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Happy Mothers Day 2020 : मम्मी की तिजोरी से बॉयज लॉकर रूम तक…. आपने अपनी मां से क्या सीखा?

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मां के लिए टीनएज बेटा एक चुनौती बन गया है! - फोटो : social media
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वर्ष 2020 तक आते-आते हर मां के लिए टीनएज बेटा एक चुनौती बन गया है पर दोष सिर्फ टीनएज बेटे का नहीं है, उस शाब्दिक, इरोटिक और अश्लील आहार का भी है जो उसे अपने आसपास से मिल रहा है। कॉमेडी शो के अश्लील चुटकुलों से पॉर्न वीडियो तक, कहीं आप ही तो नहीं उसे यह आहार उपलब्ध करवा रहे हैं?  

‘मां, इस एक शब्द को हम दुनिया की सबसे बड़ी और पवित्र दुआओं में शामिल करते हैं। बहुत दैवीय या पारलौकिक ना भी हो, तो भी मां के वजूद से ही बच्चों का वजूद है। भारतीय परंपराओं में कभी न चुकाए जा सकने वाले ऋणों में पहला ऋण मातृ ऋण है।

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इससे आप कभी उऋण नहीं हो सकते। एडॉप्टेशन, सेरोगेसी, आईवीएफ जैसी तकनीक के विकास ने मां होने को और विस्तार दिया है। आंशिक तौर पर ही सही, हम यह कह सकते हैं कि मां को वर्जनाओं से मुक्ति मिली है।

मां होना किसी टैबू में नहीं बंधता, न ही किसी रिश्ते का मोहताज है। नीना गुप्ता, सुष्मिता सेन और एकता कपूर सरीखी नई सदी की मांएं भी उतनी ही सम्माननीय हैं, जितनी पारंपरिक तरीके से शादी करके मां बनने और परवरिश करने वाली मांएं। यह मैं शालीन और सभ्य लोगों की बात कर रही हूं। हमारे समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग मां के मामले में इतना ही शालीन और सभ्य है। 

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किसने दी होगी पहली बार मां की गाली...

स्वादों में सबसे पवित्र मां के हाथ का स्वाद है! - फोटो : pixabay

स्वादों में सबसे पवित्र मां के हाथ का स्वाद है। दुनिया का सारा खजाना भी खाली हो जाए तो भी हम मानते हैं कि मां की तिजोरी में कुछ न कुछ जरूर निकल आएगा। जन्मदिन पर मिली साइकिल हो, पहला स्कूटर, पसंदीदा किताब और झुमके तक कितने ही सपने हैं जो मां की तिजोरी में छुपाकर रखे किसी निधि से हमने पूरे किए।

यह कोई चमत्कार नहीं हैं, बस मैनेजमेंट है। अच्छे दिनों में से कुछ अच्छाई बचाकर बुरे दिनों में उसे परिवार और बच्चों की जरूरत के लिए इस्तेमाल करना। मदर्स डे पर मां को दिए गए हमारे बड़े-बड़े तोहफे भी मां की तिजोरी से निकली उस निधि के सामने फीके हैं।

मां की इस तिजोरी में सिर्फ रुपया, पैसा या स्वाद ही नहीं होता, बल्कि कुछ जरूरी संस्कार भी होते हैं। जिन्हें हर मां अपने बच्चों को सौंपना चाहती हैं।

कोई भी मां अपने बच्चे को यह कायदा नहीं देती कि वह अपनी हम उम्र या अपने से बड़ी उम्र की लड़कियों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार करे। पर मां के लिए बहुत शालीन और बहुत सभ्य रहने वाला समाज अपने साथ की लड़कियों के लिए कैसा हो गया है? 

  • किसने दी होगी पहली बार मां की गाली...

यह बार-बार पूछा जाने वाला अनुत्तरित प्रश्न है- कि मां को इतना सम्मान देने वाली संस्कृति (भारतीय ही नहीं, दुनिया भर की)  ने मां की गाली कब और कैसे ईजाद कर ली। मां से एक नए मनुष्य का जन्मना किन संस्कारों के चलते गाली बना दिया गया।

स्त्री और पुरुष के सनातन, सहमति के संबंध में बलात्कार जैसा जघन्य अपराध कब और कैसे शामिल हो गया? तब और भी जब बलात्कार केवल दैहिक नहीं होते। गालियों के रूप में शाब्दिक बलात्कार का हमारी दुनिया में लंबा इतिहास है और अब तकनीक ने साइबर बलात्कार के दरवाजे खोल दिए हैं।

साइबर बलात्कार का ऐसा ही एक नया उदाहरण है बॉयज लॉकर रूम, जिसने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। 

 
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किशोर वय के ये लड़के आज हर मां के लिए चुनौती बन गए हैं...

बॉयज के लॉकर रूम में महिलाएं सिर्फ सेक्स सिंबल हैं! - फोटो : फाइल फोटो
  • बॉयज लॉकर रूम में मां, बहन और बेटियां 
मामला इंस्टाग्राम का है। यहां कुछ किशोर लड़कों ने ‘बॉयजलॉकररूम’ नाम का एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में 12-13  वर्ष से लेकर 16-17 साल तक की उम्र के लड़के शामिल हैं। यहां वे अपनी सामुहिक बातचीत में न केवल अपने लव और क्रश शेयर कर रहे हैं, बल्कि अपने साथ पढ़ने वाली लड़कियों की न्यूड और एडिटिड फोटो शेयर कर रहे हैं।

मम्मी के हाथ का स्वाद लाजवाब बताने वाले लड़के यहां अपनी टीचरों के लिए भी अश्लील भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बलात्कारी मानसिकता ही है कि बॉयज के लॉकर रूम में महिलाएं सिर्फ सेक्स सिंबल हैं।

वे उनकी फोटो को मनचाहे तरीके से क्रॉप कर रहे हैं और उनके बलात्कार की योजना बना रहे हैं। यह दैहिक बाद में होगा काल्पनिक पहले। इंटरनेट की दुनिया साइबर सेक्स से आगे बढ़कर अब साइबर बलात्कार तक पहुंच गई है। और हम हैरान हैं कि ये हमारे ही बच्चे हैं? 

  • हैरान हैं हर मां

अच्छे घरों के अच्छे बच्चे, जिनकी सेहत की फिक्र में मांएं हर छोटी-बड़ी चीज को सेनिटाइज कर रहीं हैं, उनकी मानसिक सेहत कोरोना से भी बड़े संकट में घिर चुकी है। किशोर वय के ये लड़के आज हर मां के लिए चुनौती बन गए हैं।

वे सोच में पड़ गईं हैं कि कहां चूक हुई? ऐसा कौन सा पक्ष था जिस पर ध्यान देना बाकी रह गया। अच्छी एजुकेशन, अच्छी हेल्थ, अच्छा माहौल…. हर वह चीज जिसे वे अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी मानती हैं, देने की कोशिश कर रहीं हैं।

फिर भी इन बच्चों ने मां की तिजोरी से कुछ नहीं लिया और अपना एक अलग बॉयज लॉकररूम बना लिया। इसके चैट और स्क्रीन शॉट देखकर हमारी पीढ़ी स्तब्ध है। यह पहला मातृ दिवस होगा जब मांएं खुश होने की बजाए अपने टीनएज बच्चों को लेकर इतनी ज्यादा पसोपेश में हैं। एक-दूसरे का बलात्कार करने की योजना बना रही यह पीढ़ी मां की तिजोरी से क्या बस यही सीख पाई? 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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