मीडिया जिसे हम अनेक माध्यमों पर फैला एक व्यापक कैनवास कह सकते हैं, आज अभिव्यक्तियों के संबंध में यह लगातार अपनी महत्ता बढ़ा रहा है। दुनिया के सभी क्षेत्रों को समाहित करने और उनकी संप्रेषणीयता को व्यक्त करने का गुण रखने वाली इस अभिव्यक्ति को यूं ही नहीं लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं कहा जाता है।
दुनिया भर में लोकतंत्र को परिपक्व बनाने में मीडिया की बड़ी भूमिका रही है। यही नहीं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की आधारशिला में मीडिया ने अभूतपूर्व योगदान किया है।
हालांकि मीडिया ने अपने प्रकटीकरण के नए नए स्वरूप भी विस्तारित किए हैं। भारत ही नहीं अपितु दुनिया के सभ्य राष्ट्रों ने मीडिया की प्रकृति और प्रवृत्ति से उच्च मानकों के समाज और राष्ट्र निर्माण की बात को स्वीकार किया है।
अलग-अलग मीडिया ने अपने आरंभिक दौर से लेकर वर्तमान स्थिति में उद्देश्यपरक और वैधानिक कार्य की स्वीकार्यता बनाई है। आज मीडिया को समाज के बीच उपलब्ध रहते हुए लगातार कसौटियों का सामना करना हो रहा है।
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक सहित न्यू मीडिया ने आज सूचना की उपलब्धता से आगे निकलकर कई प्रतिमान स्थापित किए हैं। फिर चाहे वो सामाजिक स्थिरता की बात हो या सामंजस्य की। समाज को विकसित और आत्मउन्नति की दृष्टि से हस्तक्षेपी बनाने के लिए मीडिया असाधारण उपकरण जैसा है। इसीलिए राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में भी मीडिया आवश्यक अवयव है।
चूंकि मीडिया नागरिक स्वतंत्रता के रूप में उपजा एक आवश्यक अधिकार है जो असाधारण कार्य और प्रभाव पैदा कर सकता है। यही कारण है कि आज न्यू मीडिया की व्यापकता के कारण लोकतंत्र में अभिव्यक्ति और विचारों की भागीदारी अधिकाधिक सुनिश्चित हो रही है।
साइबर युग में देखें तो सभी मीडिया अपनी उपस्थिति को न्यू मीडिया के मंच पर होना आवश्यक आधार मानती है। कोरोनाकाल में सघनबंदी तथा उसके बाद की परिस्थितयों में न्यू मीडिया की नई तदबीरें सामने आई हैं। स्थापित संचार माध्यमों की रवायतों को न्यू मीडिया ने बदलने का अवसर दिया। हालांकि विश्व भर में प्रिंट मीडिया को लेकर पहले भी पर्यावरणीय दृष्टि से ई-पेज के रूप में तैयार करने की तेजी देखी गई और अमेरिका उसमें अग्रणी रहा।
एक दूरदर्शी प्रयोजन के रूप में ई-मीडिया उपयुक्त है। अब सूचना की उपलब्धता का संकट भी सरल हो गया है साथ ही तकनीक ने मीडिया कर्मियों को भी रफ्तार दी है।
इंटरनेट युक्त स्क्रीन युग ने क्षण में उपलब्ध होने वाली न्यू मीडिया, प्रिंट मीडिया और टेलीविजन जैसे माध्यमों की दशा को बदला है। यही कारण है कि लोगों में न्यू-मीडिया की अभिरूचि और अन्य मीडिया को लेकर मनोवैज्ञानिक बदलाव भी दिख रहे हैं।
मीडिया का व्यापक क्षेत्र अब इंटरनेट पर उपलब्ध है और हर मीडिया की सामग्री भी मानो सर्वसुलभ होने के लिए लगातार ऑनलाइन हो रही है। विश्व नागरिक की कल्पना ने आज अपनी उपस्थिति और प्रतिक्रियाएं भी ऑनलाइन देना आरंभ किया हैं।
ऑनलाइन भाषा अंतरण और अनुवाद तथा पठनीयता के विकल्प अब बोले जाने की तकनीक से लैस किए जा रहे हैं। यही कारण है कि न्यू मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों की लोकप्रियता शीर्ष पर है। अखबारों के ई-संस्करण, ऑनलाइन टेलीविजन, पोर्टल पर मीडिया मिक्स यानी कन्वर्जेंस का यह दौर तकनीकी उपयोगकर्ताओं के लिए आकर्षक है।
देश दुनिया की आकाशवाणी को उंगलियों पर स्क्रॉल करते हुए सुनने का आसान मंच भी रेडियो गार्डन के रूप में उपलब्ध है। सूचना संसार को सहज करता मीडिया का यह रूप आज साइबर पृष्ठभूमि की श्रेणी में है। साइबर युग ने ऑनलाइन मीडिया के पूरे तंत्र को साइबर अपराध के जोखिम से भी सीधा रूबरू कराने कार्य किया है।