धोनी उस समय भी शांत ही रहते थे।
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पहली बार मेरी मुलाकात माही से जून 2006 में हुई थी। दरअसल मेरे पास मेरे मित्र अतुल गंगवार का फोन आया माही को अपने कुछ दोस्तों के साथ फिल्म "फिर हेराफेरी" देखनी है। क्या आप कुछ ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि लोग अधिक न हों। मेरे पास इंदिरापुरम में एक मल्टीप्लेक्स का पीआर का काम था, मेरे मित्र राहुल शर्मा उस मल्टीप्लेक्स को मैनेज करते थे। मैंने उनसे बात की और यह भी बताया कि कोई मीडिया नहीं, कोई प्रचार नहीं। फिर भी वह तुरंत तैयार हो गए।
राहुल शर्मा ने नए-नए बने लाउंज को हमारे लिए खोल दिया। लाउंज में जाने का रास्ता अलग से ही था। इसमें करीब 24 लक्जरी सीट थी। तय समय से धोनी अपने कुछ मित्रों के साथ आए। पहले लाउंज में बैठकर बातचीत हुई फोटो हुए। अरुण पांडेय के साथ कुछ लोग और भी थे उस दिन। धोनी उस समय भी शांत ही रहते थे।
अभिवादन का उत्तर भी मुस्कराहट से ही देते थे। मैंने पूछा भी कि कैसी फिल्म पसंद करते हैं, तो वह बोले हर तरह की फिल्म अच्छी लगती है, लेकिन कॉमेडी की फिल्म देखना अधिक अच्छा लगता है। किशोर कुमार के गाने मुझे अच्छे लगते हैं। जॉन अब्राहम की तरह मोटरसाइकिल चलाना उन्हें पसंद है। जॉन अभी भी उनके अच्छे मित्र हैं।
एक बार हमने धोनी और उनके मित्रों के लिए सितंबर 2006 में फिल्म "खोसला का घोसला" का शो आधे घंटे तक रोके रखा। ये बात गाजियाबाद में ही वैशाली के एक सिनेमा हाॅॅल की है। रात 9 बजे का शो था और ऊपर की चार पंक्तियां सिर्फ हमारे लिए रोकी गईं थी। हमें बताया गया कि धोनी और साथी आधे घंटे देर से आएंगे।
इसकी सूचना सार्वजनिक करने के बाद हमने लोगों से अनुरोध किया कि फिल्म को देर से शुरू करने की वह सब सहमति दें। धोनी अपने मित्रों के साथ रात 9.30 बजे करीब पहुंचे। उनके साथ पूरी टोली थी। धोनी ने पहुंचते ही सबसे पहले सबसे माफी मांगी। फिर इंटरवल में लोगों के साथ फोटो खिंचाए और फिल्म खत्म होने के बाद सिनेमाघर के सभी स्टाफ के साथ फोटो खिंचवा कर सबको खुश कर दिया।
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