मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम तट पर हुई भगदड़ अपनों से बिछड़ने से दुखी परिजन
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मौनी अमावस्या के लिए नहीं बनी कोई भी ठोस कार्ययोजना
सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से पता था और सरकार की ओर से दावे किए जा रहे थे कि 10 करोड़ श्रद्धालु मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में पावन संगम में डुबकी लगाने आ सकते हैं तो उसे लेकर कोई भी ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं बनी? क्यों भीड़ को संगम की ओर आने दिया गया? अखाड़ों के अमृत स्नान से चंद घंटे पहले कैसे श्रद्धालुओं का जमावड़ा संगम नोज के आसपास हो गया? प्रशासन ने भगदड़ के बाद पांटून पुल तो खोला, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई। पांटून पुल पर श्रद्धालु फंस गए।
हालांकि, इतने बड़े मेले और श्रद्धालुओं को इतनी बड़ी संख्या को संभाल पाना आसान नहीं है, क्योंकि सरकार ने पहले ही इतनी भीड़ का अनुमान लगाया था और दावा किया था तो उस स्तर की तैयारियां क्यों नहीं की गईं? क्यों जिस समय भगदड़ की स्थिति बनी, उस समय घाट पर सुरक्षा की व्यवस्था चाक-चौबंद नहीं थी? भगदड़ की घटना का नतीजा यह रहा है कि जो अखाड़े अमृत स्नान के लिए संगम की ओर बढ़ रहे थे, वो लौट गए। अखाड़ों ने प्रशासन की तैयारियों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सरकार को पहले से अधिक तैयारी करनी होगी। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों से सहायता लेनी होगी। नहीं तो विशेष नक्षत्र का योग यूं ही लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा।
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