सोशल मीडिया पर इन दिनों पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक रेगिस्तानी गांव की बेटी मूमल मेहर सुर्खियां बटोर रही है। मूमल का एक वीडियो जमकर शेयर किया जा रहा है, जिसमें वह नंगे पैर क्रिकेट खेलती और चौक्के-छक्के लगाती नजर आ रही है। जबरदस्त शॉट लगा रही मूमल का यह वीडियो क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने भी ट्वीट किया और लिखा- उन्हें बच्ची की बैटिंग देखकर वाकई मजा आया।
दो दिन पहले जैसे ही मूमल का वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से लेकर केंद्र सरकार में मंत्री कैलाश चौधरी, जो बाड़मेर से सांसद भी हैं, दिल्ली की महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल, भाजपा के पाली सांसद पीपी चौधरी समेत अनेक नेताओं ने मूमल का वीडियो शेयर किया। यहां तक की सतीश पूनिया ने फोन पर मूमल से बातचीत की और उसे यह तक वादा कर दिया कि क्रिकेट पिच सहित विभिन्न संसाधनों को लेकर वह विधानसभा में मांग उठाएंगे। जितनी हो सके, उसकी मदद करेंगे। सतीश पूनिया ने क्रिकेट किट भी मूमल के लिए भिजवाया।
मूमल को भी अब राहुल गांधी के ट्वीट का इंतजार है, ताकि उसकी प्रतिभा को भी निखारा जा सके। यदि राहुल गांधी मूमल की मदद की अपील राजस्थान सरकार से करेंगे तो यह निश्चित है कि जो जल्दबाजी भरत सिंह को आगे लाने के लिए राज्य सरकार ने दिखाई थी, वैसा ही कुछ मूमल को भी मिल जाए।
हालांकि, यह देखा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जो भी प्रतिभाएं आगे आती हैं, वह कुछ अंतराल के बाद कहीं खो जाती हैं। उन्हें कुछ दिन की तो प्रसिद्धि मिलती है, लेकिन फिर लोग उन्हें भूला देते हैं। मूमल और भरत सिंह जैसी युवा प्रतिभाओं को केवल थोड़े समय के लिए सिर आंखों पर न बिठाएं। ऐसी प्रतिभाओं के उज्जवल भविष्य के लिए खेल संस्थाएं भी आगे आएं और एक दीर्घकालीन योजना बनाई जाए।
सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ियों को भी ऐसी प्रतिभाओं को संवारने में मदद कराने जरूरत है। भारत रत्न तेंदुलकर केवल मूमल के वीडियो को देखकर आनंदित न हों, वो मूमल और उस जैसे दूसरे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के खिलाड़ियों की मदद भी कराएं।
भारतीय क्रिकेटरों पर नजर डालें तो महेंद्र सिंह धोनी, जिनके पिता चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, पृथ्वी शॉ, जिनके पिता परचून की दुकान चलाते थे, झूलन गोस्वामी, जो पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव से आती हैं, रवींद्र जड़ेजा, जिनके पिता चौकीदार थे, उमेश यादव, जिनके पिता कोयला खनन में मजदूर थे, हरभजन सिंह, जिन्होंने ट्रक ड्राइवर बनने की सोची थी, ताकि परिवार की आर्थिक मदद हो सके। ऐसे अनेक उदाहरण हैं।
सही राह और प्रशिक्षण मिले तो क्या पता मूमल कल टीम इंडिया की दूसरी शेफाली वर्मा बन जाए, जिनके नेतृत्व में भारतीय वूमन अंडर-19 टीम ने वर्ल्ड कप जीता है।
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