विशाखापट्टनम में मयंक अग्रवाल की बल्लेबाजी का सबसे खास पक्ष था उनका कंट्रोल एग्रेशन। आम तौर पर एग्रेसिव बल्लेबाज माने जाने वाले मयंक अग्रवाल ने विशाखापट्टनम में हालात को समझ कर एक परिपक्व बल्लेबाज की तरह अपनी पारी को ‘बिल्ड’ किया। इसके अलावा गेंद को देरी से खेलने की तकनीक के चलते उन्हें बैकफुट पर जाकर शॉट्स खेलने में सहूलियत रही।
अपने दोहरे शतक के दौरान उन्होंने बैकफुट पर कई अच्छे शॉट्स लगाए। घरेलू क्रिकेट का अनुभव भी मयंक के काफी काम आया। मयंक अग्रवाल ने घरेलू क्रिकेट में कई बड़ी पारियां खेली हैं। इसी वजह से उन्हें ओपनर होते हुए भी स्पिन गेंदबाजों को खेलने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के स्पिन गेंदबाज को सेटल होने ही नहीं दिया।
मयंक के सधे हुए फुटवर्क और स्वीप शॉट पर नियंत्रण के चलते प्रोटिएस स्पिनर उनके सामने असहज ही रहे। तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी मयंक अग्रवाल ने बड़ी ही सधी रणनीति के साथ बल्लेबाजी की। आप मयंक अग्रवाल की बल्लेबाजी को ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ ढीले हाथ से बल्लेबाजी की जिससे उनके बल्ले से लगकर गेंद क्लोजिग फील्डर तक ना पहुंचे। क्योंकि हल्के और ढीले हाथ से खेले गए शॉट्स फील्डर्स के पास तक ‘कैरी’ नहीं करते।
अपना पांचवां टेस्ट खेल रहे मयंक अग्रवाल टीम इंडिया के चौथे ऐसे सलामी बल्लेबाज हैं जिन्होंने शतक को दोहरे शतक में तब्दील किया। मयंक अग्रवाल और रोहित शर्मा ने विशाखापट्टनम में टीम इंडिया को वो शुरुआत दी जो पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से नहीं मिली थी। रोहित शर्मा और मयंक अग्रवाल के बीच पहले विकेट के लिए 317 रन की साझेदारी हुई।
साल 2006 के बाद पहली बार भारतीय सलामी जोड़ी ने 300 से ज्यादा रन की साझेदारी की। इससे पहले वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ ने 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ 400 रन से ज्यादा की साझेदारी की थी। खैर, 300 रनों की साझेदारी के बाद अपने टेस्ट करियर में पहली बार सलामी बल्लेबाजी कर रहे रोहित शर्मा दोहरा शतक बनाने से चूक गए, लेकिन मयंक अग्रवाल ने यह कारनामा किया।
रोहित शर्मा के आउट होने के बाद मयंक अग्रवाल के सामने विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा आउट हुए, लेकिन दूसरे छोर पर वो संयम के साथ रन बनाते रहे। आखिरकार एल्गर की गेंद पर उनसे गलती हुई और डीप मिडविकेट पर उनका कैच लपका गया।
मयंक 215 रन के निजी स्कोर पर आउट हुए। उन्होंने अपनी इस पारी में 371 गेंदों का सामना किया। उनकी पारी में 23 चौके और 6 छक्के शामिल थे। मयंक ने अब तक सिर्फ 5 टेस्ट खेले हैं, जिसमें उन्होंने 61 की औसत से 490 रन बनाए हैं । इसमें एक दोहरा शतक और 3 अर्धशतक शामिल है।