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मुड़-मुड़ के देख: जीवन को ठहरकर देखना परिपक्वता है, यह निष्क्रियता नहीं

Fri, 05 Jun 2026 07:00 AM IST
Pavan जॉर्ज संतायाना

सार

वृद्धावस्था जीवन को ठहरकर देखने की दृष्टि देती है। यह ठहराव निष्क्रियता नहीं, बल्कि परिपक्वता का वह रूप है, जिसमें मनुष्य जीवन की वास्तविक प्राथमिकताओं को पहचानने लगता है।
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जीवन को ठहरकर देखना परिपक्वता है - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
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वृद्धावस्था जीवन का अंतिम चरण नहीं, बल्कि अनुभव, संतुलन और आत्मिक गहराई का वह समय है, जहां मनुष्य स्वयं को सबसे अधिक स्पष्टता से समझ पाता है। समाज प्रायः युवावस्था को ऊर्जा, गति और संभावनाओं का प्रतीक मानता है, किंतु यह सत्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी परिवार और संस्कृति की वास्तविक जड़ें उसके बुजुर्गों में ही सुरक्षित रहती हैं। वे केवल अधिक आयु वाले लोग नहीं होते, बल्कि समय, संघर्ष और जीवन के बदलते स्वरूप के साक्षी होते हैं।
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बुजुर्गों ने जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव देखे होते हैं, इसलिए उनके शब्दों में केवल सलाह नहीं, बल्कि अनुभव की गहराई छिपी होती है। युवावस्था अक्सर गति व महत्वाकांक्षा से भरी रहती है, जहां युवा भविष्य को पाने की जल्दबाजी में वर्तमान की शांति खो देता है। इसके विपरीत वृद्धावस्था जीवन को ठहरकर देखने की दृष्टि देती है। यह ठहराव निष्क्रियता नहीं, बल्कि परिपक्वता का वह रूप है, जिसमें मनुष्य जीवन की वास्तविक प्राथमिकताओं को पहचानने लगता है। आज की पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है, परंतु इस गति में यदि बुजुर्गों की उपस्थिति और उनके अनुभवों की उपेक्षा होने लगे, तो समाज भीतर से खोखला होने लगता है। युवाओं को चाहिए कि वे अपने जीवन का कुछ समय बुजुर्गों के साथ अवश्य बिताएं। उनके साथ की गई बातचीत भी जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदल सकती है। बुजुर्गों के पास हर समस्या का आधुनिक समाधान भले न हो, किंतु कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की कला अवश्य होती है।

समय के साथ शरीर की शक्ति कम हो सकती है, परंतु अनुभव की गरिमा व मन की गहराई अधिक प्रखर हो जाती है। कई बार घर में किसी बुजुर्ग की उपस्थिति ही परिवार को स्थिरता देती है। वे परिवार की स्मृतियों, संस्कारों और परंपराओं के संरक्षक होते हैं। जो समाज अपने बुजुर्गों का सम्मान करता है, वह केवल अपने अतीत का आदर नहीं करता, बल्कि अपने भविष्य को भी अधिक संवेदनशील, स्थिर और मानवीय बनाता है। बुजुर्गों का महत्व इसलिए नहीं है कि वे अधिक वर्ष जी चुके हैं, बल्कि इसलिए है कि उन्होंने जीवन को गहराई से समझा है।
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