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मांसपेशियों की अपनी खास ‘मेमोरी’ होती है, सोचिए कुछ काम आप बगैर सोचे-समझे कैसे कर लेते हैं?

Sun, 10 May 2026 08:00 AM IST
Pavan सीलिया हैरिस

सार

मांसपेशियों की अपनी खास ‘मेमोरी’ होती है, जिसे ‘मसल मेमोरी’ कहते हैं। वह दरअसल मांसपेशियों में संचित वे यादें हैं, जो बार-बार दोहराए जाने के कारण दिमाग से अलग भी सक्रिय रहती हैं।
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मांसपेशियों की अपनी खास ‘मेमोरी’ होती है - फोटो : Freepik
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विस्तार
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कभी आपने सोचा है कि कुछ काम आप बगैर सोचे-समझे कैसे कर लेते हैं? जब आप साइकिल या कोई अन्य वाहन चलाना सीखते हैं, तो शुरुआत में तो आप संभल कर चलाते हैं, पर कुछ समय बाद जब आप इसमें प्रवीण हो जाते हैं, तब आपको अधिक दिमाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी तरह, कोई वाद्ययंत्र बजाना या फिर जूतों के फीते बांधना भी ऐसे ही काम हैं, जो बगैर दिमाग खर्च किए होते चले जाते हैं।
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दरअसल, इस तरह के काम ‘मसल मेमोरी’ से जुड़े होते हैं, जो उन कामों या कौशल से संबंधित हैं, जिन्हें हम बिना ज्यादा सोचे-समझे करते हैं। तो क्या मांसपेशियों में सचमुच कोई याददाश्त होती है और इसमें दिमाग की क्या भूमिका होती है? इसके पीछे भी विज्ञान काम करता है। वैज्ञानिक ऐसी याददाश्त को ‘मसल मेमोरी’ के बजाय ‘प्रोसीजरल मेमोरी’ कहते हैं। हमेशा न सही, पर प्रोसीजरल मेमोरी में हमारे दिमाग के साथ-साथ मांसपेशियां भी शामिल होती हैं। शोध के अनुसार, ट्रेनिंग मांसपेशियों के विकास को तेज कर सकती है। ऐसा मांसपेशियों की कोशिकाओं के काम करने के तरीके या उनकी बनावट को बदलकर होता है। हालांकि, वैज्ञानिकों को अभी भी ठीक-ठीक नहीं पता कि यह सब कैसे काम करता है, पर ऐसा लगता है कि ये बदलाव मांसपेशियों को दिमाग की तरह यादें या जानकारी संजोने की अनुमति नहीं देते हैं।

प्रोसीजरल मेमोरी ऐसी याददाश्त है, जो शब्दों के बजाय कामों पर आधारित होती है। यानी इसके जरिये आप जो हुनर सीखते हैं, उन्हें दूसरों के साथ साझा करना मुश्किल हो सकता है। जैसे, मान लीजिए कि आप किसी बच्चे को बाइक चलाना सिखा रहे हैं। अगर आप खुद बाइक पर बैठते हैं, तो सही समय पर हैंडलबार पकड़ना, बाइक पर चढ़ना, पैडल मारना आसान होता है। पर दूसरे व्यक्ति को यह प्रक्रिया समझाना मुश्किल होता है, खासकर तब, जब आप सिर्फ शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। शोध बताते हैं कि जब हम कोई नया हुनर सीखते हैं, तो शुरू में उसमें बहुत ज्यादा मेहनत लगती है। समय के साथ, ये हुनर काफी स्वाभाविक हो जाते हैं और  शायद ही कुछ सोचते हैं, क्योंकि आप ऐसे काम कर रहे होते हैं, जिन्हें पहले भी कई बार कर चुके हैं।
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प्रोसीजरल मेमोरी उन लोगों की भी मदद कर सकती है, जिन्हें संज्ञानात्मक समस्याएं हैं, ताकि वे नए कौशल सीख सकें और पुराने कौशल को भी याद रख सकें। प्रोसीजरल मेमोरी को बेहतर बनाने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन आप जो भी नई चीज सीखते हैं, वह आपके जीवन को समृद्ध बनाती है। - साथ में जस्टिन क्रिस्टेंसन।
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