठोर परीक्षण होने चाहिए और जो मॉडल निर्धारित सीमा से आगे निकल जाएं, उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

चेतावनी मिल चुकी है। अगली बार कोई मॉडल सुरक्षित घेरे से बाहर निकले, तो संभव है कि हमें पता ही न चले। इसलिए, कार्रवाई का सही समय मॉडल के दुनिया में आने के बाद नहीं, उससे पहले है, क्योंकि एक बार शक्तिशाली एआई सार्वजनिक हो गया, तो उसे वापस लेने का बटन शायद हमारे पास हो ही न।

एआई अप्लाई
यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म है, जो नौकरी खोजने और उसके लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया को आसान व तेज बनाता है। इसकी मदद से योग्यता, कार्य अनुभव, कौशल और कॅरिअर से जुड़ी जानकारी को समझकर उपयुक्त नौकरी के अवसर तलाशने में मदद मिलती है। जब उपयोगकर्ता किसी नौकरी की जानकारी या उसका विवरण एआईअप्लाई को देता है, तो यह उसे ध्यान से पढ़कर समझता है। इसके बाद यह बायोडाटा और आवेदन से जुड़ी अन्य सामग्री को नौकरी के अनुसार बेहतर तरीके से तैयार करता है। यूजर की ओर से नौकरी के आवेदन जमा करने की इसकी क्षमता इसे खास बनाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें