यदि हमारा मन लगातार गुस्से, उदासी, भ्रम या नफरत से भरा है, या हमारा ध्यान हमेशा बिखरा हुआ रहता है, तो फिर यह मायने नहीं रखता कि हम कितने सफल हो जाते हैं। हम उस सफलता का आनंद ही नहीं ले पाएंगे। इसलिए, असली काम बाहरी दुनिया को बदलने से पहले अपने मन को समझने और उसे सही दिशा देने का है। हमारा मन एक वीडियो गेम की तरह है। हम हर दिन एक नए स्तर पर होते हैं, जहां हमें चुनौतियों का सामना करना होता है। अगर हम समझदारी से खेलते हैं, अपने अनुभवों से सीखते हैं, तो हर बार बेहतर होते जाते हैं। लेकिन अगर हम बिना सीखे, बिना जागरूक हुए वही गलतियां दोहराते रहते हैं, तो हम बार-बार अपने दुश्मन से हारते रहेंगे। यह कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि हमारा डर, बुरी आदतें और नकारात्मक सोच है।
असल में, हम जो कुछ भी करते हैं, उसका मकसद अपने सोचने और महसूस करने के तरीके (चेतना) को बदलना ही होता है। हम दोस्ती करते हैं, ताकि अकेलेपन से बच सकें, किताबें पढ़ते हैं, ताकि किसी महान शख्सियत के सकारात्मक विचारों को महसूस कर सकें और अपने सोचने के अनुभव को समृद्ध बना सकें। इसका मतलब है कि जीवन का असली केंद्र बाहर नहीं, भीतर है। अगर हम अपने मन को समझना, उसे शांत रखना और जागरूक होना सीख जाएं, तो जो दुनिया हमें उलझनों भरी लगती थी, वही हमें साफ और संतुलित नजर आने लगेगी।