ईवीएम विरोधी कार्यक्रम के मंच पर शरद पवार
- फोटो : एएनआई
ईवीएम पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पहले भी स्पष्टीकरण दे चुका है। लेकिन लगता है हमारे यहां ईवीएम अब मतदान की मशीन न होकर पराजित पक्ष के लिए हार के स्थाई ठीकरे के रूप में तब्दील होती जा रही है। मारकडवाडी की ही बात करें तो वहां राकांपा (शरद) के उत्तम जानकर ने भाजपा के राम सातपुते को कुल 13 हजार 147 वोटों से हराया था। जीत का यह अंतर काफी है। जानकर को ये वोट पूरे विधानसभा क्षेत्र से मिले थे। ऐसे में केवल मारकडवाडी गांव के मतदान को मुद्दा बनाकर मॉक पोलिंग करवाने की बात गले नहीं उतरती।
शरद पवार भी मारकडवाडी पहुंचे
इस बीच चुनाव नतीजों से शुरू में हताशा में डूबे शरद पवार भी मारकडवाडी पहुंचे और उन्होंने कांग्रेस की तर्ज पर चुनाव ईवीएम के बजाए बैलट पेपर से कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के बाकी लोकतांत्रिक देशों में मत पत्रों के जरिए मतदान हो रहा है तो भारत में क्या दिक्कत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों से राज्य की जनता खुश नहीं है। इस बयान के पीछे कई चुनाव लड़ चुके शरद पवार की यह पूर्वाग्रह है कि मतदाता जो मानस लोकसभा चुनाव में बनाता है, वही विधानसभा चुनाव नतीजों में भी परिलक्षित होता है। हकीकत में ऐसा हो, जरूरी नहीं है। विधानसभा चुनाव के मुद्दे और तकाजे अलग अलग होते हैं। दोनो में हमेशा एक से नतीजे आएं, यह जरूरी नहीं है।
शरद पवार की निराशा
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के चार माह पहले देश के साथ राज्य की 47 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 30 सीटें जीतकर भारी कामयाबी हासिल की थी। लेकिन विधानसभा चुनाव आते-आते पवार के प्रति सहानुभूति लहर और इंडिया गठबंधन के पक्ष में बना माहौल हाशिए पर चला गया। शरद पवार की पार्टी विस चुनाव में मात्र 10 सीटें ही जीत पाई।
यहां दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के घटक राकांपा( शरद) ने 8 सीटें जीतने से गदगद पवार ने पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा था कि मोदी के धुआंधार प्रचार के कारण ही हम शानदार जीत हासिल कर पाए। तब पवार के हिसाब से ईवीएम भी बढ़िया काम कर रही थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के लिए उन्होंने मोदी को श्रेय देने की जगह हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा। गोया लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए ईवीएम अलग-अलग ढंग से मैनेज की गई हों।
शरद पवार की पार्टी की परफार्मेंस
इन चुनावों में अगर शरद पवार की पार्टी के परफार्मेंस की ही बात की जाए तो उन्हें इस साल हुए लोकसभा चुनाव में 10.27 फीसदी वोट मिले थे और चार माह बाद हुए विधानसभा चुनाव में 11.28 प्रतिशत वोट मिले। यानी करीब एक फीसदी ज्यादा। अजित पवार गुट के अलग होने के बाद शरद पवार के पास 14 विधायक बचे थे। अब चुनाव बाद भी उनके 10 विधायक हैं। यानी कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। अब शरद पवार अपनी निराशा को जनता की हताशा के रूप में पेंट करना चाहते हैं तो यह भी एक थकी हुई चाल ही है।
अगर महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे सच में जनाकांक्षा के पूरी तरह विपरीत आते तो जनता ही सड़कों पर उतर आती। वैसा कहीं कुछ नहीं दिखा। ईवीएम खारिज करने को लेकर जो राजनीतिक प्रतिरोध हो रहा है, उसे भी आम जनता कौतूहल के साथ देख रही है। अलबत्ता हर चुनाव में मारकडवाडी जैसी ‘प्रोटेस्ट माॅक ड्रिल’ हर जगह होने लगेगी तो हमारे समूचे चुनाव सिस्टम पर गंभीर सवाल उठने लगेगा। इससे कोई समाधान शायद ही निकले, लेकिन अवांछित अराजकता जरूर फैलेगी। सुविधानुसार ईवीएम को खारिज करने और निर्वाचन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करते रहने की जगह अगर पराजित पार्टियां आत्मावलोकन कर आंतरिक सुधार करें तो लोकतंत्र ज्यादा मजबूत होगा।
-----------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।