राजनीति की मर्यादा को कब समझेंगे नेता?
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किसी को नीचा दिखाने से कोई छोटा नही हो जाता और ऐसा कहने वाले कोई बड़े नहीं हो जाते। राजनीति में भी एक मर्यादा होती है जिसकी अपेक्षा हर राजनीति दल के नेता से की जाती है। राजनेता का व्यक्तित्व चुम्बकीय होना चाहिए। लोगों को आकर्षित करने वाला होना चाहिए, लेकिन अब इसके उलट दूसरों पर दोषारोपण कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की प्रचलन हो गया है,जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नही है।
सरकार और विपक्ष दोनों ही अपना काम भूले
दरअसल, चुनाव में मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार को अपनी उपलब्धि बतानी चाहिए। अगर कुछ गलती हो जाए तो उस पर खेद व्यक्त करना चाहिए। सरकार का अपना विज़न होता है लक्ष्य होते हैं और वो उसी पर काम करती है। ऐसे में विपक्ष सरकार को सकारात्मक सहयोग करता है और इसकी खामियों को जनता के बीच उजागर करता है। नेता के चरित्र अनुसरणीय होता है। ये मार्गदर्शक होते हैं, जिनके कंधों पर देश, राज्य की जिम्मेवारी होती है। अगर ये बातें जेहन में हमेशा इन्हें याद रहे तो जरूर बेतुके बोल से बचेंगे और अपने चुंबकीय व्यक्तित्व से जनता को प्रभावित करेंगे।
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