अलीबाबा ने मोबाइल और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर UC Web नाम की एक कंपनी खोली जिसे बाद में अपने UC Browser से जोड़ दिया- फाइल फोटो
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अलीबाबा असल में ‘अलीबाबा और चालीस चोर’ नाम की मशहूर कहानी का मशहूर किरदार है। यह कहानी अरब की मशहूर किताब वन थॉउजेंट एंड वन नाइट्स’ शनी ‘एक हजार एक रातें' में संकलित कहानी का हिस्सा है। 'अलीबाबा डॉट कॉम' ने अपना नाम यहीं से मिला। अब ये करीब 15 अरब डॉलर की कंपनी है।
चीन ने ऐसी नीतियां बनाई कि बाहरी कंपनियां चीन में अपना कारोबार न फैला सकें, इसलिए चीनी कंपनियों ने खूब पैसा कमाया। जब चीन में संभावनाएं कम हो गईं तो इन कंपनियों ने बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों में पांव फैलाने शुरू कर दिए।
भारत की मेक इन इंडिया जैसी उदारवादी नीतियों से तो जैसे इनकी लॉटरी लग गई। भारत में स्टार्ट अप का दौर शुरू हो रहा था। इसमें आप बिजनेस का कोई नया और नायाब ऑनलाइन आइडिया लेकर आइए और पैसा लगाने के लिए अलीबाबा जैसी चीनी कंपनी तैयार बैठी थी। लेकिन इसी के साथ अलीबाबा बड़ी चालाकी से चुपचाप भारत की मीडिया में दाखिल हो गया।
अलीबाबा ने मोबाइल और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर UC Web नाम की एक कंपनी खोली जिसे बाद में अपने UC Browser से जोड़ दिया। कंपनी का शुरूआती निवेश 50 मिलियन डॅालर था जो तीन साल में बढ़कर 200 मिलियन डालर तक पहुंच गया।
UC Browser के इंडिया हैड थे डेमोन शी। वे आमतौर पर चीन में रहते थे और अपना एक चीनी प्रतिनिधि यहां इंडिया में रखते थे। इन्होंने गुरुग्राम में एक दफ्तर खोला जिसमें कुछ पत्रकार, आईटी और एमबीए के लड़के रखे। लेकिन इन छोटे पत्रकारों को आउट सोर्स पर रखा गया। पर इन सबको इनकी हैसियत से कहीं ज्यादा सेलरी दी गई। लेकिन UC Browser की कोर टीम सीधे अलीबाबा के पेरोल पर थी।
न्यूज सर्विस के लिए UC Browser ने शुरू में मीडिया हाउस को पैसा भी दिया- सांकेतिक तस्वीर
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इन पत्रकारों की सेलरी लाखों में थीं। इन्हें अलीबाबा कंपनी के महंगे शेयर भी दिए गए। इन्होंने UC Browser में तमाम भारतीय मीडिया वेबसाइटों से खबरें अपने एप के जरिए मोबाइल फोन पर देनी शुरू कर दीं। न्यूज सर्विस के लिए UC Browser ने शुरू में मीडिया हाउस को पैसा भी दिया। बाद में उन्हें पैसा देना बंद कर दिया क्योंकि तमाम मीडिया हाउस की खबरों के हिट्स आसमान छूने लगे थे।
वेबसाइटस के हिट्स बढ़ रहे थे सो उन्होंने परवाह भी नहीं की और मुफ्त में खबरें देने लगे। यूजर भी खुश था क्योंकि UC Browser के जरिए उसे उसके फोन पर एक जगह सभी वेबसाइटों की पल पल की खबरें मिलना शुरू हो गईं। इस एप को डाउनलोड करते ही मोबाइल फोन यूजर का सारा डाटा चीनी सर्वर पर चला जाता। इसमें उसके रोजमर्रा के बैंक लेनदेन से लेकर उसके पासवर्ड तक का डाटा शामिल होता।
Browser कंपनी कंटेंट जेनेरेश और सर्विस प्रोवाइडिंग के मामले में नंबर-1 बन गई है। इसके भारत में 13 करोड़ से ज्यादा यूजर हो गए। इसी कंपनी के एक पत्रकार ने बाद में UC Browser की "कथित देश विरोधी" कारस्तानियों का खुलासा करते हुए कंपनी पर मुकदमा ठोंक दिया।
यह भी कहा गया कि UC Browser का इंडिया हैड डेमोन शी जब भारत आता था, तो वह अपने यहां रहने का गलत पता देता था। वह भारत में महीनों रहा करता था। कहां रहता था क्या करता था, ये किसी को पता नहीं। यही नहीं UC Browser केवल चुनी हुई खबरें ही प्रसारित करता है। अगर कोई खबर चीन से जुड़ी है तो पेंगिंग से अप्रूवल के बाद ही प्रसारित होगी, लेकिन इसके पीछे की असली कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प है...
जारी...
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